राजा कोलंदर। एक ऐसा शख्स जिसका नाम लेते ही लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं। उसे नाम से ज्यादा जिले का पहला साइको किलर, इंसान की शक्ल में हैवान, खूनी दरिंदा आदि नामों से जाना जाता है। वह अपराध सिर्फ इसलिए नहीं करता था कि वह अपराधी था या अपराध करना उसकी फितरत थी। अपराध उसकी मानसिक खुराक थी। हत्या तो बहुत से अपराधियों ने की होगी लेकिन इंसान को मारकर उसका भेजा खाने वाला नर पिशाच शायद इकलौता कोलंदर होगा। पत्रकार धीरेंद्र की हत्या के बाद जब उसके आपराधिक कारनामों को खुलासा हुआ तो लोगों को यकीन नहीं हुआ कि उनके बीच का कोई शख्स इस कदर हैवान हो सकता है। इस हैवान ने सन 2000 में शहर को दहला दिया था।
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prayagraj news : राजा कोलंदर (फाइल फोटो)।
- फोटो : prayagraj
एक हिंदी दैनिक के पत्रकार धीरेंद्र सिंह 14 दिसंबर 2001 को रहस्यमय तरीके से लापता हो गए। वे दफ्तर से घर जाने की बात कहकर निकले थे। दो दिन बाद भी वह नहीं लौटे तो खोजबीन शुरू हो गई। कुछ पता नहीं चला। उस वक्त मोबाइल का चलन आम नहीं था। पुलिस को न तो सर्विलांस का पता था और न ही काल रिकार्ड्स के बारे में। दफ्तर वालों की सलाह पर पुलिस ने कॉल रिकार्ड्स को चेक किए।
धीरेंद्र के मोबाइल गायब होने के बाद उस मोबाइल से दो कॉल हुई थी। एक सांसद के बेटे के अलावा कातिल ने अपने घर पर भी बात की थी। पुलिस ने सांसद के बेटे को उठाया और उस घर का पता किया जहां से कॉल की गई थी। पुलिस तेजी से काम कर रही थी। कातिल का पता चल गया था। कीडगंज के तत्कालीन एसओ एसएन त्रिपाठी ने नैनी स्थित एक पिगरी फार्म में दबिश दी। यहीं राजा कोलेंद्र से दुनिया का सामना हुआ।
कोलंदर टाटा सूमो से कहीं भागने के फिराक में था। पुलिस उसे कीडगंज थाने में ले आई। वह किसी भी सूरत में यह मानने को तैयार नहीं था कि उसने धीरेंद्र का कत्ल किया है। धीरेंद्र को उसने अपना मित्र बताया। इसी दौरान उसने राज खोला कि वह वाहनों को लूट कर ड्राइवरों की हत्या करने वाला गिरोह चलाता है। जिस टाटा सूमो के साथ वह पकड़ा गया है, वह रायबरेली के एक युवक को मारकर लूटी गई है। उसने कई अपराध स्वीकार किए लेकिन धीरेंद्र की हत्या की बात उसने नहीं कुबूली। अब पुलिस ने मनोवैज्ञानिक रूप से उसे तोड़ना शुरू किया। उसकी पत्नी और बच्चों को थाने लाया गया। यहीं कोलंदर टूट गया। उसने धीरेंद्र के विषय में तमाम बातें बताईं। बहरहाल खुलासा झकझोर देने वाला था।
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
उसने बताया कि धीरेंद्र को उसने 15 दिसंबर की रात उस वक्त मार दिया जब वह पिगरी फार्म में आग ताप रहे थे। उसने पहले धीरेंद्र को गोली मारी फिर शव के कई टुकड़े कर यहां से लेकर रीवा और शहडोल तक टुकड़ों को फेंक दिया था। ऐसी नृशंस वारदात की बात सुनकर लोग सन्न रह गए। फिर शुरू हुआ कोलंदर से पूछताछ का दौर। अब उसके ऐसे-ऐसे कारनामे सामने आए कि वह दहशत का पर्याय बन गया। उसने एक एक करके 14 कत्ल की बात कुबूली। उसने करीब करीब एक ही तरीके से सबको मारा था। वह पहले पीठ पर गोली मारता था और फिर शरीर के टुकड़े-टुकड़े कर देता था। टुकड़ों को दूर-दूर गड्ढों में दफन कर देता था।
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हत्या
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
कई लोगों को तो उसने अपने पिगरी फार्म में ही दफन कर दिया था। लगातार हत्याओं के बाद भी जब वह पकड़ा नहीं गया तो उसका मनोबल काफी बढ़ गया था। हत्या जैसा जघन्य अपराध उसके लिए शौकिया खेल हो गया। पुलिस ने कई स्थानों पर छापा कर उन लोगों की हड्डियां बरामद कीं, जिनकी उसने हत्या की थी। उसने काफी पैसा वाहनों को लूटकर कमाया था। एक सरकारी दफ्तर में एडहॉक पर काम करने वाले कोलंदर ने उस समय लाखों रुपये ब्याज पर बांट रखे थे। तत्कालीन एसएसपी पीके तिवारी ने इस कांड के खुलासे पर एसएसपी आफिस में प्रेस कांफ्रेंस कर इलाहाबाद पुलिस की तुलना स्काटलैंड यार्ड से की थी। 14 हत्याओं का आरोपी राजा कोलंदर आज भी नैनी जेल में बंद है। उसे खूंखार अपराधियों के साथ रखा गया है।