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कुंभ 2019: संगम की रेती पर लगा बाबाओं का मेला, कोई ऊंट पर है सवार तो किसी का आसन है हवन कुंड

Fri, 01 Feb 2019 11:34 PM IST
kapil kumar अनूप ओझा, प्रयागराज
अनूप ओझा, प्रयागराज Published by: kapil kumar Updated Fri, 01 Feb 2019 11:34 PM IST
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kumbh mela 2019 funny baba visit to mauni amavasya shahi snan in prayagraj
baba
मौनी अमावस्या पर सबसे बड़े शाही स्नान से पहले कुंभ में नागाओं के अनूठे रूप विश्व समुदाय के लिए कहीं आकर्षण तो कहीं कौतूहल के केंद्र बन गए हैं। कारों के बोनट पर भी बाबाओं का दरबार लग रहा है, तो सड़कों पर ऊंट वाले बाबा भी लोगों को लुभा रहे हैं।


 
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अग्नि कुंड के ऊपर अस्त्र-शस्त्र से लैस झूले पर आसन लगाए बाबा की साधना भीड़ बटोर रही है। लोहे की कीलों के आसन पर बाबा का तप कुंभ मेला में संतों-भक्तों की जुबान पर छा गया है। हिमालय की कंदराओं से लेकर हरिद्वार, चित्रकूट, नर्मदा तट के जंगलों से निकलकर आए ये बाबा वसंत पंचमी के शाही स्नान तक कुंभ में रहेंगे। 

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जबलपुर मध्यप्रदेश के अवधूत विश्वेश्वरानंद गिरि मूरी खेड़माई चारखंभा मंदिर से 204 में निष्कासित किए जाने के बाद नर्मदा तट के जंगलों में साधना करने निकल गए थे।  कुंभ में पहुंचे नागा बाबा विश्वेश्वरानंद पंच अग्नि साधना कर रहे हैं। अग्नि कुंड के ऊपर उनका झूला लगा है। झूले पर लोहे की कीलों से आसन पर वह नियमित दिन के 12 से शाम पांच बजे तक रामनाम का जाप करते हैं।

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झूले की सजावट अस्त्र-शस्त्रों से की गई है। तलवार, फरसा, भाला, भुजाली उनके झूले में लगाई गई है। बाबा लोहे की कीलों के आसन पर बैठते हैं तो दो भक्त उनको बारी-बारी से झूला अग्नि कुंड पर झूला झुलाते रहते हैं। विश्वेश्वरानंद ने अमर उजाला को बताया कि विश्व कल्याण के लिए वह अपने शरीर तो तपा रहे हैं। फलाहार पर रहने वाले बाबा की इस कठिन साधना को देखने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लग रही है।  

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इसी तरह हिमालय से आए बाबा दिगंबर अवधूत ने सेक्टर-16 में मचान पर आसन लगाया है। लंबी जटा से शरीर को ढंकने वाले बाबा मोरपंखी से भक्तों को आशीर्वाद दे रहे हैं। उनका कहना है कि वह हिमालय की कंदरा में ही रहते हैं। कुंभ में आखिरी शाही स्नान के बाद वह चले जाएंगे। ऊंट वाले बाबा के अलावा कार की बोनट पर दर्शन देने वाले बाबा अपने वेश बाना से भीड़ बटोर रहे हैं। 

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