स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय के कोरोना वार्ड में बृहस्पतिवार की रात एक और युवक की मौत हो गई। वह यहां दिन में ओपीडी में दिखाने आया था। हालत खराब होने के कारण उसे वार्ड नंबर 10 में भर्ती किया गया था। जहां रात तीन बजे उसकी मौत हो गई। मरीज की मौत के बाद अस्पताल में हड़कंप मचा रहा। इसके पहले वार्ड नंबर नौ में भर्ती कोरोना संदिग्ध की मौत हुई थी। मौत के बाद युवक में कोरोना की पुष्टि के लिए स्वाब सैंपल भेजा गया लेकिन, रिपोर्ट निगेटिव आई। इसके बाद उसके पार्थिव शरीर को घर वालों को सौंप दिया गया। बताया जा रहा है कि युवक कैंसर का मरीज भी था।
एसआरएन के कोरोना वार्ड में भर्ती युवक की मौत, अस्पताल में मचा रहा हड़कंप
फतेहपुर जिले के खागा इलाके के माधो सिंह (38) कमला नेहरू मेमोरियल अस्पताल में दिखाने आया था। बताया जा रहा है कि उसे जुकाम, बुखार की शिकायत थी तो उसे एसआरएन भेज दिया गया। वह यहां एसआरएन की कोरोना ओपीडी में डॉक्टर को दिखाने आया था। उसकी हालत खराब हो गई तो उसका वार्ड नंबर 10 में भर्ती कर उपचार किया जाता रहा लेकिन रात तीन बजे उसकी मौत हो गई। युवक की मौत के बाद अस्पताल में हड़कंप मच गया। अस्पताल में दो दिनों में यह तीसरी मौत है। इसके पहले वार्ड नंबर नौ में नार्थ मलाका निवासी 23 वर्षीय युवक की मौत हो चुकी है। मौत की वजह दमा बताई जा रही है।
इधर माधो सिंह की मौत के बाद अस्पताल प्रशासन ने उसके स्वाब सैंपल लेकर जांच के लिए भेज दिए। रिपोर्ट निगेटिव आई है। नार्थ मलाका निवासी युवक की जांच रिपोर्ट भी निगेटिव आई। अस्पताल के एसआईसी डॉ. एके श्रीवास्तव ने बताया कि दोनों के शव को परिजनों को सौंप दिया गया। परिजन शव लेकर घर चले गए। उन्हें अभी कुछ दिनों तक बाहर न निकलने की सलाह दी गई है।
वार्ड ब्वॉय ने निकाला स्वाब सैंपल
एसआरएन चिकित्सालय में मौत हो चुकी दोनों युवकों की जांच कराने के मामले में अस्पताल प्रशासन की ओर से लापरवाही भी बरती गई। कहा जा रहा है कि रात में दोनों युवकों के नमूनों के लिए कोई तकनीशियन नहीं पहुंच सका तो वार्ड ब्वॉय से ही स्वाब सैंपल निकलवाकर माइक्रोबॉयोलॉजी लैब भेजा गया। जबकि, एसआरएन में इसके लिए चार लैब तकनीशियन रखे गए हैं। वे न तो नार्थ मलाका की युवक का स्वाब लेने गए और न ही फतेहपुर के युवक का।मौत के बाद ट्रीटमेंट मैनेजमेंट पर खड़े हुए सवाल
एसआरएन में दो दिनों में तीन मौतों के बाद ट्रीटमेंट मैनेजमेंट को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। जानकारों का कहना है कि कोरोना की आशंका पर भर्ती होने वाले मरीजों की ठीक से देखभाल नहीं हो पा रही है। इसी वजह से लोग दम तोड़ रहे हैं। अगर ट्रीटमेंट मैनेजमेंट सही हो तो मरीज की जान शायद बच सकती। मामले में अस्पताल के एसआईसी डॉ. एके श्रीवास्तव कहते हैं कि उन्होंने मरीजों की देखभाल के लिए एक कमेटी बनाई है।इसके सभी विभाग के फैकेल्टी सदस्यों को शामिल किया गया है। जिससे कि मरीज की जरूरत के हिसाब से ट्रीटमेंट मिल सके। लेकिन अस्पताल के सूत्र बताते हैं कि ये कमेटी मरीजों की मौत के बाद बनाई गई है। उधर, कोरोना के नोडल ऑफिसर डॉ. सुजीत कुमार ने कहा कि शहर के निजी अस्पतालों में गंभीर मरीज भर्ती नहीं हो पा रहे हैं। वे यहां आ रहा हैं। उन्हें भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। उसमें कोई लापरवाही नहीं की जा रही है।