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अयोध्या फैसला: केशव प्रसाद ने दी थी बजरंगियों को ये सलाह, आत्मरक्षा के लिए मिली थी गदा
Sun, 10 Nov 2019 12:05 PM IST
शाहरुख खान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: शाहरुख खान
Updated Sun, 10 Nov 2019 12:05 PM IST
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केशव प्रसाद मौर्य
- फोटो : अमर उजाला
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अयोध्या आंदोलन में शुरुआत से ही प्रयागराज काफी अहम रहा। विश्व हिंदू परिषद के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे स्वर्गीय अशोक सिंहल ने राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े तमाम महत्वपूर्ण फैसले प्रयागराज से ही लिए थे। यहां वर्ष 1989 में हुए महाकुंभ के दौरान विश्व हिंदू परिषद की धर्म संसद अयोध्या आंदोलन का अहम पड़ाव साबित हुई। इसी धर्मसंसद में अयोध्या में प्रस्तावित श्रीराम मंदिर का प्रारूप स्वीकृत हुआ था।
केशव प्रसाद मौर्य
- फोटो : अमर उजाला
संगम की रेती में विहिप की यह धर्मसंसद 30 और 31 जनवरी 1989 में हुई थी। तब इस धर्मसंसद में सैकड़ों की संख्या में संतों के साथ देश-विदेश से आए विहिप कार्यकर्ताओं ने शिरकत की थी। इस धर्मसंसद में प्रस्तावना भाषण तत्कालीन महामंत्री अशोक सिंहल ने दिया था। इस दौरान कांची शंकराचार्य स्वामी जयेंद्र सरस्वती की मौजूदगी में श्री राम मंदिर का प्रारूप स्वीकृत किया गया। साथ ही यह भी तय हुआ कि आंदोलन को यूपी की सीमा से बाहर निकालकर देशव्यापी बनाया जाए। इस धर्मसंसद में वर्ष 1985 में कर्नाटक के उडुप्पी में हुई विहिप की धर्मसंसद का भी उल्लेख किया गया।
केशव प्रसाद मौर्य
- फोटो : अमर उजाला
विश्व हिंदू परिषद में रहने के दौरान सूबे के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के पास अयोध्या आंदोलन के दौरान अहम जिम्मेदारी थी। तब उनके पास विहिप में संगठन मंत्री का दायित्व था। आंदोलन के दौरान कार सेवकों तक भोजन-पानी पहुंचाने की जिम्मेदारी उनके पास ही थी। केशव के करीबी नेता बताते हैं कि जिस दिन अयोध्या में विवादित ढांचा गिरा, उस दिन केशव मौर्य विहिप के सभी वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ अयोध्या में ही थे।
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केशव प्रसाद मौर्य
- फोटो : अमर उजाला
इस दौरान अशोक सिंहल, तत्कालीन भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. मुरली मनोहर जोशी आदि नेताओं के साथ वह भी गिरफ्तार हुए थे। राम मंदिर आंदोलन से केशव शुरू से ही जुड़े रहे। अयोध्या आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के बाद वह अशोक सिंहल के बेहद करीब आ गए। अशोक सिंहल भी उन्हें काफी मानते थे। कीडगंज में विहिप कार्यालय में ही तब केशव मौर्य का ज्यादातर समय बीतता था।
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ayodhya case
अयोध्या आंदोलन के दौरान वर्ष 2002 में राम भक्त सम्मेलन के दौरान उन्हें प्रयागराज में नजर बंद कर लिया गया था। भाजपा के मीडिया प्रभारी पवन श्रीवास्तव बताते हैं कि उस दौरान उन्हें नजर बंद कर लेने से नाराज उनके समर्थकों ने चक्काजाम कर दिया था। केशव के ही करीबी एवं भाजपा नेता मनोज कुशवाहा ने बताया कि विहिप पदाधिकारी होने के दौरान ही केशव मौर्य की सलाह पर ही बजरंग दल के कार्यकर्ताओं के आत्म रक्षा के लिए गदा मिली। तब केशव मौर्य का तर्क था कि संघ के स्वयंसेवकों के पास आत्मरक्षा के लिए लाठी है। इसी तर्ज पर बजरंग दल के कार्यकर्ताओं के पास गदा होनी चाहिए।