हिमालय की गुफा, कंदराओं से निकलकर कुंभ में संगम की रेती पर पहुंचे योगी नागा बाबाओं का हठ योग जारी है। सनातन धर्म की रक्षा, विश्व शांति, जनकल्याण के लिए इन तपस्वी बाबाओं के हठ योग में कोई वर्षों से हाथ उठाए हैं, तो कोई कई साल से खड़े ही हैं। उनकी कठिन तपस्या श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बनी है।
किसी वट वृक्ष की जटाओं की तरह इन बाबाओं के केश (बाल) उनके बड़े-बड़े नाखून, बड़ी बड़ी दाढ़ी और मुंह से अलख निरंजन का घोष किसी के लिए नतमस्तक होने को काफी है। अखाड़ों में देश ही नहीं विदेशी भक्तों का दिनभर जमावड़ा लगा रहता है। हठ योगी अलग हैं, लेकिन उनमें समानता एक है कि सभी आशीर्वाद देने में कोताही नहीं करते। सेल्फी लेने वालों को भी हठ योगी मायूस नहीं होने देते। जूना अखाड़े के नागा संत राधे पुरी जी महाराज 2011 से हठ योग पर हैं। उनका दाहिना हाथ ऊपर रहता है। स्थान पूछने पर नाराज होते हुए बोले, सपंूर्ण विश्व कल्याण का संकल्प है। आश्रम उज्जैन के आगर मालवा आमला गांव में है। फिर साधना में ठिकाना या ठहराव कहां।
जूना के ही नागा बाबा खड़े श्री संदीप पुरी जी महाराज वर्षों से खड़े ही हैंं। पैरों में सूजन न आए, इसलिए नमक नाममात्र का लेते हैं। एक समय फलाहार पर उनकी तपस्या जारी है। ऋषिेकेश आश्रम में रहने वाले पुरी महाराज जनकल्याण के साथ हरियाणा के हिसार बड़ाला में पेयजल भी उपलब्ध कराना चाहते हैं।
नागा बाबा थानापति सोमवार गिरि महाराज कुंभ में बरेली से आए हैं। तीस वर्षों से केश और नाखून बढ़ाकर धूना के सामने अलख निरंजन, अलख निरंजन, दुख भंजन बोल आशीर्वाद दे रहे हैं। उनका मोर पंखी के साथ भक्तों का आशीर्वाद देना और फोटो खिंचाना हर किसी को भा रहा है।
आनंद अखाड़ा के नागा बाबा दिगंबर दिवाकर भारती तीन वर्ष से अर्ध बाहु यानि एक हाथ हवा में उठाए तपस्या कर रहे हैं। ईश्वर से साक्षात्कार और जनकल्याण के लिए उनका हठ योग पिछले पांच साल से फलाहार के बूते हैं। उनका हाथ अब जाने-अनजाने में भी नीचे नहीं आता। रात में साधना के समय एक गम्छे से हाथ ऊपर और धूना के सामने संतों की जमात सत्संग करती है।