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प्रयागराजः यमुना के बाद गंगा के भी तेवर पड़े नरम

Tue, 24 Sep 2019 12:46 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Tue, 24 Sep 2019 12:46 AM IST
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Prayagraj: Ganges too soft after Yamuna
prayagraj me flood - फोटो : प्रयागराज

खतरे के निशान से ऊपर बह रही यमुना के बाद रविवार को गंगा का भी जलस्तर घटने लगा। गंगा-यमुना दोनों एक-एक सेमी प्रति घंटा की रफ्तार से घट रही हैं। इससे लोगों ने राहत की सांस तो ली है, लेकिन दुश्वारियां कम नहीं हुई हैं। गलियों-बस्तियों से पानी सिमटने के साथ ही अब वहां संक्रमण फैलने की आशंका है। उधर, हमीरपुर, बांदा में जल स्तर तेजी से घटने से अगले 48 घंटे में यहां भी तटवर्ती इलाकों में भरा जल काफी हद तक उतरने की बात कही जा रही है।



खतरे के निशान से करीब एक मीटर ऊपर जाने के बाद यमुना तो शनिवार की रात से मामूली गति से घटने लगी, लेकिन गंगा का जलस्तर रात भर स्थिर रहा। सुबह से गंगा के जलस्तर के भी घटने का क्रम शुरू हुआ, लेकिन उतार-चढ़ाव बने रहने की वजह से लोग दिल थामे रहे। दोपहर दो बजे फिर गंगा स्थिर हो गई। हालांकि छतनाग में गंगा और नैनी में यमुना के घटने से थोड़ी राहत महसूस की जाती रही। रात दस बजे से फिर गंगा-यमुना में क्रमश: एक-डेढ़ सेमी प्रति घंटा की रफ्तार से घटाव शुरू हो गया। सिंचाई विभाग बाढ़ खंड की ओर से जारी बुलेटिन के अनुसार फिलहाल चंबल, केन और बेतवा के बांधों से बड़ी जलराशि नहीं छोड़ी गई है।

इससे अब गंगा-यमुना के जलस्तर में लगातार कमी आने की उम्मीद है। फिलहाल कहा जा रहा है कि अगर इसी तरह से पानी घटता रहा तो दोनों नदियां 48 घंटे बाद खतरे के निशान से नीचे पहुंच सकतीं हैं। सिंचाई विभाग के अभियंताओं ने बताया कि हमीरपुर में यमुना 15 सेमी प्रति घंटा की रफ्तार से घट रही है, जबकि बांदा में भी जलस्तर तेजी से घट रहा है। ऐसे में यहां भी सोमवार दोपहर तक नदियों के जलस्तर के घटने के अनुपात में तेजी आ सकती है। फिलहाल दोनों नदियों के तटवर्ती इलाकों में अब तक ढाई लाख से अधिक की आबादी बाढ़ की चपेट में है।

जिस गति से जल स्तर घट रहा है, उससे मंगलवार तक गंगा-यमुना प्रयागराज में खतरे के निशान से नीचे बहने लगेगी। हमीरपुर और बांदा में यमुना खतरे के निशान से नीचे आ गई है। अब चंबल, केन और बेतवा से जल दबाव नहीं है। इसलिए अब बाढ़ का खतरा बढ़ने जैसी चिंता नहीं रह गई है। बृजेश सिंह, अधिशासी अभियंता, सिंचाई बाढ़ खंड, प्रयागराज

गंगा का जलस्तर रात 10 बजे
--------------------------------
फाफामऊ -85.61मीटर
छतनाग -  84.86 मीटर
यमुना का जलस्तर
नैनी - 85.50 मीटर
-------------------------
खतरे का निशान- 84.73 मीटर

Prayagraj: Ganges too soft after Yamuna
prayagraj me flood - फोटो : प्रयागराज

एक महीने की मुसीबत देकर जाएगी बाढ़

प्रयागराज। शहरियों के लिए बाढ़ लंबी मुसीबत का कारण बनने जा रही है। अब जबकि बाढ़ का पानी घटने लगा है, प्रभावित इलाकों में गंदगी और दुर्गंध से लोगों का जीना मुहाल है। पानी निकलने के बाद गंदगी मच्छर जनित बीमारियों से निपटने की प्रशासन के सामने चुनौती होगी। अफसरों का कहना है कि पांच से छह दिन बाद ही बाढ़ का पानी निकलेगा लेकिन अपने पीछे गंदगी का अंबार छोड़ जाएगा। बाढ़ के पानी के साथ कछारी इलाके की गंदगी भी मोहल्लों में पहुंच गई है।

बाढ़ का पानी निकलने के बाद यह गंदगी बस्तियों में ही रह जाएगी तथा इनकी सड़न लोगों की बीमारी का कारण बनेगी। इसके अलावा खाली स्थानों, सड़काें, गलियों में कीचड़ का आलम होगा। हजारों मकानों में अभी से बाढ़ का पानी घुस गया है। इस तरह से 15 दिन से भी अधिक समय तक पानी में डूबे रहने से मकान कमजोर हो जाएंगे तो सीलन की भी शिकायत होगी। इसकी वजह से बाहर ही नहीं घर के भीतर भी बदबू, मच्छर आदि से लोगों की परेशानी बढ़ने की आशंका है। प्रशासन भी बाढ़ का पानी निकलने के बाद आने वाली इस मुसीबत से अवगत है तथा इससे निपटने के लिए अभी से तैयारी शुरू कर दी गई है। 

Prayagraj: Ganges too soft after Yamuna
prayagraj me flood - फोटो : प्रयागराज

सड़क पर सफाई, गलियों में ‘नरक’

प्रयागराज। बाढ़ प्रभावित मोहल्लों में गंदगी से गलियां और नालियां बजबजा रही हैं। सड़कों पर कूड़े के ढेर लगे हैं। रविवार को बारिश के बाद फैला कीचड़ से परेशानी का कारण बना रहा। जल कुंभी का फैलाव मुसीबत बना है। सीवर ओवर फ्लो होने से शौचालयों की गंदगी गलियों तैर रही है। सफाई कार्य में नगर निगम कर्मचारियों की लापरवाही बाढ़ पीड़ितों पर भारी पड़ रही है। लोग परेशान होकर भटक रहे हैं, कहीं सुनवाई नहीं हो रही है। 

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Prayagraj: Ganges too soft after Yamuna
prayagraj me flood - फोटो : प्रयागराज

तैर रही गंदगी
राजापुर, गंगानगर, भुलई का पुरवा, छोटा बघाड़ा, बड़ा बघाड़ा, सलोरी, दारागंज, बक्शी कला में गंदगी फैली है। कूड़े के ढेर अब कीचड़ में तब्दील होकर फिसलन का कारण बने हैं। मोहल्लों में भरे पानी में हर तरफ फैली जलकुंभी बड़ी मुसीबत है। राजापुर, गंगानगर, नेवादा, छोटा बघाड़ा, ढरहरिया, ऊंचवागढ़ी, सरकुलर रोड, बेली आदि मोहल्लों की गलियों में उतराती गंदगी बीमारी बांट रही है। 

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Prayagraj: Ganges too soft after Yamuna
prayagraj me flood - फोटो : प्रयागराज

खाना भले न मिले लेकिन सफाई जरूरी है

रविवार को यमुना किनारे बसे मोहल्लों में यमुना के पानी के उतरने से लोगों ने राहत की सांस तो ली लेकिन अब भी भीतर और बाहर मुसीबतों की बाढ़ बरकरार है। घरों की निचली मंजिल का आधे से ज्यादा हिस्सा पानी में डूबा है, ऐसे में लोग घरों में कैद हैं। कई जगहों पर किसी भी तरह की राहत अब तक नहीं पहुंच सकी है। मायूस होकर मोहम्मद कासिम बोले, मदरसा तायरा और मस्जिद में पानी भरा है, लिहाजा जुमे की नमाज भी नहीं हो सकी। बाकी छात्रों को दूसरे मदरसों में भेज दिया गया है। गड्ढा कॉलोनी में डा.आजमी और शमीम दरोगा वाली गली के पास रहने वाली अंजुम बोलीं, पानी लौटने से यहां जबर्दस्त गंदगी फैली है, जिसकी सफाई जल्द से जल्द न कराई गई तो संक्रामक बीमारी के फैलने का अंदेशा है। खाना भले न मिले लेकिन सफाई जरूरी है।

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