प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ में कई रंग देखने को मिल रहे हैं। कोई अध्यात्म में खोया है, तो कोई तपस्या में लीन है। कोई अपनी आराधना में मस्त है। इसी में बीच 29 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन होने वाले शाही स्नान के लिए 28 जनवरी से भीड़ का दबाव बढ़ने लगा। 28, 29 जनवरी की रात को संगम नोज पर भगदड़ में 30 लोगों ने आधिकारिक रूप से अपनी जानें गंवा दीं, जबकि कई दर्जन लोग घायल हो गए।
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Mahakumbh 2025: भगदड़ के दर्द से कराहते लोग, अपनों को ढूंढती निगाहें...मौकापरस्तों को शर्म न आई; यूं ठगते रहे
Sun, 02 Feb 2025 12:40 PM IST
भूपेन्द्र सिंह
भूपेंद्र सिंह चौहान, अमर उजाला, प्रयागराज
भूपेंद्र सिंह चौहान, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: भूपेन्द्र सिंह
Updated Sun, 02 Feb 2025 12:40 PM IST
सार
Mahakumbh 2025: एक तरफ संगम में भगदड़ के दर्द से कराहते लोग और अपनों को ढूंढती उनकी निगाहें। दूसरी तरफ आपदा में अवसर ढूंढने वाले बेशर्म मौकापरस्त, परेशान और बेहाल लोगों से ठगी करते रहे और शर्म तक न आई। आगे पढ़ें और जानें पूरी बात...
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महाकुंभ में श्रद्धालुओं से बाइकर्स ने की जमकर उगाही
- फोटो : अमर उजाला
महाकुंभ में श्रद्धालुओं की भीड़
- फोटो : सुंदरम
ताजा हो गए कोरोना के दौरान लोगों से लूट के दृश्य
एक तरफ ऐसे दृश्य थे, जिनकी लोग सराहना कर रहे थे, उन्हें आशीष दे रहे थे। मन से दुआ दे रहे थे। इसी बीच 29 जनवरी को शाम से कुछ ऐसे तत्व सक्रिय हुए, जो आपदा में अवसर ढूंढ रहे थे। वह परेशान, हतप्रभ श्रद्धालुओं पर गिद्ध नजरें गड़ाए बैठे थे, कि कैसे उनकी मजबूरी का फायदा उठाया जाए और कैसे उन्हें लूटा जाए। वह भारत की आत्मा 'अतिथि देवो भव:' के संकल्प को भूल चुके थे। ठीक उसी प्रकार जैसे जब कोरोना महामारी आई तो कुछ पैसों के भेड़िए रेमिडीसिवर और अन्य जरूरी दवाइयों की कालाबाजारी करने में जुट गए थे। उसी प्रकार जब तीर्थराज कहे जाने वाले प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ में लोग परेशान हुए, हतप्रभ हुए, अपनों से बिछड़ गए, बेहाल थे, तो कुछ तत्व इन्हें लूटने के लिए सड़कों पर उतरे। इन दृश्यों को देखकर एक बार फिर कोरोना के दौरान के लोगों को लूटे जा रहे दृश्य ताजा हो गए।
महाकुंभ में उमड़ी भीड़।
- फोटो : अमर उजाला।
एक से लेकर दो हजार तक प्रति व्यक्ति वसूली
30 और 31 तारीख को अमर उजाला के कैमरे में कुछ ऐसे दृश्य कैद हुए, जिन्हें देखकर मानवता शर्मसार हो गई। ऐसा महसूस हुआ कि इन पैसों के भूखे भेड़ियों को वाकई संवेदनाएं मर चुकी हैं। यह सच्चाई हैरान करने वाली थी, लेकिन थी तो सच्चाई ही। भगदड़ के बाद परेशान लोग अपनों को ढूंढ रहे थे। पैदल चलकर थक चुके थे। थकावट की वजह से कई यात्री इस हाल में थे कि एक कदम भी चलना दूभर था। ऐसे में कुछ तत्व उन यात्रियों को बाइक पर उनके गंतव्य स्थान तक छोड़ने की बात कहते। फिर इनसे सौदा तय करते। एक हजार से लेकर दो हजार तक प्रति व्यक्ति उनसे वसूल कर रहे थे।
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महाकुंभ 2025
- फोटो : @MahaaKumbh
... ऐसे पता चलता वास्तव में इनके साथ ठगी हो गई
चूंकि अधिकतर जगहों पर बाइक जाने की अनुमति नहीं थी, इसके बाद भी यह असामाजिक तत्व लोगों को मौके तक पहुंचाने की बात कहकर पैसे की उगाही कर रहे थे। सौदा तय करने के बाद उन्हें 1-2 किमी तक ले जाकर छोड़ देते और कहते बस आगे ही संगम है, या आगे ही स्टेशन है, या अस्पताल है। यानी जिसको जहां जाना होता था, उनकी मंजिल बताकर रफू चक्कर हो जाते। जब वह परेशान लोग वहां मौजूद लोगों से बात करके अपना पता पूछते, तब उन्हें पता चलता कि वह तो अपनी मंजिल से काफी दूर हैं। वास्तव में इनके साथ ठगी की गई है।
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चौराहों पर पुलिसकर्मियों ने सवारी ढो रहे बाइकर्स को पकड़ा
- फोटो : अमर उजाला