कोरोना वायरस से निपटने के लिए भले ही अभी कोई वैक्सीन और दवा न बनी हो लेकिन, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले जड़ी बुटियों के साथ मसाला एवं ड्राई फ्रूट का नियमित इस्तेमाल करने वालों की संख्या गर्मी के इस सीजन में काफी बढ़ गई है। इसका असर इनकी कीमतों पर भी पड़ा है। तमाम जड़ी बूटियों के दाम में जबर्दस्त इजाफा हुआ है। मसालों के साथ ड्राई फ्रूट का भी बाजार में रेट बढ़ा है।
मसालों एवं ड्राई फूट की मांग बढ़ने और आवक कम होने के कारण इसके दाम में तेजी देखी गई है। थोक में ड्राई फ्रूट का दाम भले ही स्थिर हो लेकिन फुटकर में इसके दाम में 10 से 20 फीसदी की वृद्धि हो गई है। लॉकडाउन के पूर्व बादाम 700 रुपये किलो बिक रहा था अब उसकी कीमत 750 से 800 रुपये किलो तक हो गई है। जबकि थोक में इसका रेट 550 से 600 रुपये किलो ही है। इसी तरह 700 रुपये किलो बिकने वाले मखाना का रेट भी 750 से 800 रुपये किलो हो गया है।
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- फोटो : dry fruits
वहीं, जड़ी बूटियों की बात करें तो रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले क्वाथ, काढ़ा को तैयार करने वाली गिलोय, अश्वगंधा, मुलेठी, तुलसी और अन्य जड़ी बूटियों की मांग इन दिनों सर्वाधिक है। दालचीनी, अजवाइन, चिरायता, सोंठ, काली मिर्च, बड़ी इलायची के दाम में भी दस से बीस फीसदी की वृद्धि हुई है। ड्राई फूूूट के थोक विक्रेता गिरधारी अग्रवाल ने बताया कि लॉक डाउन के चलते ड्राई फ्रू्ट्स और मसालों की पर्याप्त आवक नहीं हुई।
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थोक में तो दाम स्थिर है लेकिन ऐसा सुनने में आया है कि फुटकर बाजार में व्यापारियों ने इसके दाम बढ़ा दिए हैं। आजाद नगर के कारोबारी दीपक केसरवानी ने बताया कि आमतौर पर अप्रैल-मई में नया माल आ जाने से ड्राई फूट के रेट में गिरावट होती थी, लेकिन इस बार स्थिति ऐसी नहीं है।
मसाला आदि की बिक्री काफी बढ़ी है, जबकि माल कम मिल रहा है। इस वजह से भी कुछ मसालों के दाम बढ़े हैं। लोकनाथ के अशोक कुमार ने बताया कि गिलोय, दालचीनी, चिरायता आदि जड़ी बूटी की बिक्री बीते दो माह के दौरान बढ़ी है। मांग बढ़ने के साथ ही दाम में भी इजाफा हुआ है।