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कुंभ 2019: अखाड़ों की भीतर बसी है अलग दुनिया, अनोखी है साधुओं को दी जाने वाली सजाएं

Tue, 22 Jan 2019 09:25 PM IST
kapil kumar हिमांशु पांडेय, अमर उजाला, प्रयागराज
हिमांशु पांडेय, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: kapil kumar Updated Tue, 22 Jan 2019 09:25 PM IST
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Kumbh mela 2019 unseen world within akharas unique punishment given to sadhu
Kotwal

हर अखाड़ों के भीतर अपनी अलग दुनिया है। उनकी परंपराएं एवं नियम-कायदे भी अलहदा हैं। इनका कोई उल्लंघन न कर सके इसलिए इसकी निगरानी के लिए बाकायदा एक कोतवाली बनाई जाती है, जिसकी कमान कोतवाल संभालते हैं। कुंभ में इन कोतवालों के ही जिम्मे अखाड़ों की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था है। अखाड़े के भीतर आने-जाने वाले हर व्यक्ति पर इन कोतवालों की बारीक निगाह होती है।

Kumbh mela 2019 unseen world within akharas unique punishment given to sadhu
Kotwal

दशनामी संन्यासी अखाड़ों का परिवार हजारों-हजार साधु-संन्यासियों में फैला होता है। इनमें अनुशासन बनाए रखने को अखाड़ों की अपनी कोतवाली है। इसके मुखिया को कोतवाल के नाम से पुकारते हैं, जिसके हाथ सदैव चांदी से मढ़ा एक विशेष दंड होता है। कोतवाली अखाड़े के गुरु कुटिया के पास ही स्थापित होती है, जिसके इर्द-गिर्द ही कोतवाल मौजूद रहते हैं। वहीं से पूरी छावनी की निगरानी करते हैं। यह कोतवाल अखाड़े की प्रत्येक मढ़ियों एवं दावों के जानकार होते हैं लिहाजा, हजारों-हजार साधुओं में भी ये सिर्फ पहनावा देखकर असली-नकली साधु की पहचान कर सकते हैं।

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Kotwal

कोतवालों की जिम्मेदारी तब सबसे अधिक बढ़ जाती है जब अखाड़े छावनी से बाहर निकलते हैं। पेशवाई जुलूस और खास तौर से शाही स्नान के समय इन कोतवालों पर ही पूरे जुलूस को नियंत्रित करने की जिम्मेदारी रहती है। उग्र से उग्र नागा संन्यासी भी कोतवालों के सामने अनुशासनहीनता नहीं करते और पूरे जुलूस में यह कोतवाल ही नागाओं को नियंत्रित करते हैं। अखाड़े अपनी संख्या के लिहाज से कोतवाल तैनात करते हैं। जूना, महानिर्वाणी एवं निरंजनी अखाड़े सबसे बड़े अखाड़े हैं, इसलिए यहां एक समय में चार कोतवाल हमेशा तैनात रहते हैं।

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Naga Sadhu

जबकि, अन्य अखाड़ों में दो कोतवाल होते हैं। शाही स्नान के समय कई बार अतिरिक्त कोतवाल भी बना दिए जाते हैं। प्रत्येक अखाड़े की यह कोशिश रहती है कि प्रत्येक मढ़ी को इसमें प्रतिनिधित्व मिले, इसलिए प्रत्येक अखाड़े में इनके कार्यकाल अलग-अलग होते हैं। श्रीनिरंजनी अखाड़े में कोतवाल का कार्यकाल 11-21 दिन का होता है जबकि महानिर्वाणी अखाड़े में एक सप्ताह के लिए ही बनाए जाते हैं। जूना अखाड़े में इनका कार्यकाल सर्वाधिक होता है। श्रीनिरंजनी अखाड़े के सचिव नरेंद्र गिरि का कहना है कि अखाड़ों में कोतवाल की कई जिम्मेदारी होती है। सुरक्षा-व्यवस्था भी कोतवाल ही देखते हैं।

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Naga Sadhu

अनोखी है साधुओं को दी जाने वाली सजाएं
नियम कानून तोड़ने वाले साधुओं की सजाएं भी अनोखी होती हैं। छोटे-मोटे नियम तोड़ने वाले साधुओं को कोतवाल अपने स्तर पर ही सजा दे देते हैं। इनमें गंगा में 108 डुबकियां लगवाना, गुरु कुटिया अथवा रसोईघर में काम करना जैसी सजाएं आम तौर पर दी जाती हैं, लेकिन अगर किसी साधु की गंभीर शिकायत मिलती है जब उसकी सजा का निर्णय बकायदा पंचायती व्यवस्था के तहत होता है। इसके सजा का फैसला करने को बकायदा पंच बनाए जाते हैं।

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