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संदीप गुप्ता हत्याकांड: एक महीने में तैयार हुआ ये खौफनाक प्लान, फिर इस तरह वारदात को दिया गया अंजाम

Thu, 30 Dec 2021 10:17 AM IST
प्रशांत कुमार अमर उजाला ब्यूरो, अलीगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, अलीगढ़ Published by: प्रशांत कुमार Updated Thu, 30 Dec 2021 10:17 AM IST
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Sandeep Gupta murder case dreadful plan of murder was prepared in one month
Sandeep Gupta Murder case - फोटो : अमर उजाला

दोस्तों के गैर पेशेवर गैंग ने जिस तरह सुनियोजित साजिश रची है, यह किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं। घटना बेशक 27 दिसंबर की शाम हुई। मगर शूटर नवंबर में यानि एक माह पहले अलीगढ़ आए। उस समय भी वे अक्तूबर में फरह से लूटी गई इसी कार से आए थे। संकेत हैं कि शूटर उसी समय संदीप की सुपारी लेकर सौदा पक्का कर गए थे। दीपावली के बाद संदीप का बहुत ज्यादा अलीगढ़ आना-जाना नहीं हुआ, इसलिए प्लान नहीं बन पाया। तब तक अंकुश व दुष्यंत की जोड़ी को प्लान बनाने व अन्य दोस्तों को जोड़ने का मौका मिल गया। जब पूरी प्लानिंग हो गई तो शूटरों को इशारा कर बुलाया और वारदात को अंजाम दिलाया गया।




ऐसे हुई ट्रैक्टर शोरूम संचालक-ट्रांसपोर्टर पुत्रों की दोस्ती
पुलिस जांच के अनुसार इस घटना में मुख्य किरदार के रूप में संदीप का रिश्ते का दामाद ट्रांसपोर्टर पुत्र अंकुश व रामघाट रोड पर सोनालिका ट्रैक्टर शोरूम संचालक पुत्र दुष्यंत चौधरी है। निकलकर आया है कि तीन-चार माह पहले तालसपुर पर किराये पर जमीन लेकर कार वॉश के नाम से मोटर गैराज खोलने वाला दुष्यंत उससे पहले सोनीपत रहता था। वहीं पढ़ाई करने के बाद व्यापार करने लगा था। इधर, अंकुश की पढ़ाई भी सोनीपत में ही रहकर हुई। चूंकि दोनों अलीगढ़ से थे, इसलिए वहां दोनों की दोस्ती हो गई और दोस्ती भी इतनी गहरी कि अंकुश पत्नी से विवाद के बाद जब घर से अलग रहने के बहाने से निकला तो दुष्यंत के पास ही रहने लगा।
 

Sandeep Gupta murder case dreadful plan of murder was prepared in one month
Sandeep Gupta Murder case - फोटो : अमर उजाला

ऐसे तैयार किया इन दोस्तों ने शूटरों-सहयोगियों का गैंग
पुलिस जांच में निकल रहा है कि परिवार से अलग रहने के बाद शराब पीकर दुख दर्द बयां करते समय दोनों के बीच जब संदीप को लेकर प्लानिंग पर चर्चा हुई तो उन्होंने अपने सोनीपत कनेक्शन के जरिये संभवत: सोनीपत या पश्चिमी यूपी के बागपत-मुजफ्फरनगर जनपद के शूटरों से किसी जरिये संपर्क किया। इस प्लानिंग में दुष्यंत की मदद से पीएसी के पास के ही एक अन्य आपराधिक गतिविधियों में शामिल रहने वाले युवक, एटा चुंगी के एक युवक व एक अन्य यानि तीन लोगों को शामिल किया गया। प्लानिंग के तहत नवंबर में शूटर अलीगढ़ आए। यहां आकर उनके पास मौजूद मथुरा से लूटी गई नीली बलैनो पर दुष्यंत के मोटर गैराज में नंबर प्लेट बदली गई और फर्जी नंबर प्लेट लगाई गई। इस बात की गवाही मोटर गैराज के सीसीटीवी दे दे दी है। इस तरह तीन शूटर, दुष्यंत-अंकुश के अलावा तीन अन्य लोग इस प्लान में शामिल किए गए। पुलिस जांच में ये चेहरे तो अलग-अलग कारों से बाहर निकलने के कारण उजागर हो गए हैं। अनुमान है कि और भी लोग इस दौरान शामिल हो सकते हैं।

Sandeep Gupta murder case dreadful plan of murder was prepared in one month
Sandeep Gupta murder case - फोटो : अमर उजाला

संदीप के अलीगढ़ न आने-जाने के कारण हुई देरी
जांच में यह भी उजागर हुआ है कि दीपावली के बाद संदीप का अलीगढ़ आना-जाना बहुत कम हुआ। इसलिए इस गैंग को संदीप की कोई खबर नहीं मिल पाई थी। दुष्यंत-अंकुश के स्थानीय दोस्तों की टीम लगातार संदीप की अलीगढ़ लोकेशन पर नजर बनाए हुए थी। जैसे ही अब संदीप का आना जाना शुरू हुआ तो लोकेशन को मॉनीटर किया जाने लगा। जैसे ही लगा कि यह समय मुफीद है तो शूटरों को ओके कर बुलाया गया और वारदात को अंजाम दिलाया गया।

उस दिन होनी थी हत्या, चाहे एटा तक जाना पड़ता
जिस तरह से शाम से ही बदमाशों ने कई गाड़ियों से संदीप की रैकी शुरू की, उससे यह साफ लग रहा है कि उसी दिन हत्या होनी थी। चाहे बदमाशों को एटा तक पीछा करना पड़ता।

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Sandeep Gupta murder case dreadful plan of murder was prepared in one month
Sandeep Gupta Murder case - फोटो : अमर उजाला

गाइड करने व शहर से बाहर निकालने में लगीं अन्य कारें
पुलिस जांच व सीसीटीवी गवाही दे रहे हैं कि इस घटना में अंकुश की कार सिर्फ शूटरों को चेहरे की पहचान कराने और सही आदमी पर निशाना लग रहा है या नहीं, इसलिए शूटरों के आगे चल रही थी। इसके अलावा एक कार लगातार उस दिन महाजन के सामने मौजूद रही। ताकि यहां से आने जाने की गतिविधियों को बताया जा सके। एक अन्य कार शूटरों को शहर में अंदर लाने से लेकर बाहर निकालने तक के लिए प्रयोग की गई। शायद यही वजह है कि अंकुश तस्वीर महल से ही अपनी गाड़ी से शूटरों की गाड़ी के आगे आया और घटना के बाद वापस लौट गया।


 
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Sandeep Gupta Murder case - फोटो : अमर उजाला

बुढांसी बंबा के पास नंबर प्लेट बदलकर छोड़ी कार
गांधी आई तिराहा पर वारदात को अंजाम देने के बाद शूटरों की कार सीधे हरदुआगंज की ओर निकली। जब पुलिस ने नीले रंग की बलेनो संख्या एचआर 26 डीएस 3332 की घेराबंदी शुरू की तो हरदुआगंज से पहले रजवाहे के सहारे बुढांसी बंबा की पटरी के सहारे से यह गाड़ी अंदर मुड़ गई। मगर पुलिस ने वहां भी पीछा नहीं छोड़ा। वायरलेस पर सूचना प्रसारित कर बंबा के सहारे सामने से भी पुलिस लगाई गई। इस बीच रास्ते में कहीं तीनों शूटर उतर गए। उससे पहले इस पर हरियाणा के बजाय यूपी के बागपत यानि यूपी-17 नंबर की प्लेट लगा दी। कुछ देर तो इस नंबर की गाड़ी को देख पुलिस चौंक गई। उस नंबर के आधार पर गाड़ी स्वामी को फोन मिलाया तो पता चला कि उसकी गाड़ी तो अभी भी गाजियाबाद के मसूरी में खड़ी है। उसने वीडियो कॉल के जरिये तस्दीक की तो पुलिस को पुख्ता हो गया कि हो न हो यही शूटरों की गाड़ी है। अभी अभी नंबर बदला गया है। तब उसे कब्जे में लेकर आया गया। बाद में साफ हुआ कि यह कार फरह से लुटी है।


 
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