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Ghamasaan Review: भटकी हुई कहानी में उलझी ‘घमासान’, बर्बाद किया अरशद वारसी का टैलैंट; कहां चूकी फिल्म?
सार
Ghamasaan Movie Review: अक्सर बीहड़ के डकैत और बुंदेलखंड-उत्तर प्रदेश की राजनीति पर फिल्में बनाने वाले निर्देशक तिग्मांशु धूलिया इस बार इन तीनों की पृष्ठभूमि लपेटकर ‘घमासान’ लाए हैं। जानिए कैसी है अरशद वारसी और प्रतीक गांधी अभिनीत यह फिल्म ?
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फिल्म 'घमासान'
- फोटो : अमर उजाला
Movie Review
'घमासान'
कलाकार
अरशद वारसी
,
प्रतीक गांधी
,
राजपाल यादव
और
इशिता दत्ता
लेखक
पीयूष सिंह
और
राम यश सिंह
निर्देशक
तिग्मांशु धूलिया
निर्माता
अश्विनी चौधरी
और
ज्योति देशपांडे
रिलीज डेट
11 सितंबर 2026
रेटिंग
2.5/5
विस्तार
'द बैंडिट क्वीन' के कास्टिंग डायरेक्टर और राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म 'पान सिंह तोमर' के निर्देशक तिग्मांशु धूलिया एक बार फिर डकैतों की कहानी लेकर आए हैं। फिल्म का नाम है 'घमासान'।
कास्टिंग भी तगड़ी है। एक तरफ अरशद वारसी हैं जो डकैत महाराज बने हैं। दूसरी तरफ ‘स्कैम 1992’ फेम अभिनेता प्रतीक गांधी हैं जो एसटीएफ के अफसर बने हैं।
पर क्या ये दो अभिनेता दर्शकों का ध्यान खींचने के लिए काफी हैं? ओटीटी पर रिलीज हुई यह फिल्म कैसी है और किस बारे में हैं? फटाफट जान लेते हैं।
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कास्टिंग भी तगड़ी है। एक तरफ अरशद वारसी हैं जो डकैत महाराज बने हैं। दूसरी तरफ ‘स्कैम 1992’ फेम अभिनेता प्रतीक गांधी हैं जो एसटीएफ के अफसर बने हैं।
पर क्या ये दो अभिनेता दर्शकों का ध्यान खींचने के लिए काफी हैं? ओटीटी पर रिलीज हुई यह फिल्म कैसी है और किस बारे में हैं? फटाफट जान लेते हैं।
फिल्म 'घमासान'
- फोटो : सोशल मीडिया
कहानी
फिल्म की कहानी उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के जंगलों में छिपकर रहने वाले डकैत महाराज (अरशद वारसी) की है। महाराज को पकड़ने के लिए सरकार आईपीएस आदित्य (प्रतीक गांधी) को स्पेशल टास्क फोर्स का हैड बनाकर चित्रकूट भेजती है।
थाेड़ी बहुत भागा-दौड़ी और गोली बारी के बाद महाराज का वफादार आदित्य की पत्नी (इशिता दत्ता) को अगवा कर लेता है। अब कैसे आदित्य अपनी पत्नी को बचा पाता है? क्या इस काम में कालिका (राजपाल यादव) उसकी मदद करता है? यह सब जानने के लिए आप फिल्म देख सकते हैं।
फिल्म की कहानी उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के जंगलों में छिपकर रहने वाले डकैत महाराज (अरशद वारसी) की है। महाराज को पकड़ने के लिए सरकार आईपीएस आदित्य (प्रतीक गांधी) को स्पेशल टास्क फोर्स का हैड बनाकर चित्रकूट भेजती है।
थाेड़ी बहुत भागा-दौड़ी और गोली बारी के बाद महाराज का वफादार आदित्य की पत्नी (इशिता दत्ता) को अगवा कर लेता है। अब कैसे आदित्य अपनी पत्नी को बचा पाता है? क्या इस काम में कालिका (राजपाल यादव) उसकी मदद करता है? यह सब जानने के लिए आप फिल्म देख सकते हैं।
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फिल्म 'घमासान'
- फोटो : सोशल मीडिया
अभिनय
अरशद वारसी को ट्रेलर और पोस्टर में देखकर बहुत उम्मीदें थीं। उनका विलेन वाला अंदाज देखने के लिए दर्शक उत्सुक भी थे पर निर्देशक ने कहीं भी अरशद को उस रूप में हावी ही नहीं होने दिया। ना तो उनके किरदार का कोई बैकग्राउंड दिखाया गया और ना ही महाराज बने अरशद को खुद सामने से लड़ते दिखाया गया। पूरी फिल्म में महाराज खटिया पर पड़े रहते हैं और बस क्लाइमैक्स में बंदूक उठाते हैं।
प्रतीक गांधी को फिल्म में ज्यादा स्पेस मिला है। हमेशा की तरह उन्होंने अपना किरदार बखूबी निभाया है। हालांकि, एक्शन उनके एंड से भी कुछ ज्यादा नहीं है पर कई सीन में वो बिना बोले भी अच्छा अभिनय कर जाते हैं। राजपाल यादव को जितना रोल मिला उन्होंने अपना काम बढ़िया किया है। इशिता दत्त का अभिनय भी सधा हुआ है। बाकी कलाकारों में भी कोई ओवरएक्टिंग नहीं करता। कुल मिलाकर फिल्म में अभिनय पक्ष से कोई शिकायत नहीं।
अरशद वारसी को ट्रेलर और पोस्टर में देखकर बहुत उम्मीदें थीं। उनका विलेन वाला अंदाज देखने के लिए दर्शक उत्सुक भी थे पर निर्देशक ने कहीं भी अरशद को उस रूप में हावी ही नहीं होने दिया। ना तो उनके किरदार का कोई बैकग्राउंड दिखाया गया और ना ही महाराज बने अरशद को खुद सामने से लड़ते दिखाया गया। पूरी फिल्म में महाराज खटिया पर पड़े रहते हैं और बस क्लाइमैक्स में बंदूक उठाते हैं।
प्रतीक गांधी को फिल्म में ज्यादा स्पेस मिला है। हमेशा की तरह उन्होंने अपना किरदार बखूबी निभाया है। हालांकि, एक्शन उनके एंड से भी कुछ ज्यादा नहीं है पर कई सीन में वो बिना बोले भी अच्छा अभिनय कर जाते हैं। राजपाल यादव को जितना रोल मिला उन्होंने अपना काम बढ़िया किया है। इशिता दत्त का अभिनय भी सधा हुआ है। बाकी कलाकारों में भी कोई ओवरएक्टिंग नहीं करता। कुल मिलाकर फिल्म में अभिनय पक्ष से कोई शिकायत नहीं।
फिल्म 'घमासान'
- फोटो : सोशल मीडिया
निर्देशन
शिकायत है निर्देशक और लेखक से। जो इस लगभग ढाई घंटे की फिल्म में एक सीन को छोड़कर कहीं भी डर का माहौल पैदा नहीं कर पाए।
फिल्म की कहानी डकैत शिव कुमार पटेल उर्फ ददुआ की कहानी बयां करती है जिसे 80 के दशक में बुंदेलखंड का वीरप्पन कहा जाता था। जिस डकैत ने मात्र 16 साल की उम्र में पहला कत्ल किया हो उससे सभी खौफ खाएंगे ये लाजिमी है पर दर्शक तो यह सब स्क्रीन पर देखने के बाद ही विलेन से डरेंगे?
आज जहां लोग ‘एनिमल’ और ‘टॉक्सिक’ जैसी फिल्मों में हीरो को इतना वॉयलेंट देख चुके हैं तो समझिए विलेन से कितनी उम्मीद होगी? यहां विलेन खुद कुछ नहीं करता। उसके सारे काम उसके वफादार करते हैं। निर्देशक ने यहां काहनी अच्छी उठाई पर उसे ठीक से डेवलप नहीं कर पाए। यह ना तो पूरी तरह से एक डकैत की कहानी बन पाई और ना ही एक क्राइम ड्रामा । इससे तो बेहतर तिग्मांशु इस मामले पर एक डॉक्यूमेंट्री शूट कर लेते।
शिकायत है निर्देशक और लेखक से। जो इस लगभग ढाई घंटे की फिल्म में एक सीन को छोड़कर कहीं भी डर का माहौल पैदा नहीं कर पाए।
फिल्म की कहानी डकैत शिव कुमार पटेल उर्फ ददुआ की कहानी बयां करती है जिसे 80 के दशक में बुंदेलखंड का वीरप्पन कहा जाता था। जिस डकैत ने मात्र 16 साल की उम्र में पहला कत्ल किया हो उससे सभी खौफ खाएंगे ये लाजिमी है पर दर्शक तो यह सब स्क्रीन पर देखने के बाद ही विलेन से डरेंगे?
आज जहां लोग ‘एनिमल’ और ‘टॉक्सिक’ जैसी फिल्मों में हीरो को इतना वॉयलेंट देख चुके हैं तो समझिए विलेन से कितनी उम्मीद होगी? यहां विलेन खुद कुछ नहीं करता। उसके सारे काम उसके वफादार करते हैं। निर्देशक ने यहां काहनी अच्छी उठाई पर उसे ठीक से डेवलप नहीं कर पाए। यह ना तो पूरी तरह से एक डकैत की कहानी बन पाई और ना ही एक क्राइम ड्रामा । इससे तो बेहतर तिग्मांशु इस मामले पर एक डॉक्यूमेंट्री शूट कर लेते।
फिल्म 'घमासान'
- फोटो : सोशल मीडिया
क्या अच्छा?
- अभिनय सभी कलाकारों का अच्छा है
- जंगल, गावं और चित्रकूट के रियल लोकेशन की शूटिंग माहौल से जोड़ती है।
- बुंदेलखंड की पृष्ठभूमि पर बनी फिल्म में कलाकार उतनी मुश्किल बुंदेलखंडी नहीं बोलते कि किसी को डायलॉग समझ ना आए।
फिल्म 'घमासान'
- फोटो : सोशल मीडिया
क्या बुरा?
- अरशद वारसी के किरदार की और डिटेलिंग की जानी चाहिए थी। उनका खौफ बनते दिखना चाहिए था।
- फर्स्ट हाफ में फिल्म जरूरत से ज्यादा धीमी है और दूसरे हाफ में तेज।
- राजनैतिक एंगल को अचानक दिखाना और बार-बार बीच में लाने से फिल्म की गति बिगड़ती है।
फिल्म 'घमासान'
- फोटो : सोशल मीडिया
देखें या नहीं?
गैंगस्टर ड्रामा और डकैताें पर बनी फिल्में देखना पसंद करते हैं तो देख सकते हैं। बहुत सस्पेंस की उम्मीद न रखें। फिल्म एक बार देखी जा सकती है। नहीं भी देखेंगे तो कुछ मिस नहीं करेंगे।
गैंगस्टर ड्रामा और डकैताें पर बनी फिल्में देखना पसंद करते हैं तो देख सकते हैं। बहुत सस्पेंस की उम्मीद न रखें। फिल्म एक बार देखी जा सकती है। नहीं भी देखेंगे तो कुछ मिस नहीं करेंगे।