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हाथरस में दर्दनाक हादसा... 7 की मौत: अपनों को तलाश में भटकते रहे लोग, लाशें देख गश खाकर गिरी महिलाएं; तस्वीरें
Wed, 11 Dec 2024 11:31 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 11 Dec 2024 11:31 AM IST
सार
हाथरस में सात लोगों की मौत के बाद हादसे की वजह जानने के लिए हाथरस से एआरटीओ और आगरा से उप परिवहन आयुक्त टीम के साथ मौके पर पहुंचे। दोनों अधिकारियों की रिपोर्ट में विरोधाभास दिखा। हादसे के पीछे दोनों ने अलग-अलग वजह बताई।
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Hathras accident
- फोटो : अमर उजाला
उत्तर प्रदेश के हाथरस में मथुरा-बरेली हाईवे पर गांव जैतपुर के पास तेज रफ्तार पर एक गड्ढे को बचाने की कोशिश में टाटा मैजिक वाहन केंटर से जा टकराया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि दोनों वाहन सड़क किनारे जाकर पलट गए। हादसे में साढ़े तीन माह के मासूम व तीन महिलाओं सहित सात लोगों की मौत हो गई। तीन एक ही परिवार के थे। छह हाथरस के और एक मृतक एटा का रहने वाला है। करीब 14 लोग घायल हुए हैं।
हादसे के बाद पलटी कैंटर
- फोटो : अमर उजाला
बागला जिला अस्प्ताल की इमरजेंसी में घायलों के पहुंचते ही चिकित्सकों की टीम ने उपचार शुरू किया। डीएम-एसपी ने भी जिला अस्पताल पहुंचकर परिजनों को ढांढस बंधाया। इस हादसे के सोशल मीडिया पर वायरल होते ही हर कोई अपनों की तलाश में जिला अस्पताल की ओर दौड़ पड़ा। इमरजेंसी के दरवाजे से ही अपनों के नामों को पुकारते हुए लोग आ रहे थे।
गंभीर रूप से घायल को देख परिजन रो रो रहे थे। यहां तक कि हर कोई बस यह जानने को उत्सुक नजर आ रहा था कि उनके परिवार के सदस्य की हालत कैसी है। हादसे की खबर मिलते ही सीएमओ डा. मंजीत सिंह और सीएमएस डा. सूर्य प्रकाश के निर्देश पर जिला अस्पताल में डाक्टरों की तीन सदस्यीय टीम पहुंच गई। डाक्टरों और पैरामेडीकल स्टाफ ने घायलों का उपचार करना शुरू किया।
गंभीर रूप से घायल को देख परिजन रो रो रहे थे। यहां तक कि हर कोई बस यह जानने को उत्सुक नजर आ रहा था कि उनके परिवार के सदस्य की हालत कैसी है। हादसे की खबर मिलते ही सीएमओ डा. मंजीत सिंह और सीएमएस डा. सूर्य प्रकाश के निर्देश पर जिला अस्पताल में डाक्टरों की तीन सदस्यीय टीम पहुंच गई। डाक्टरों और पैरामेडीकल स्टाफ ने घायलों का उपचार करना शुरू किया।
हादसे में क्षतिग्रस्त पिकअप
- फोटो : अमर उजाला
संसाधन व स्टाफ की कमी से इलाज के लिए तरसे घायल
मथुरा-बरेली राष्ट्रीय राजमार्ग पर हुए हादसे ने एक बार फिर स्वास्थ्य विभाग की कलई खोलकर रख दी है। हादसे के बाद ज्यादातर घायलों को निजी वाहनों से पहुंचाने के बाद एंबुलेंस मौके पर पहुंच सकी। घायलों और मृतकों के शवों को एंबुलेंस से न लाकर निजी लोडर वाहनों से लाया गया। ग्रामीणों का कहना था कि ज्यादातर घायलों के जाने के बाद एंबुलेंस हादसा स्थल पर पहुंच सकी। वहीं जिला अस्पताल की इमरजेंसी में भी संसाधन व स्टाफ की कमी हावी रही।
मथुरा-बरेली राष्ट्रीय राजमार्ग पर हुए हादसे ने एक बार फिर स्वास्थ्य विभाग की कलई खोलकर रख दी है। हादसे के बाद ज्यादातर घायलों को निजी वाहनों से पहुंचाने के बाद एंबुलेंस मौके पर पहुंच सकी। घायलों और मृतकों के शवों को एंबुलेंस से न लाकर निजी लोडर वाहनों से लाया गया। ग्रामीणों का कहना था कि ज्यादातर घायलों के जाने के बाद एंबुलेंस हादसा स्थल पर पहुंच सकी। वहीं जिला अस्पताल की इमरजेंसी में भी संसाधन व स्टाफ की कमी हावी रही।
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घटनास्थल पर बिखरे जूते और अन्य सामान
- फोटो : अमर उजाला
जिले में पिछले करीब छह माह में कई बड़े हादसे हो चुके हैं। पहला हादसा 2 जुलाई को सिकंदराराऊ में सत्संग के दौरान हुआ था। यहां भगदड़ मचने से 121 लोगों की मौत हुई थी। इस दौरान सिकंदराराऊ में बने ट्रॉमा सेंटर में सभी सेवाओं के ठप मिली थीं। इसके बाद सात सितंबर को चंदपा के निकट मैक्स व रोडवेज बस की भिड़ंत में 17 लोगों की मौत हुई थी। इस दौरान स्वास्थ्य कर्मी ऑक्सीजन को तलाशते नजर आए थे। इनके अलावा कई अन्य हादसों में भी स्वास्थ्य सेवाएं लचर दिखीं। लगातार हादसों के बाद भी स्वास्थ्य विभाग सुधरने का नाम नहीं ले रहा है।
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अस्पताल में घायल के इलाज के इंतजार में खड़े लोग
- फोटो : अमर उजाला
जिला अस्पताल लाने से पहले अगर घायलों को सिकंदराराऊ ले जाया जाता तो शायद कुछ की जान बच जाती। हादसे के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने निजी वाहनों की मदद से किसी तरह घायलों को उपचार के लिए जिला अस्पताल भेजा। इस दौरान अस्पताल में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। काफी देर बाद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी वहां पहुंचे। साथ ही स्वास्थ्य कर्मचारी भी नदारद दिखे। अस्पताल के बाहर चाय की दुकान वाले और अन्य लोगों ने घायलों काे मैक्स, एंबुलेंस और अन्य वाहनों से बाहर निकला और उन्हें इमरजेंसी पहुंचाया।