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Aligarh News: 12 साल बाद बंद भट्ठों पर फिर जलेगी आग
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बैठक में मौजूद ईंठ भट्ठा कारोबारी। संवाद
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करीब 12 साल से बंद पड़े ईंट भट्ठों के लिए दोबारा कारोबार शुरू करने का रास्ता खुल गया है। शासन ने ऐसे भट्ठों के संचालन को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत अलीगढ़ में 69 बंद भट्ठा संचालकों को फिर से आवेदन करने का मौका मिलेगा। इसके लिए वर्ष 2012 के समय के तीन निर्धारित दस्तावेजों में से किसी एक को प्रस्तुत करना होगा। हालांकि अनुमति मिलने के बाद भी भट्ठा संचालकों को एनजीटी के मानकों के अनुरूप जिगजैग चिमनी बनानी होगी।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी डॉ. विश्वनाथ शर्मा ने मंगलवार को भट्ठा यूनियन के पदाधिकारियों के साथ बैठक कर शासन के नए दिशा-निर्देशों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2012 से बंद कराए गए भट्ठों के संचालक दोबारा आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए उस समय के जिला पंचायत का अनुमति पत्र, सेल्स टैक्स का टिन नंबर अथवा मिट्टी खनन की अनुमति और उसकी रॉयल्टी की रसीदों में से कोई एक दस्तावेज प्रस्तुत करना होगा।
आवेदन के बाद विभागीय स्तर पर अनुमति देने पर विचार किया जाएगा। निर्धारित शर्तें पूरी करने और एनजीटी के निर्देशों के अनुसार जिगजैग तकनीक की चिमनी तैयार करने के बाद ही भट्ठे का संचालन शुरू हो सकेगा।
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सूची से होगा दस्तावेजों का मिलान
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने ईंट भट्ठा यूनियन और खनन विभाग से भी पुराने भट्ठों की सूची मांगी है। दोनों विभागों से मिली सूची का मिलान कर पात्र भट्ठा संचालकों को नए प्रावधान की जानकारी दी जाएगी।
जिले में 600 भट्ठे, 400 में हुआ काम
जिले में करीब 600 ईंट भट्ठे हैं। इनमें से इस साल जून तक करीब 400 भट्ठों में काम हुआ। 111 भट्ठों पर बंदी का आदेश लागू था, जबकि 80 भट्ठों को डिफाल्टर श्रेणी में रखा गया है।
30 से ज्यादा भट्ठे अब भी अवैध संचालन में : अध्यक्ष
ईंट भट्ठा यूनियन अलीगढ़ के अध्यक्ष जनकपाल सिंह ने आरोप लगाया कि जिले में कई भट्ठे बिना अनुमति के संचालित हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि ऐसे भट्ठों की संख्या 30 से अधिक हो सकती है। इस संबंध में कई बार प्रशासनिक अधिकारियों से शिकायत की गई, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी डॉ. विश्वनाथ शर्मा ने मंगलवार को भट्ठा यूनियन के पदाधिकारियों के साथ बैठक कर शासन के नए दिशा-निर्देशों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2012 से बंद कराए गए भट्ठों के संचालक दोबारा आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए उस समय के जिला पंचायत का अनुमति पत्र, सेल्स टैक्स का टिन नंबर अथवा मिट्टी खनन की अनुमति और उसकी रॉयल्टी की रसीदों में से कोई एक दस्तावेज प्रस्तुत करना होगा।
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आवेदन के बाद विभागीय स्तर पर अनुमति देने पर विचार किया जाएगा। निर्धारित शर्तें पूरी करने और एनजीटी के निर्देशों के अनुसार जिगजैग तकनीक की चिमनी तैयार करने के बाद ही भट्ठे का संचालन शुरू हो सकेगा।
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सूची से होगा दस्तावेजों का मिलान
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने ईंट भट्ठा यूनियन और खनन विभाग से भी पुराने भट्ठों की सूची मांगी है। दोनों विभागों से मिली सूची का मिलान कर पात्र भट्ठा संचालकों को नए प्रावधान की जानकारी दी जाएगी।
जिले में 600 भट्ठे, 400 में हुआ काम
जिले में करीब 600 ईंट भट्ठे हैं। इनमें से इस साल जून तक करीब 400 भट्ठों में काम हुआ। 111 भट्ठों पर बंदी का आदेश लागू था, जबकि 80 भट्ठों को डिफाल्टर श्रेणी में रखा गया है।
30 से ज्यादा भट्ठे अब भी अवैध संचालन में : अध्यक्ष
ईंट भट्ठा यूनियन अलीगढ़ के अध्यक्ष जनकपाल सिंह ने आरोप लगाया कि जिले में कई भट्ठे बिना अनुमति के संचालित हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि ऐसे भट्ठों की संख्या 30 से अधिक हो सकती है। इस संबंध में कई बार प्रशासनिक अधिकारियों से शिकायत की गई, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।