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अंधविश्वास की हद: 'देवी मां ही जानवरों को रखेंगी जिंदा', बेटी के शव के साथ पांच दिन तक रहने वाले परिवार का एक और खौफनाक सच

Thu, 30 Jun 2022 09:55 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, prayagraj
अमर उजाला नेटवर्क, prayagraj Published by: शाहरुख खान Updated Thu, 30 Jun 2022 09:55 AM IST
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prayagraj blind faith Even villagers do not let villagers feed them, used to say that only the mother goddess will keep the animals alive.
prayagraj blind faith - फोटो : अमर उजाला
प्रयागराज के करछना के डीहा गांव में बेटी के शव के साथ घर के भीतर बंद मिले परिवार के लोग अंधविश्वास में इस कदर घिरे हुए थे कि वह पालतू जानवरों को भी चारा-पानी नहीं देते थे। उनके पास छह जानवर थे लेकिन खाना नहीं मिलने पर भूख से तड़पकर उन्होंने एक-एक कर दम तोड़ दिया था। ग्रामीण अगर जानवरों को कुछ खिलाने की कोशिश करते थे, तो परिवारवाले उनसे भी झगड़ पड़ते थे। उधर, पोस्टमार्टम के बाद युवती के शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। जबकि तीन बहनों को ससुराल भेज दिया गया। डीहा गांव निवासी अभयराज के पास दो भैंस, दो गायें व दो बछड़े थे। गांववाले बताते हैं कि मवेशी काफी अच्छी नस्ल के थे। लेकिन अंधविश्वास के फेर में घरवालों ने उन्हें भी चारा-पानी देना बंद कर दिया था। जानवरों की बिगड़ती हालत देख एक बार जिला पंचायत सदस्य विजयराज यादव ने चारा भेजवाया तो परिवार के सदस्यों ने उसे फेंक दिया था।

 
prayagraj blind faith Even villagers do not let villagers feed them, used to say that only the mother goddess will keep the animals alive.
डीहा गांव में अभयराज यादव का मकान। - फोटो : अमर उजाला।
ग्रामीणों के टोकने पर वह झगड़ा करने पर उतारू हो जाते और कहते कि देवी मां ही जानवरों को जिंदा रखेंगी। आखिरकार भूख से तड़प-तड़पकर एक-एक कर सभी जानवरों की मौत हो गई। हालत यह थी कि जानवरों की मौत के बाद परिवारवालों ने उनके शवों को भी हाथ नहीं लगाया। इसके बाद ग्रामीणों ने ही उन्हें दफनाया था। 
prayagraj blind faith Even villagers do not let villagers feed them, used to say that only the mother goddess will keep the animals alive.
डीहा गांव में अभयराज के घर के बाहर रोते बिलखते उसके रिश्तेदार - फोटो : अमर उजाला
मददगारों पर आक्रामक हो जाता था परिवार 
अभयराज के परिवार की मनोदशा देखकर यदि कोई ग्रामीण उनके मदद को तैयार होता था तो परिवार के सदस्य उस पर आक्रामक हो जाते थे। ऐसा कई बार हो चुका था। इसके कारण कोई भी कभी मदद के लिए नहीं जाता था। 

 
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prayagraj blind faith Even villagers do not let villagers feed them, used to say that only the mother goddess will keep the animals alive.
डीहा गांव में घर के अंदर लाश की सूचना पर जुटी ग्रामीणों की भीड़ - फोटो : अमर उजाला
ग्रामीणों का कहना है कि यह परिवार गांव के संभ्रात व पढ़े लिखे परिवारों में था। उसके पांच लड़कियां व तीन लड़के पढ़ने में काफी होशियार थे। पिता नैनी स्थित एक विवि में कार्यरत था और पारिवारिक वजहों से परेशान होकर उसने नौकरी छोड़ दी थी। 

 
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prayagraj blind faith Even villagers do not let villagers feed them, used to say that only the mother goddess will keep the animals alive.
डीहा गांव में घर के अंदर लाश की सूचना पर पहुंची पुलिस व जुटी ग्रामीणों की भीड़ - फोटो : अमर उजाला
गांव में ही उनके पास आठ बीघा खेत था। गांववाले बताते है कि कुछ साल पहले अभयराज का परिवार इस तरह नहीं था। लेकिन चौथी बेटी बीनू की शादी के बाद से ही उनके परिवार में अचानक बदलवा आ गया और धीरे-धीरे सब कुछ बदल गया। 

 
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