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ट्रस्ट में स्वामी वासुदेवानंद शामिल, मिला राममंदिर आंदोलन का प्रसाद

Thu, 06 Feb 2020 01:38 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 06 Feb 2020 01:38 AM IST
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Trust included Swami Vasudevanand, got offerings from Ram Mandir movement
स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती - फोटो : अमर उजाला

अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण के लिए गठित श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास में स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती को शामिल किए जाने के बाद प्रयागराज में उनके अनुयायी आनंदित हैं। ट्रस्ट के गठन को लेकर तरह-तरह की मांग और दावे किए जाते रहे हैं। पहले कहा जा रहा था कि चारों पीठ के शंकराचार्यों को इसमें शामिल किया जाएगा लेकिन, सरकार ने ट्रस्ट में प्रयागराज के सिर्फ स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती जी महाराज को ही शामिल किया।

Trust included Swami Vasudevanand, got offerings from Ram Mandir movement
vasudevanand saraswati - फोटो : प्रयागराज

 विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारियों और संतों की ओर से बराबर यह मांग और दावे किए जाते रहे कि राम मंदिर आंदोलन से जुड़े संतों को ही न्यास में जगह दी जाए और ऐसा ही हुआ।ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी शांतानंद सरस्वती जी महाराज के नेतृत्व में उनके शिष्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती जी महाराज राम मंदिर निर्माण के लिए आयोजित शिलापूजन में शामिल होते रहे हैं।

Trust included Swami Vasudevanand, got offerings from Ram Mandir movement
ram mandir trust - फोटो : अमर उजाला

स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती के निजी सचिव ओंकार नाथ त्रिपाठी के मुताबिक स्वामी शांतानंद जी की परंपरा में जब स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती जी महाराज को पीठ का दायित्व मिला तो उन्होंने और पूरी निष्ठा के साथ विहिप के राम मंदिर आंदोलन को आगे बढ़ाया। शिलापूजन से लेकर शिलायात्राओं के अतिरिक्त विहिप की धर्मसंसद तक में वह बतौर अध्यक्ष शामिल होकर आशीर्वाद और मार्गदर्शन देते रहे हैं। विहिप के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंहल राम मंदिर आंदोलन के बारे में जब तक उनसे एकांत में भी मंत्रणा करते रहे।

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फाईल फोटो - फोटो : Social Media

एक धर्मयोद्धा के तौर पर वर्ष 1990 में कारसेवा की घोषणा होने पर स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती जी महाराज ने सुभाष चौराहे पर जुटे तमाम कारसेवकों के साथ अयोध्या के लिए कूच किया। लेकिन फाफामऊ पुल पर पहुंचते-पहुंचते उन पर वापसी के लिए दबाव बढ़ता गया और वहीं उन्हें रोक लिया गया। कारसेवक आक्रोशित हो उठे तो उन्होंने उन्हें नियंत्रित किया। ऐसे तमाम आंदोलनों में उनकी सक्रिय भागीदारी रही है। समय-समय पर संतों के सम्मेलन के माध्यम से राम जन्म भूमि आंदोलन के लिए जनता को प्रेरित करने के लिए वह देश के अलग-अलग भागों में जाते रहे हैं। सहजता के कारण ही अनेक धार्मिक कार्यक्रमों में उनकी सहज उपस्थिति बनी रहती है। यह उनका प्रयास ही रहा कि बड़ी संख्या में सनातनधर्मावलंबी विहिप केरामजन्म भूमि आंदोलन से जुड़ते गए।

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अयोध्याः रामलला की फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला
जन-जन से जुटाया जाएगा राम मंदिर निर्माण को धन
प्रयागराज।
यह राम का काम है, इसके लिए मुझे जो भी दायित्व दिया गया है, उसका मैं निष्ठापूर्वक निर्वहन करूंगा। ट्रस्ट सदस्यों की बैठकों में आगे की योजना तय होगी। वैसे मंदिर निर्माण का कार्य नवसंवत्सर, दशहरा या फिर दीपावली के पहले आरंभ किया जाएगा। राम जन-जन के थे, इसीलिए राम मंदिर निर्माण में जन-जन को जुड़ना चाहिए। जो रामशिलाएं पूजी गईं और जिन्हें देश भर में घुमाया गया, उन्हीं से राम मंदिर का निर्माण किया जाएगा। राम मंदिर तीर्थक्षेत्र न्यास में नाम शामिल किए जाने के बाद ‘अमर उजाला’ से बातचीत में उन्होंने कहा कि राम मंदिर न्यास के पास जितना भी धन रखा गया है, वह सब राम मंदिर के निर्माण में काम आएगा। मंदिर निर्माण के लिए जितने भी धन की आवश्यकता होगी, उसे जन-जन से जुटाया जाएगा। इसमें किसी एक व्यक्ति या निजी संस्था का धन नहीं लगना चाहिए। एक बात और, राम मंदिर के लिए जो दूसरा मॉडल प्रस्तुत किया जा रहा है, वह भारतीय शिल्प कला के अनुरूप नहीं है जबकि विहिप की ओर से दिया गया राम मंदिर का मॉडल भारतीय शिल्प और संस्कृति के अनुरूप है। राम मंदिर का निर्माण इसी आधार पर किया जाएगा।
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