गंगा और यमुना के जलस्तर में शनिवार को भी बढ़ोतरी जारी रही। सुबह आठ बजे जारी रिपोर्ट के अनुसार नैनी में यमुना का जलस्तर 80.69 मीटर दर्ज किया गया। पिछले 24 घंटे में जलस्तर में 37 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी हुई है। वहीं फाफामऊ में गंगा 81.11 मीटर पर पहुंच गई, यहां भी 38 सेंटीमीटर की वृद्धि दर्ज की गई।
छतनाग में गंगा का जलस्तर 80.34 मीटर दर्ज किया गया, जो पिछले 24 घंटे में 37 सेंटीमीटर बढ़ा है। बक्शी बांध एसटीपी पर जलस्तर 80.88 मीटर दर्ज किया गया। प्रयागराज में गंगा-यमुना का खतरे का निशान 84.734 मीटर है।
यमुना के नैनी क्षेत्र में पिछले 24 घंटे में 10 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि फाफामऊ और छतनाग में बारिश नहीं हुई। इसके बावजूद नदियों के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी से तटीय इलाकों में चिंता बनी हुई है। प्रशासन के अनुसार जिले के सभी तटबंध फिलहाल सुरक्षित हैं। जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि को देखते हुए नदी किनारे के क्षेत्रों में निगरानी बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है।
जलस्तर की स्थिति 22 अगस्त (सुबह 8 बजे)
नैनी यमुना: 80.69 मीटर (+37 सेमी)
फाफामऊ गंगा: 81.11 मीटर (+38 सेमी)
छतनाग गंगा: 80.34 मीटर (+37 सेमी)
एसटीपी बक्शी बांध: 80.88 मीटर (+37 सेमी)
खतरे का निशान: 84.734 मीटर
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2026 : प्रयागराज में तेजी से बढ़ रहा है गंगा और यमुना का जलस्तर।
- फोटो : अमर उजाला।
खतरे की ओर बढ़ा गंगा-यमुना का जलस्तर, प्रशासन अलर्ट
गंगा-यमुना के जलस्तर में बढ़ोतरी से संगमनगरी में बाढ़ का खतरा बढ़ने लगा है। शुक्रवार रात आठ बजे तक यमुना का जलस्तर नैनी में 80.59 मीटर गंगा का जलस्तर फाफामऊ में 80.87 मीटर और छतनाग में 80.17 मीटर पहुंच गया। लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन ने तटीय और निचले इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है। खतरे का निशान 84.734 मीटर है।
शुक्रवार सुबह आठ बजे नैनी में यमुना का जलस्तर 80.32 मीटर था जो रात आठ बजे तक 27 सेमी बढ़कर 80.59 मीटर हो गया। इसी तरह फाफामऊ में गंगा 80.73 से बढ़कर 80.87 मीटर और छतनाग में 79.97 से बढ़कर 80.17 मीटर पहुंच गई। एसटीपी बक्शी बांध का जलस्तर भी 80.51 से बढ़कर 80.74 मीटर हो गया।
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2026 : प्रयागराज बाढ़ का दृश्य।
- फोटो : अमर उजाला।
गंगा के जलस्तर में आज और वृद्धि के आसार
कानपुर गंगा बैराज से शुक्रवार को करीब 3.04 लाख क्यूसेक पानी छोड़ने से प्रयागराज में शनिवार तक गंगा के जलस्तर में और वृद्धि के आसार हैं। नरौरा बैराज से करीब 1.34 लाख क्यूसेक और हरिद्वार से करीब 96 हजार क्यूसेक पानी छोड़ने की सूचना है। इससे गंगा के तटीय और निचले इलाकों में सतर्कता बढ़ा दी गई है।
चार घंटे में भी जारी रही बढ़ोतरी
शुक्रवार शाम चार से रात आठ बजे के बीच भी नदियों के जलस्तर में वृद्धि दर्ज की गई। नैनी में यमुना आठ सेमी, फाफामऊ में गंगा छह सेमी और छतनाग में गंगा छह सेमी बढ़ी। एसटीपी बक्शी बांध पर भी जलस्तर आठ सेमी बढ़ा।
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संगम तट पर हनुमान मंदिर कॉरिडोर के भीतर रिसकर पहुंचा बाढ़ का पानी।
- फोटो : अमर उजाला।
राहत चौकियों को किया गया सक्रिय : डीएम
डीएम मनीष कुमार वर्मा ने कहा कि राहत चौकियों को सक्रिय कर दिया गया है। सभी उपजिलाधिकारियों और राजस्व कर्मियों को अपने-अपने क्षेत्रों में निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। आवश्यकता पड़ने पर तत्काल राहत और बचाव कार्य शुरू करने के लिए कहा गया है। बाढ़ प्रभावित या संभावित प्रभावित लोगों से अपील की गई है कि वे सुरक्षित स्थानों और प्रशासन की ओर से बनाए गए शरणार्थी शिविरों में पहुंचें। शिविरों में आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं।
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शंकरगढ़ में टोंस व लोनी नदी में आई बाढ़ का एसडीएम ने किया निरीक्षण।
- फोटो : संवाद।
जलस्तर में बढ़ोतरी से क्षेत्र के 180 लोग राहत शिविर में पहुंचे
यमुनापार के शंकरगढ़ इलाके में टोंस और लोनी नदी के जलस्तर बढ़ने से शुक्रवार को कई गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। बराडीह, इटवा, देवरा, लोनीपार, ककरहा बस्ती, सिंहपुर और कॉलोनी बस्ती समेत आसपास के क्षेत्रों में बाढ़ का पानी पहुंचने से ग्रामीणों का जनजीवन प्रभावित हो गया है।
बाढ़ प्रभावित लोगों की सुरक्षा को देखते हुए लोनीपार स्थित जूनियर विद्यालय और प्राथमिक विद्यालय में राहत शिविर बनाए गए हैं। प्रशासन के अनुसार, करीब 180 लोगों को राहत शिविर में पहुंचाया गया है।