प्रयागराजः गंगा में तेजी से हो रहा कटान, किला की ओर खिसका संगम
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अचानक प्रवाह बढ़ने से गंगा में कटान तेज हो गई है। बारिश से पहले लगातार जल बढ़ने से स्नान घाटों का किनारा डूबता जा रहा है। रविवार को सौ मीटर से अधिक संगम नोज का दायरा गंगा में विलीन हो गया। स्नानार्थियों की सुरक्षा के लिए लगाई गई जेटी प्रवाह का हिस्सा बन गई। किनारा कटने से तीर्थपुरोहितों ने अपनी चौकियां और झंडे भी समेटने शुरू कर दिए।
खास बात यह है कि गंगा पूरबवाहिनी की बजाए पश्चिमवाहिनी होकर बहने लगी हैं। इससे अब वीआईपी घाट के पास संगम शिफ्ट हो गया है। संगम शिफ्ट होने के साथ ही पंडे और पुरोहित अपनी नई जगह तलाशने में जुट गए हैं। सिंचाई बाढ़खंड के एक्सईएन ब्रजेश कुमार सिंह ने बताया कि जलस्तर तेज होने से घाटों पर कटान हो रही है।
अगले तीन-चार दिन के भीतर बारिश होने के भी संकेत मिले हैं। इस वजह से बाढ़ नियंत्रण की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। बालू की बोरियों से पाटकर कटान रोकने की कोशिश की जा रही है।
बाढ़ खंड के अभिंताओं का कहना है कि इस बार गंगा में सिल्ट लोड न होने की वजह से भी जल में प्रवाह तेज हुआ है। केंद्रीय जल आयोग ने रविवार को फाफामऊ में गंगा का जलस्तर 77.38 मीटर और प्रयागराज में छतनाग के पास 72.01 मीटर रिकार्ड किया। उधर, तीर्थपुरोहितों ने भी गंगा में कटान और प्रवाह बढ़ने पर चिंता जताई है।
गंगा आरती समिति के प्रदीप कुमार पांडेय के मुताबिक कोरोना संकट की वजह से ढाई महीने तक संगम बंद रहा। अब गंगा में कटान से बाढ़ से पहले ही तीर्थपुरोहितों को हटने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। नागवासुकि,दारागंज श्मशान घाट, काली घाट, रामघाट, महावीर घाट और अक्षयवट घाट पर भी कटान की वजह से तीर्थपुरोहित परेशान हो उठे हैं।