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प्रयागराजः यज्ञ और अनुष्ठानों की पूर्णाहुति के साथ संत-कल्पवासी घरों के लिए रवाना

Mon, 10 Feb 2020 02:51 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 10 Feb 2020 02:51 AM IST
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Completion of Yajna rituals, Viva-saints
magh mela prayagraj - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
माघी पूर्णिमा पर रविवार को साधु-संतों और कल्पवासियों के शिविरों में मास पर्यंत चलने वाले यज्ञ-अनुष्ठानों की सविधि मंत्रोच्चार के साथ पूर्णाहुति हो गई। अखंड पाठ, जप, तप और ध्यान के अनुष्ठानों के संकल्प पूरे होने पर शिविरों में दिन भर भंडारे चले। संगम पर दान-पुण्य होता रहा। 
Completion of Yajna rituals, Viva-saints
magh mela prayagraj - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
 इसी के साथ महीने भर केे स्नान-ध्यान के क्रम में आखिरी डुबकी केसाथ लाखों संत, गृहस्थ और कल्पवासी अपने शिविरों से विदा हो गए।
Completion of Yajna rituals, Viva-saints
magh mela prayagraj - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
संगम की रेती पर करीब 2500 बीघा क्षेत्रफल में छह सेक्टर में बसे माघ मेले के दो हजार से अधिक छोटे-बड़े शिविरों में सुबह ही अनुष्ठानों की पूर्णाहुतियां आरंभ हो गईं। त्रिवेणी मार्ग स्थित ज्योर्तिमठ हिमालय के शिविर में जगदगुरु स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती का संतों-भक्तों ने आशीर्वाद लिया। 
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Completion of Yajna rituals, Viva-saints
magh mela prayagraj - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
संगम नोज स्थित गंगा सेना के शिविर में योग गुरु आनंद गिरि के सानिध्य में चल रहे मास पर्यंत महायज्ञ की वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूर्णाहुति हुई। इसी तरह द्वारका-शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिविर से भी संत और कल्पवासी विदा हुए। पुरी पीठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती का भी शिविर समेट लिया गया। इस शिविर में कल्पवास कर रहे गृहस्थ और संन्यासी आखिरी डुबकी के बाद विदा हुए। लवकुश मंदिर आश्रम अयोध्या के शिविर में भी पूर्णाहुति हुई। 
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magh mela prayagraj - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
संगम नोज स्थित गंगा सेना के शिविर में योग गुरु आनंद गिरि के सानिध्य में चल रहे मास पर्यंत महायज्ञ की वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूर्णाहुति हुई। इसी तरह द्वारका-शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिविर से भी संत और कल्पवासी विदा हुए। पुरी पीठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती का भी शिविर समेट लिया गया। इस शिविर में कल्पवास कर रहे गृहस्थ और संन्यासी आखिरी डुबकी के बाद विदा हुए। लवकुश मंदिर आश्रम अयोध्या के शिविर में भी पूर्णाहुति हुई। 
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