तीनों कृषि कानून वापस लिए जाने की घोषणा से किसानों में जश्न का माहौल है। अलग-अलग गुट से जुड़े किसानों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर बधाई दी। हालांकि, शीर्ष नेतृत्व की ओर से लिए गए निर्णय के तहत आंदोलन जारी रखने की बात भी कही।
किसान नेता बोले : तीन कृषि कानून वापस लेने पर किसानों में खुशी, लेकिन एमएसपी समेत अन्य मुद्दों पर जारी रहेगा आंदोलन
अखिलेश की लोकप्रियता से घबराई भाजपा ने वापस लिया कानून
कृषि कानून वापस लिए जाने की घोषणा को सपा नेताओं ने संघर्षों की जीत बताया। जिलाध्यक्ष योगेश चंद्र यादव का कहना है कि किसानों और पार्टी कार्यकर्ताओं के आंदोलन के आगे सरकार झुकने के लिए मजबूर हुई। उनका कहना है कि राष्ट्रीय अखिलेश यादव की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। इससे घबराई सरकार ने कानून वापस ले लिया लेकिन 2022 में भाजपा की विदाई तय है।
महानगर अध्यक्ष सै.इफ्तेखार हुसैन ने कहा कि विधानसभा चुनाव में हार की डर से भाजपा ने कानून वापस लेने की घोषणा की है लेकिन किसानों की नाराजगी दूर नहीं हुई है। उन्होंने न्यून्तम समर्थन मूल्य को संसद से पास कराने की मांग की। सपा के पूर्व प्रदेश सचिव नरेंद्र सिंह ने इसे समाजवादी विजय रथ यात्रा की पहली विजय बताया। समाजवादी युवजन सभा की ओर से एलनगंज चौराहे पर आंदोलन के दौरान मृत किसानों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। राष्ट्रीय सचिव अरविंद सरोज ने कहा कि सपा किसानों के हित में हमेशा संघर्ष करती रहेगी।
अखिल भारतीय किसान सभा तथा सीटू ने भी प्रधानमंत्री की इस घोषणा पर खुशी जाहिर की लेकिन संसद में इसे वापस लिए जाने तक आंदोलन जारी रखने की घोषणा की। शुक्रवार को आयोजित सभा में उन्होंने न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी की भी मांग की। सभा में हरिश्चंद्र द्विवेदी, अखिल विकल्प, विकास स्वरूप, अविनाश कुमार मिश्रा, रविशंकर मिश्रा आदि मौजूद रहे। तीनों कानून वापस लिए जाने की घोषणा के बाद आइसा, इंकलाबी नौजवान सभा की ओर से स्वराज भवन से इलाहाबाद विश्वविद्याल छात्रसंघ भवन तक मार्च निकाला गया।
इस दौरान हुई सभा में छात्रों एवं युवाओं ने एमएसपी के मुद़दे पर आंदोलन जारी रखने की घोषणा की। उनका कहना था कि इस तरह के हर कानून का विरोध होगा। उन्होंने सीएए, नई शिक्षा नीति, निजीकरण आदि का भी विरोध किया। मार्च में मनीष कुमार,अनिल वर्मा, सुनील मौर्य, विकास गोंड, अंशु, आफरीन, अविनाश कुमार, सुमित गौतम आदि शामिल रहे। आल इंडिया वर्कर्स कौंसिल ने भी प्रधानमंत्री की घोषणा का स्वागत किया। महासचिव डॉ.राधेश्याम यादव ने इसे किसानों के संघर्षों की जीत बताई।
कृषि कानूनों की वापसी, किसानों की जीत
रोजगार की मांग को लेकर युवा मंच प्रदर्शन 80 वें दिन शुक्रवार को भी सिविल लाइंस में धरना स्थल पर जारी रहा। युवा मंच संयोजक ने कहा कि भारी जन दबाव में काले कृषि कानूनों की वापसी किसानों की जीत है। किसानों को मिली ऐतिहासिक जीत से उत्साहित युवाओं ने रोजगार आंदोलन को भी अंजाम तक पहुंचाने का संकल्प लिया। युवा मंच ने प्रधानमंत्री को पत्र ट्वीट किया है। 30 नवंबर को प्रस्तावित आंदोलन को लेकर इविवि छात्र संघ भवन में रविवार सायं 5 बजे से मीटिंग बुलाई गई है। इस मौके पर युवा मंच संयोजक राजेश सचान, अध्यक्ष अनिल सिंह अविनाश आदि मौजूद रहे।
आइसा ने निकाला विजय जुलूस
किसान विरोधी तीनों कृषि कानून को वापस लिए जाने पर देशव्यापी आह्वान के तहत ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) व इंकलाबी नौजवान सभा (इनौस) ने संयुक्त रूप से स्वराज भवन के सामने से छात्रसंघ भवन इलाहाबाद विश्वविद्यालय तक विजय जुलूस निकाला। शहीद लाल पद्मधर प्रतिमा पहुंच कर यह सभा मे तब्दील हो गया । आइसा इविवि के इकाई सचिव मनीष कुमार ने कहा कि देश के इतिहास में दो प्रमुख आंदोलनों सीएए विरोधी और तीन कृषि कानून विरोधी आंदोलन ने बीजेपी-आरएसएस की मोदी सरकार से राष्ट्रवाद का तमगा छीन लिया है। विजय जुलूस व सभा में विकास गौड़ , अविनाश, सुमित गौतम, प्रदीप ओबामा,अश्वनी यादव , कृष्णा ,चंदन, अखिल आदि मौजूद रहे।