विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के पूर्व अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंहल आज भले ही इस दुनिया में न रहे हो लेकिन, उनसे जुड़ीं तमाम यादें प्रयागराज से ही जुड़ी हुई हैं। अपने जीवन काल में अयोध्या आंदोलन समेत तमाम महत्वपूर्ण निर्णय उन्होंने प्रयागराज में ही लिए। सिंहल की वजह से ही राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान प्रयागराज एक बड़ा केंद्र बिंदु बनकर उभरा। 1992 में सिंहल अयोध्या न पहुंचे इसके लिए प्रयागराज से वहां जाने वाले रास्ते की बैरीकेटिंग कर दी गई थी लेकिन, सिंहल रुके नहीं। वह विहिप नेता राम नायक पांडेय के साथ मुख्य मार्ग की बजाय मोटर साइकिल से विभिन्न गांव के कच्चे-पक्के रास्ते से होते हुए अयोध्या पहुंच गए।
अशोक सिंहल पुलिस को चकमा देकर मोटर साइकिल से पहुंच गए थे अयोध्या
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विहिप की वर्ष 1964 में हुई स्थापना के बाद से ही संगम नगरी राम जन्मभूमि आंदोलन का केंद्र बना। कीडगंज स्थित बैैकुंठ नाथ के घर में ऊपरी तल के एक छोटे कमरे से इसकी शुरूआत हुई। बाद में उसी भवन का नीचे का भाग विहिप को मिला। तब विहिप ने 22, 23 एवं 24 जनवरी 1966 को पहला विश्व हिंदू सम्मेलन, 24 से 26 जनवरी 1979 को दूसरा हिंदू सम्मेलन एवं 11 से 13 फरवरी 2007 को प्रयागराज में ही यह सम्मेलन आयोजित करवाया। वर्ष 1995 में श्रीराम जन्मभूमि न्यास का निर्माण हुआ।
शास्त्रीय संगीत के अच्छे जानकार थे अशोक सिंहल
प्रयागराज। अयोध्या में राम मंदिर आंदोलन में अपनी सक्रिय भूमिका के चलते स्वर्गीय अशोक सिंहल का कट्टरवादी का चेहरा ही सामने आता है लेकिन, उनके बारे में एक बात लोग कम ही जानते हैं। ओजस्वी वक्ता और हिंदुत्व की पहचान अशोक सिंहल संगीत के भी महान साधक रहे। बुलंद आवाज के धनी सिंहल के गीत राष्ट्र भक्तों के भीतर ऊर्जा का संचार करते रहे। संगीत के प्रति उनके प्रेम का ही नतीजा था कि सिंहल के गीतों का एक कैसेट भी तैयार किया गया। वर्ष 2015 में जब उनका निधन हुआ तो विहिप के प्रांत कार्यालय केसर भवन में स्वर्गीय सिंहल की याद में उनके गाए गीत खूब बजे।
विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारी अमित पाठक बताते हैं कि उनके निर्देशन में अनेकों स्वयं सेवकों ने संगीत की साधना की है। शास्त्रीय संगीत के प्रति अशोक सिंहल की बचपन से ही रुचि रही। राष्ट्रीय स्वयं संघ के कई गीतों की लय सिंहल ने ही बनाई है। उनके गाए गीतों का कैसेट भी है, जिसे संघ और विश्व हिंदू परिषद के कार्यक्रमों में सुनाया जाता है। ‘शुद्ध सात्विक प्रेम अपने कार्य का आधार है’ गीत वह हमेशा गाते थे। ‘चरण कमल पर माता तेरे प्राणों का संगीत न्यौछावर’ गीत भी वह राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद के कार्यक्रमों में अक्सर गाया करते थे। उनकी आवाज आज भी स्वयं सेवकों के लिए प्रेरणादायी होती है।