प्रयागराज कुंभपर्व में पहल करते हुए रविवार को जूना अखाड़े की ओर से साधुओं को नागा सन्यासी बनाने की प्रक्रिया आरंभ हो गई है। तमाम तरह की ऊहापोह से निकलकर आखिरकार रविवार को गंगा किनारे जुटे साधुओं ने खुद के लिए सत्रहवां पिंडदान किया और संन्यासी बन गए।
इस दौरान अखाड़े के कोतवाल, धर्मदंड लेकर उन्हेें नियंत्रित करते रहे।संकल्प के तहत अवधूतों को नागा बनाने की प्रक्रिया के तहत सबसे पहले मुंडन संस्कार कराया गया।
फिर गंगा स्नान, भस्म स्नान, गोमूूत्र, गाय के गोबर, पंचगव्य, पंचामृत स्नान, गंगा स्नान के बाद लंगोटी दी गई। यज्ञोपवीत के बाद उन्हें परंपरानुसार पलाश का दंड और कुल्हड़ का कमंडल दिया गया। काशी के पुरोहितों डॉ.रविशंकर तिवारी, आचार्य जितेंद्र मणि त्रिपाठी, आचार्य संतोष जी, आचार्य बचऊजी और उज्जैन के आचार्य संजय बधेका के आचार्यत्व में पिंडदान के बाद सभी ने गंगा में पिंडों को विसर्जित किया।
आधी रात के बाद विजयाहवन संस्कार किया गया। इससे पहले ओम नम:शिवाय का जाप भी भोर तक जारी रहा। जूना के राष्ट्रीय महामंत्री नारायण गिरि के मुताबिक मौनी अमावस्या स्नानपर्व (चार फरवरी) की भोर में अखाड़े की छावनी में जूना पीठाधीश्वर आचार्य महा मंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि के आचार्यत्व में संकल्प और संस्कार दीक्षा के बाद इन सभी संन्यासियों की लंगोटी खोलकर उन्हें बनाया जाएगा।
इसके बाद सभी मौनी अमावस्या के दूसरे शाही स्नानपर्व पर अखाड़े की शोभायात्रा के साथ शामिल होंगे। गंगा किनारे हुए अनुष्ठान में तक्षक पीठाधीश्वर रविशंकर सहित अनेक संत, संन्यासी मौजूद थे।