बाढ़ से जूझ रही संगमनगरी पर संकट और गहराने वाला है। राजस्थान के कोटा व धौलपुर बैराज से सोमवार को 25 लाख क्यूसेक पानी छोड़ दिया गया। पहले से ही खतरे के निशान के करीब पहुंच चुकी गंगा-यमुना में जब तीन दिन बाद यह पानी पहुंचेगा तो तटवर्ती इलाकों में आई बाढ़ का दायरा और बढ़ सकता है। आशंका जताई जा रही है कि शहर के कुछ और हिस्से भी बाढ़ की चपेट में आ सकते हैं। मंडलायुक्त आशीष कुमार गोयल ने जिला प्रशासन को हालात से निबटने के लिए तैयार रहने का निर्देश दिया है। बाढ़ के खतरे से निबटने के लिए जिला प्रशासन ने सेना की मदद मांगी है।
लगातार बढ़ रहे जलस्तर के कारण गंगा-यमुना अब किसी भी समय खतरे का निशान पार कर सकती हैं। हालांकि सोमवार को गंगा एक सेमी और यमुना के दो सेमी प्रति घंटा बढ़ने से थोड़ी राहत महसूस की जा रही थी, लेकिन दोपहर बाद सिंचाई विभाग बाढ़ खंड के कंट्रोल रूम से जारी बुलेटिन में चंबल का 16 लाख क्यूसेक पानी यमुना में छोड़े जाने की जानकारी दी गई। तीन दिन के बाद जब यह पानी यहां पहुंचेगा तो यमुना का जलस्तर 86 से 87 मीटर तक जा सकता है, जो खतरे के निशान से दो मीटर से अधिक है। शाम पांच बजे बाढ़ खंड ने यमुना में अलग-अलग बांधों से 25 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने का बुलेटिन जारी किया।
जिसमें बताया गया कि राजस्थान के धौलपुर बैराज से 18.93 लाख 567 क्यूसेक और कोटा बैराज से 6.66 लाख, 758 क्यूसेक पानी यमुना में छोड़ा गया है। ऐसा अनुमान है कि इस पानी के यहां आने के बाद गंगा-यमुना के जलस्तर में बढ़ोतरी होगी, जिससे बाढ़ का पानी तटवर्ती इलाकों को पारकर शहर में घुस सकता है। मंडलायुक्त की ओर से डीएम व एसएसपी को हालात से निबटने के लिए तैयार रहने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। मंडलायुक्त ने डीएम से कहा है कि बाढ़ की आशंका को देखते हुए सभी तैयारियां पूरी कर ली जाएं।
चंबल नदी में आई बाढ़ के बाद राजस्थान के बांधों से यमुना में छोड़ी गई भारी जलराशि 19 सितंबर को यहां पहुंच सकती है। सिंचाई विभाग बाढ़ खंड के एक्सईएन बृजेश सिंह ने बताया कि कोटा और धौलपुर से छोड़े गए पानी पर लगातार नजर रखी जा रही है और प्रशासन के संपर्क में अभियंता बने हुए हैं, ताकि किसी भी तरह की स्थिति से निबटा जा सके। तीन दिन बाद यमुना में बाढ़ से पैदा होने वाले हालात से निबटने के लिए प्रशासन तैयारियों में जुट गया है।
गंगा का जल स्तर रात आठ बजे
फाफामऊ - 84.48मीटर
छतनाग - 83.78 मीटर
यमुना का जल स्तर
नैनी-84.40 मीटर
खतरे का निशान-84.73 मीटर
2 of 22
flood in prayagraj 2019
- फोटो : प्रयागराज
फाफामऊ, झूंसी में बिगड़े हालात
प्रयागराज। बाढ़ से फाफामऊ व झूंसी में हालात और बिगड़ गए हैं। फाफामऊ में कुंभ मेले में करोड़ों की लागत से बनाई गई डबल रोड बाढ़ के पानी के दबाव के कारण धंस गईं। इलाके के पांच दर्जन घरों में बाढ़ का पानी घुस गया है। वहीं झूंसी कोहना और नई झूंसी के तटवर्ती एक दर्जन घरों में सोमवार को पानी घुस गया। कछारी गांव बदरा-सोनौटी मार्ग पिछले तीन दिनों से बाढ़ की चपेट में है। तभी से तकरीबन बीस हजार की आबादी वाले एक दर्जन गांवों का संपर्क टूटा हुआ है। इनमें से आधा दर्जन गांव तो टापू में तब्दील हो गए हैं।
3 of 22
flood in prayagraj 2019
- फोटो : प्रयागराज
छतों पर गृहस्थी, हजारों लोगों ने फिर घर छोड़ा
प्रयागराज। खतरे के निशान के करीब पहुंचे गंगा-यमुना के जलस्तर ने अब तक तटवर्ती इलाके की दो से ढाई लाख की आबादी को चपेट में ले लिया है। सोमवार को कछारी इलाके की बस्तियों की गलियों-घरों में बाढ़ का पानी घुस गया। शहर के दारागंज, छोटा बघाड़ा, बेली कछार, नेवादा, द्रोपदी घाट, सलोरी, गंगा नगर समेत अन्य बाढ़ प्रभावित मोहल्लों में सोमवार को हालात और बिगड़ गए। नालियों के सहारे मोहल्ले की संकरी गलियों तक पहुंचा पानी रात में घरों के आंगन और किचन तक फैल गया। राजापुर, गंगा नगर समेत अन्य कछारी इलाकों में देर रात तक लोग सामान समेट कर सुरक्षित स्थानों की ओर जाते रहे। छोटा बघाड़ा, सलोरी में स्थिति सबसे ज्यादा विकराल रही।
4 of 22
flood in prayagraj 2019
- फोटो : प्रयागराज
मुआवजा न मिलने से नाराज ग्रामीणों ने किया चक्का जाम
मांडा। गंगा मेंकटान के चलते मकान गंवाने वाले ग्रामीणों ने सोमवार को प्रयागराज-मिर्जापुर राजमार्ग के दिघिया बाजार में चक्काजाम कर दिया। थाना क्षेत्र के नरवर चौकठा, उमापुर कलां, महेवा कलां, डेगूरपुर आदि गांव गंगा के किनारे पर बसे हैं। गंगा में कटान के चलते नरवर चौकठा व उमापुर गांव के दर्जनों परिवारों के मकान गंगा की कटान की भेंट चढ़ गए। मुआवजे की मांग को लेकर ग्रामीणों ने शनिवार को एसडीएम को ज्ञापन दिया था। लेकिन मांग पूरी न होने पर ग्रामीणों ने सोमवार को देर शाम एक घंटे राजमार्ग जाम कर दिया। दिघिया प्रधान प्रतिनिधि राम मिश्र के हस्तक्षेप पर ग्रामीण शांत हुए। एसडीएम मेजा दयाशंकर पाठक व सीओ मेजा सही राम के पहुंचने और मुआवजा देने के आश्वासन पर जाम खत्म हुआ।
5 of 22
flood in prayagraj 2019
- फोटो : प्रयागराज
छतों पर गृहस्थी, हजारों लोगों ने फिर घर छोड़ा
प्रयागराज। खतरे के निशान के करीब पहुंचे गंगा-यमुना के जलस्तर ने अब तक तटवर्ती इलाके की दो से ढ़ाई लाख की आबादी को चपेट में ले लिया है। सोमवार को कछारी इलाके की बस्तियों की गलियों -घरों में बाढ़ का पानी घुसता गया और लोग अनाज, बर्तन बिस्तर समेट कर सुरक्षित स्थानों की ओर निकलते रहे। नावों की मदद से बाढ़ के पानी से घिरे घरों से लोगों केसामान निकाले जाते रहे। ग्राउंड फ्लोर पर पानी आने के बाद लोगों ने पहली या दूसरी मंजिल पर शरण ली। हजारों की तादाद में ोग रिश्तेदारों के यहां या फिर राहत शिविरों में पहुंच गए। शहर के दारागंज, छोटा बघाड़ा, बेली कछार, नेवादा, द्रोपदी घाट, सलोरी, गंगा नगर समेत अन्य बाढ़ प्रभावित मोहल्लों में सोमवार को हालात और बिगड़ गए। नालियों के सहारे मोहल्ले की संकरी गलियों तक पहुंचा पानी रात में घरों के आंगन और किचन तक फैल गया। राजापुर, गंगा नगर समेत अन्य कछारी इलाकों में देर रात तक लोग सामान समेट कर सुरक्षित स्थानों की ओर जाते रहे। छोटा बघाड़ा, सलोरी में स्थिति सबसे ज्यादा विकराल रही।