कोरोना वायरस भले ही दुनिया भर में खौफ का सबब बना हुआ हो, लेकिन कोटवा बनीं के लेवल-1 अस्पताल में भर्ती नौ मरीजों का पूरी तरह से स्वस्थ हो जाना, इसका प्रमाण है कि इस घातक बीमारी से लड़ना मुश्किल नहीं है। यहां के चिकित्सक कहते हैं कि गाइडलाइन के मुताबिक दवाएं, बेहतर आहार और क्वारंटीन के जरिए इस बीमारी पर आसानी से काबू पाया जा सकता है। शरीर की प्रतिरोधक क्षमता भी अहम फैक्टर है, लेकिन इससे कहीं ज्यादा जरूरी है मरीज का धीरज के साथ डॉक्टरों से सहयोग करना।
कुछ दवाएं, बेहतर आहार और क्वारंटीन से ठीक हुए कोरोना संदिग्ध मरीज
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अस्पताल के नोडल अफसर डॉ. विवेक कुमार मिश्रा के मुताबिक यहां भर्ती मरीजों को दो श्रेणियों में बांट दिया गया था। एक जो थोड़ा गंभीर हुए और दूसरे वे जिनमें लक्षण भी कम नजर आए। अस्पताल में भर्ती नौ मरीजों में से दो मरीज ऐसे थे, जिन्हें भर्ती होने के बाद दो-तीन दिनों तक थोड़ा परेशानी अधिक रही। उन्हें खासी के साथ, सांस लेने में भी तकलीफ हुई और बुखार भी तेज होता गया। ऐसे में दो-तीन दिनों तक उनका ध्यान अधिक रखना पड़ा।
बाकी मरीजों में कुछ ऐसे थे, जिन्हें बुखार आया तो उन्हें पैरासिटामाल दी गई। उससे उन्हें राहत मिल गई। दो-तीन दिन बाद तो उनमें तो कोरोना के लक्षण भी नजर नहीं आए। डॉ. विवेक ने बताया कि सभी नौ मरीजों को आईसीएमआर की गाइडलाइन के मुताबिक एंटीएलर्जिक दवा एजिथ्रोमाइसिन, एंटीबायोटिक सिटिजिन हफ्ते भर सेवन की सलाह दी गई। कोरोना पॉजिटिव का उपचार करने वाले फिजिशियन डॉ. रमेश चंद्र यादव ने बताया कि उनको ट्रेनिंग में भी यही जानकारी दी गई थी कि कुल मरीजों में 80 फीसदी को ज्यादा परेशानी नहीं होती है।
20 फीसदी मरीज ऐसे होते हैं, जो गंभीर अवस्था में पहुंच जाते हैं। डॉ. रमेश चंद्र यादव ने बताया कि कोटवां-बनी में भर्ती मरीज ज्यादातर युवक थे और उनके शरीर की प्रतिरोधक क्षमता भी अच्छी थी। लिहाजा बीमारी का असर ज्यादा नहीं हो सका। आईसोलेशन अवधि के दौरान उन्हें पौष्टिक आहार भी मिला और शारीरिक गतिविधियां भी कम हो गईं। लिहाजा, शारीरिक ऊर्जा भी संकुचित हुई, जो प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ानेे में सहायक हुई। कोविड-19 लेवल-1 अस्पताल में प्रयागराज का एक, कौशांबी के दो और प्रतापगढ़ के छह मरीजों को भर्ती किया गया था। सभी ठीक होकर चले गए।