डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य का राजनीतिक सफर संघर्षों भरा रहा। साधारण परिवार में जन्में केशव प्रसाद मौर्य ने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़ने के बाद खुद ही अपनी राजनैतिक पहचान बनाई। विहिप नेता अशोक सिंघल के करीबी कहे जाने वाले केशव प्रसाद मौर्य वर्ष 2013 में प्रयागराज के केपी कॉलेज में आए ईसाई धर्म प्रचारक का विरोध करने को लेकर चर्चा में आए थे। इसके बाद केशव को भाजपा ने राजनीति में उतारा और आज उनकी दोबारा डिप्टी सीएम के पद पर ताजपोशी की गई।
केशव प्रसाद मौर्य : कभी अखबार और चाय बेचते थे, अब दूसरी बार बने डिप्टी सीएम, हिंदूवादी छवि ने दिलाई पहचान
सात मई 1969 को सिराथू में जन्में केशव प्रसाद मौर्य अपने शुरुआती दिनों में साइकिल से अखबार बांटा करते थे। उनके पिता स्व. श्यामलाल की सिराथू तहसील के पास छोटी सी चाय की दुकान हुआ करती थी।
पहली बार माफिया अतीक अहमद के खिलाफ लड़ा चुनाव
18 साल तक केशव प्रसाद संघ के प्रचारक रहे। विहिप नेता अशोक सिंघल का सानिध्य मिलने के बाद उन्होंने रामजन्म भूमि व गोरक्षा आंदोलन में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। कट्टर हिंदूवादी छवि के कारण भाजपा ने पहली बार वर्ष 2002 में प्रयागराज शहर पश्चिमी से माफिया अतीक के खिलाफ उन्हें चुनाव मैदान में उतारा। इस चुनाव में केशव प्रसाद हार गए। वर्ष 2007 में भाजपा ने फिर केशव को शहर पश्चिमी से प्रत्याशी बनाया, लेकिन इस बार भी उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
वर्ष 2012 में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने फिर से केशव को उनके गृह नगर सिराथू से प्रत्याशी बनाया और वह भारी मतों से जीतकर विधायक बने। वर्ष 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में केशव को भाजपा ने फूलपुर संसदीय सीट से प्रत्याशी बनाया। इसमें केशव करीब तीन लाख मतों से सपा प्रत्याशी धर्मराज सिंह पटेल से चुनाव जीते। वर्ष 2016 में केशव को भाजपा ने प्रदेश अध्यक्ष का दायित्व सौंपा।
2017 में पार्टी को दिलाई अभूतपूर्व जीत
केशव ने भाजपा के पक्ष में हवा बनाने के लिए पूरे प्रदेश में ताबड़तोड रैलियां कीं। जिसका नतीजा रहा कि 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रचंड बहुमत से जीती और प्रदेश में सरकार बनाई। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने केशव की मेहनत का फल देते हुए उन्हें डिप्टी सीएम का दायित्व सौंपा। इस बार विधानसभा चुनाव में केशव प्रसाद मौर्य को उन्हीं के गृहनगर सिराथू विधानसभा से प्रत्याशी बनाया, लेकिन वह सपा प्रत्याशी डॉ. पल्लवी पटेल से चुनाव हार गए।
केशव तो चुनाव हारे, लेकिन प्रदेश में भाजपा ने दोबारा पूर्ण बहुमत से सरकार बनाने की कामयाबी हासिल की। इसी का नतीजा रहा कि केशव भले ही चुनाव हारे, लेकिन प्रदेश में फिर से भाजपा की सत्ता बनाने में उनकी अहम भूमिका रही। पार्टी शीर्ष नेतृत्व ने चुनाव हारने के बाद भी केशव प्रसाद मौर्य को डिप्टी सीएम बनाया है। शुक्रवार को लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने डिप्टी सीएम पद की शपथ ली।
समर्थकों ने शीतला धाम में की पूजा
केशव प्रसाद मौर्य को डिप्टी सीएम बनाए जाने के लिए समर्थकों ने शीतला धाम कड़ा में पूजन का कार्यक्रम रखा था। दोपहर बाद जैसे ही केशव प्रसाद मौर्य को डिप्टी सीएम बनाने की घोषणा हुई तो समर्थकों ने देवी को प्रसाद का भोग लगाया। इस दौरान पुनीत मौर्य सहित तमाम लोग मौजूद रहे।
समर्थक बोले, जो काम रह गए थे अधूरे अब होंगे पूरे
केशव प्रसाद मौर्य को फिर से डिप्टी सीएम बनाए जाने के बाद यहां के लोगों के जेहन में विकास कार्यों की जो धुंधली तस्वीर बनी थी वह आइने की तरफ साफ हो गई। समर्थकों का मानना है कि डिप्टी सीएम रहते हुए केशव प्रसाद मौर्य ने सिराथू विधानसभा के अलावा जिले में विकास कार्यों को गति दी थी। विधानसभा में चुनाव हार जाने के बाद लोगों को लगा कि शायद यहां का विकास मंद हो जाएगा, लेकिन सारी अटकलों पर विराम तब लगा, जब केशव प्रसाद मौर्य को फिर से डिप्टी सीएम का ताज पहनाया गया।