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विदेशी मूल के संतों को खींच रहा कुंभ का आकर्षण, मेले में क्रोएशिया-ऑस्ट्रिया के बाबा

Thu, 03 Jan 2019 12:16 AM IST
देव कश्यप अनूप ओझा, अमर उजाला, प्रयागराज
अनूप ओझा, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: देव कश्यप Updated Thu, 03 Jan 2019 12:16 AM IST
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Foreigner saints attend Peshwai of akhara attraction in kumbh Mela
foreigner Saints

15 जनवरी से प्रयागराज में शुरू होने जा रहे कुंभ मेले से पहले विश्व भर के साधु-संतों का जमावड़ा शुरू हो गया है। विदेशी संतों के साथ यहां तमाम देशों के श्रद्धालुओं का आना भी जारी है। विदेश से आए संतो ने अपने शिष्यों के साथ अपने अखाड़ों की पेशवाई में हिस्सा भी लिया है।

Foreigner saints attend Peshwai of akhara attraction in kumbh Mela
foreigner Saints

महानिर्वाणी अखाड़े की पेशवाई में मंगलवार को कई देशों के विदेशी संतों के साथ साध्वियां भी पहुंचीं। अखाड़े के शिविरों में विदेशी बाबाओं के निराले अंदाज देखते बने। कुंभ तक विदेशी संत अखाड़े की परंपरा के अनुसार शिविरों में ध्यान, पूजा, जप और योग करते नजर आएंगे।

Foreigner saints attend Peshwai of akhara attraction in kumbh Mela
foreigner Saints

आस्ट्रिया से विदेशी शिष्याओं के साथ कुंभ में प्रवास केलिए पहुंची साध्वी उमा पुरी महानिर्वाणी अखाड़े की पेशवाई में रथ पर सवार होकर निकलीं तो उनकी झलक पाने के लिए लोग आतुर हो उठे। अमर उजाला से बातचीत में साध्वी उमा का कहना था कि प्रयागराज के कुंभ की आध्यात्मिक ताकत उन्हें यहां तक खींच लाई। सुना है कि यह भूमि सृष्टि की रचना से जुड़ी है।

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Foreigner saints attend Peshwai of akhara attraction in kumbh Mela
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यहां अक्षयवट के रूप में विराजमान ज्ञान की जड़ों का वह दर्शन करेंगी। इसी तरह सनातन धर्म को अपना चुकीं आस्ट्रिया से आईं देवी लक्ष्मी ने भी कुंभ की दिव्यता का बखान किया। कहा कि ऐसा संत समागम उन्होंने कभी नहीं देखा था। उनके लिए यह अविस्मरणीय अवसर है। उन्होंने बताया कि वह अपने गुरु परमहंस स्वामी महेश्वरानंद के संदेशों का प्रचार कर रही हैं। सनातनी धर्म-संस्कृति से प्रभावित लक्ष्मी कुंभ तक यहीं रहेंगी।

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Peshwai Mahanirvani

इसी तरह स्लोवाकिया की देवी डासी भी शिविर में ध्यान लगाकर मनका फेरती रहीं। कुंभ में संतों के जमावड़े का हिस्सा बने आस्ट्रिया के स्वामी प्रेमानंद पुरी का कहना था कि कुंभ की परंपरा और भारत की सनानती संस्कृति पूरी दुनिया के लिए अनुकरणीय है। वह इस कुंभ में शाही स्नान में भी हिस्सा लेंगे। इसके अलावा अखाड़े की परंपरा के अनुसार धूनी रमेगी। संध्या-पूजा, ध्यान-योग होगा। क्रोएशिया के बाबा ज्ञानेश्वर पुरी महाराज ने भी डेरा जमा लिया है। वह संगम की रेती पर बने फूस के शिविर में संतों के बीच कुंभ तक त्रिवेणी में पुण्य की डुबकी लगाएंगे। उनका कहना है कि यहां कुछ सीखने और अपनाने के लिए आए हैं। यहां के अनुभवों को अपने वतन के लोगों के बीच साझा करेंगे।

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