रसूलाबाद श्मशान घाट पर शनिवार की रात जलती चिता पर अघोर शिव का आवाहन किया गया। तंत्र साधकों ने पंचमकार क्रिया के बाद 24 हजार योगिनियों को जगाया और अघोर शिव का आवाहन किया। चिता की अग्नि बुझने नहीं दी गई थी। तंत्र साधकों की यह अनूठी साधना कुंभ मेला सकुशल संपन्न होने और यहां आने वाले भक्तों की समस्त मनोकामना पूर्ण होने के लिए की गई।
कुंभ 2019: जलती चिता पर अघोर शिव का आवाहन, पंचमकार क्रिया के बाद 24 हजार योगिनियों को जगाया
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
तंत्र साधकों की सबसे कठिन साधना में से एक अघोर शिव का आवाहन जूना अखाड़े के जगद्गुरु पंचानन गिरि की अगुवाई में किया गया। करीब 40 की संख्या में साधक शनिवार की रात रसूलाबाद श्मशान घाट पर पहुंचे। रात में 12 बजे अघोर शिव के आवाहन से पहले श्मशान भैरव और भूतनाथ क्षेत्रपाल का आवाहन किया गया। श्मशान की रक्षा करने वाली 24 हजार योगिनियों को रक्त और मदिरा चढ़ाई गई। इसके बाद विधिवित पूजा शुरू हुई। जगद्गुरु पंचानन गिरि ने बताया कि इस साधना में पंचमकार क्रिया अनिवार्य होती है। इसमें मदिरा, मांस, बलि समेत पांच क्रियाओं का प्रयोग होता है लेकिन वह इनमें से किसी क्रिया का प्रयोग नहीं करते।
वे पंचमकार के वैकल्पिक विधि का प्रयोग करते हैं। किसी बेजुबान जानवर की बलि की जगह वह स्वयं अपने शरीर का रक्त पूजा में प्रयोग करते हैं। मांस की जगह जटामासी का प्रयोग करते हैं। पंचमकार की परंपरागत पद्यति से इतर उनकी पूजा को मां काली स्वीकार करती हैं। वह अब तक हजारों पूजा करा चुके हैं। वह स्वयं का हाथ काटकर तकरीबन एक कटोरी रक्त निकालते हैं और पूजा में मौजूद सभी लोगों का रक्त तिलक कर बाकी रक्त जलती चिता को अर्पित कर देते हैं। मदिरा और रक्त सिर्फ योगिनियों को जागृत करने के लिए चढ़ाया जाता है। जगद्गुरु ने बताया कि पूजा कुंभ मेला सकुशल संपन्न कराने के लिए की गई है। वसंत पंचमी तक इसी तरह की तीन पूजा और की जाएंगी। इस पूजा से श्मशान भैरव और मां काली की कृपा मेले में बनी रहेगी।
लश्करे तैय्यबा और जैश ए मोहम्मद के आतंकियों के लिए विनाश मंत्र को किया जागृत कुंभ नगर। जलती चिता पर तंत्र साधना करने वाले जगद्गुरु पंचानन गिरि तथा अन्य साधकों ने शनिवार की रात लश्करे तैय्यबा, जैश ए मोहम्मद, बब्बर खालसा और आईएसआईएस आतंकियों के विनाश के लिए उनके मुख्य आतंकियों के नाम लेकर शत्रु विनाश मंत्र को जागृत किया। तंत्र साधक मानते हैं कि अगर किसी का नाम लेकर मंत्र पढ़ दिया जाय तो उसका अंत निश्चित होता है। इसी कारण इस मंत्र को बेहद गोपनीय रखा जाता है। चिता पूजा के समय कुछ कर्मकांडों के बाद ही यह जागृत होता है।
अघोर गुरुओं को नमन कर शुरू की पूजा
सनातन धर्म के इतिहास में रावण से बड़ा अघोर साधक किसी को नहीं माना जाता है। स्वयं अघोर शिव ने रावण को शक्ति दी थी। सबसे पहले महाज्ञानी रावण फिर बाबा कीनाराम और बाबा कामराज को याद किया गया। उसके बाद हवन यज्ञ शुरू किया गया। तंत्र साधना में चिता को ही हवन कुंड की तरह प्रयोग किया जाता है।