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डाला छठ : संगम सहित सभी घाटों पर महिलाओं ने डूबते सूर्य को दिया अर्घ्य

Wed, 10 Nov 2021 10:45 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला ब्यूरो , प्रयागराज
अमर उजाला ब्यूरो , प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 10 Nov 2021 10:45 PM IST
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Dala Chhath: At all the ghats including Sangam, women offered Arghya to the setting sun
Prayagraj News : डाला छठ पर संगम तट पर अस्ताचल सूर्य को अर्घ्य देतीं व्रती महिलाएं। - फोटो : प्रयागराज

माघ मेले से पहले शहर एक और मेले के आनंद में डूबा। चार दिनी सूर्यषष्ठी व्रत के तीसरे दिन बुधवार को डाला छठ पर न सिर्फ संगम बल्कि सलोरी, अरैल, रामघाट, बलुआघाट, गऊघाट, द्रौपदी घाट, बरगदघाट और करेलाबाग के सुब्बनघाट पर भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। ज्यादातर रास्ते घाटों की ओर मुड़े। दोपहर के बाद से ही घाटों की ओर जाने और सूरज के डूबने के बाद लौटने से सड़कें श्रद्धालुओं से ही भरी रहीं। घर से लेकर घाटों तक छठी माई की महिमा के गीत गूंजते ही रहे। पूरे शहर में मेले जैसा माहौल रहा।

Dala Chhath: At all the ghats including Sangam, women offered Arghya to the setting sun
Prayagraj News : डाला छठ पर संगम तट पर पूजन करतीं व्रती महिलाएं। - फोटो : प्रयागराज

मंगलगीतों के बीच पति एवं बेटे की मंगलकामना के लिए बड़ी संख्या में घाटों पर पहुंचीं महिलाओं ने अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया। घाट पर कमर या घुटने भर पानी में खड़ी होकर महिलाओं ने आंचल में सजा हुआ डाला लेकर अस्ताचलगामी यानी डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया और बेटे एवं पति की मंगलकामना के लिए आशीष मांगा। इससे पहले घाट किनारे ईखें जोड़ीं गईं और मिट्टी को लीपकर वेदी बनाई गई। संगम पर यमुना पट्टी से लेकर गंगा पट्टी तक व्रती महिलाओं की कई-कई कतारें लगीं। जिसे जहां जगह मिली, उसने वहीं पूजा की वेदी बनाई। मंगलगीतों के बीच कलश स्थापना के बाद धूप, दीप, नैवेद्य, फल चढ़ाकर सूर्यदेव पूजे गए। दीप जलाकर आरती उतारी गई।

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Prayagraj News : डाला छठ पर संगम तट पर पूजन करतीं व्रती महिलाएं। - फोटो : प्रयागराज

मुख्य मेला संगम के रेती पर लगा। दोपहर से लेकर शाम तक तो घाट की ओर जाने वाले रास्तों पर जाम जैसी स्थिति बनी रही। बलुआघाट में तो स्थिति यह थी कि चौराहे से घाट तक  पैदल पहुंचना भी मुश्किल रहा। अबकी बरगद घाट और सुब्बन घाट पर भी खूब भीड़ जुटी। भीड़ की आशंका से ही हर कोई घाट पर जल्दी से जल्दी पहुंचने के लिए बेताब रहा। अनेक व्रती महिलाएं तो दोपहर से ही पहुंचकर घाटों पर पूजा की तैयारियों में जुट गईं। उनके साथ पति तथा बेटे सहित परिवार के अन्य सदस्य भी पूजा को आए। परंपरा के अनुसार डाला तो पुरुष ही सिर पर उठाकर घाट तक लाए और पूजा के बाद वही डाला लेक र घर गए।

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Dala Chhath: At all the ghats including Sangam, women offered Arghya to the setting sun
Prayagraj News : डाला छठ पर संगम तट पर पूजन करतीं व्रती महिलाएं। - फोटो : प्रयागराज

अधिकतर व्रती महिलाओं ने पूजा के लिए नए कपड़े पहने लेकिन कई महिलाओं ने शादी वाला जोड़ा भी निकाला। ओढ़नी, चुन्नी के साथ पूरा साज-सिंगार भी शादी वाले जैसा ही रहा। वहीं घर पर कई तरह के पकवान बनाए गए, जिसकी तैयारियां सुबह से ही जारी रहीं। वैसे उत्साह ऐसा रहा कि व्रत के बावजूद व्रतियों के चेहरे पर आस्था की दमक बनी ही रही, परिवार के साथ भी उत्साह के साथ उनका हौसला बढ़ाते रहे। खास यह भी कि वे महिलाएं भी पूजा में उनके संग शामिल हुईं, जिन्होंने स्वयं तो व्रत नहीं रखा था लेकिन उनकी मनौती दूसरी व्रती महिला पूरी कर रही थी।

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Prayagraj News : संगम तट पर पूजन करतीं व्रती महिलाएं। - फोटो : प्रयागराज
जलता हुआ ही दीपक लेकर लौटे घर
सजे सूप के अगले हिस्से में मिट्टी का जलता हुआ दीपक रखा गया जो पूजा के बाद भी जलता हुई ही घर तक लाया गया। डाला में गाजर, नीबू, नारियल, पत्ते वाली हल्दी, फल, गागल, अदरक, शरीफा, मुसम्मी, कन्ना, गन्ना, मूली आदि के अतिरिक्त मिठाई और सुहाग की चीजें भी रखी गईं। किसी ने बांस तो किसी ने तांबे का सूप या डाला ले रखा था।
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