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गोंडा दुष्कर्म कांड: 15 घंटे तक पानी में डूबा रहा चार साल की मासूम का शव, अब 'मुर्दा साक्ष्य' देंगे दरिंदगी की गवाही

Thu, 30 Sep 2021 11:20 AM IST
प्राची प्रियम अभिषेक शर्मा, अलीगढ़
अभिषेक शर्मा, अलीगढ़ Published by: प्राची प्रियम Updated Thu, 30 Sep 2021 11:20 AM IST
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Gonda murder and rape case update dead sperms could be appropriate proof for case
यहीं डुबाया गया था बच्ची का शव - फोटो : अमर उजाला
गोंडा में दुष्कर्म व हत्या के बाद बच्ची का शव करीब 15 घंटे तक पानी में डूबा रहा। यही वजह रही कि पोस्टमार्टम के समय चार-चार डॉक्टरों का पैनल दुष्कर्म के पहलू पर स्पष्ट राय व्यक्त नहीं कर सका। दुष्कर्म का अंदेशा जताते हुए स्लाइड जांच के लिए भेजी गई। अब स्लाइड जांच में दुष्कर्म की पुष्टि हुई है। पुलिस सूत्रों के अनुसार इस मामले में भी ‘मुर्दा’ साक्ष्य (स्पर्म के डेड सेल्स) की पुष्टि स्लाइड रिपोर्ट में हुई है। वह दुष्कर्म का पर्याप्त आधार है। इसे लेकर माइक्रोबायोलॉजी शिक्षक, विधि विशेषज्ञ व डॉक्टरों की स्पष्ट राय है कि इस तरह के प्रकरणों में शरीर के अंदरूनी हिस्सों में ‘मुर्दा’ साक्ष्य मिल सकते हैं, जिनके सहारे दुष्कर्म की स्पष्ट राय व्यक्त की जा सकती है और उसी आधार व मजबूत पैरवी के दम पर आरोपी को सजा तक दिलाई जा सकती है।
Gonda murder and rape case update dead sperms could be appropriate proof for case
आरोपी अर्जुन - फोटो : अमर उजाला
हत्या के बाद डुबोया होगा पानी में
पोस्टमार्टम में हत्या का कारण पानी में डूबना यानि ड्राउनिंग आया है। अब उसे हत्या से पहले डुबोया गया या हत्या के बाद डुबोया गया। इस सवाल का जवाब तलाशने के लिए विसरा प्रिजर्व कर उसे परीक्षण के लिए भेजा गया है। मगर कानून के जानकार कहते हैं कि ऐसे मामलों में अब तक जो राय मिलती रही हैं, वह कहती है कि अगर हत्या के बाद पानी में डुबोया होगा तो पेट में बाहरी पानी का प्रवेश नहीं हुआ होगा। चूंकि इस मामले में पानी पेट में ज्यादा नहीं मिला तो यही अंदेशा ज्यादा है। बाकी तस्वीर विसरा जांच में साफ होगी।

एडवोकेट नीरज चौहान ने कहा कि यह बिल्कुल सही है कि शरीर के बाह्य या अंदरूनी हिस्से पर स्पर्म (किसी तरह के सेल्स या निशान) मिलना मुश्किल हैं। हां, अगर चोट आई है तो वह मिल सकती है। मगर यहां यह भी सही है कि स्पर्म साक्ष्य अगर आए थे तो वे पानी में शव के पड़े रहने के कारण कुछ घंटे बाद मृत हो जाते हैं। मृत सेल्स के अवशेष रह जाते हैं। वे स्लाइड जांच में आ सकते हैं। उनके आधार पर सजा कराया जाना भी उतना ही आसान है।

सर्जन डॉ. विवेक जैन ने कहा कि चूंकि शव के पानी में पड़े रहने के कारण चोट के अलावा किसी भी तरह के साक्ष्य कुछ घंटे बाद मृत या मिट जाते हैं। सेल्स के आधार पर सिर्फ यह पाया जा सकता है कि यहां ऐसे निशान थे। उसके आधार पर डॉक्टर्स अमूमन यह राय देते हैं कि इस मामले में दुष्कर्म हुआ है। इस मामले में भी संभवत: यही हुआ होगा।

 
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गोंडा दुष्कर्म कांड - फोटो : अमर उजाला
स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. मणी भार्गव ने कहा कि मौत के बाद शव अगर पानी में पड़ा रहा है तो उसके बाह्य हिस्से में तो किसी प्रकार के साक्ष्य मिलना बेहद मुश्किल हैं। अंदरूनी हिस्से में चोटों के निशान साफ देखे जा सकते हैं। रक्त थक्के के सेल्स या अन्य तरह के सेल्स के मृत साक्ष्य ही राय व्यक्त करने में आसान रहते हैं।

एडवोकेट दीपक बंसल ने बताया कि किसी भी पानी में चूंकि तमाम तरह के अवयव रहते हैं। उस पानी में 15 घंटे तक शव अगर पड़ा है तो बेहद स्पष्ट साक्ष्य मिलना मुश्किल होता है। उनके साक्ष्य सिर्फ मुर्दा स्थिति में रह सकते हैं। उसकी भी एक समय सीमा होती है।

 
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गोंडा दुष्कर्म कांड - फोटो : अमर उजाला
वहीं, एसएसपी कलानिधि नैथानी  ने बताया कि इस मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण डूबना आया। उस समय दुष्कर्म का अंदेशा व्यक्त किया गया। अब स्लाइड रिपोर्ट में दुष्कर्म की पुष्टि की गई है। ये इस मुकदमे में पर्याप्त साक्ष्य हैं। आरोपी का इकबालिया जुर्म बयान, झूठ बोलकर रुपये लेना व मोबाइल छीनकर भागना भी मजबूत साक्ष्य हैं। पानी में डूबने के कारण स्लाइड रिपोर्ट को लेकर संशय था। अगर जरूरत होती तो फॉरेंसिक एक्सपर्ट से अध्ययन कराया जाता। मगर फॉरेंसिक जांच के अनुसार ऐसे मामलों में कुछ घंटों बाद स्पर्म सेल्स का डेड पाया जाना संभव है। जो मुकदमे में बेहद मजबूत साक्ष्य बनेंगे।
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गोंडा दुष्कर्म कांड - फोटो : अमर उजाला

यह भी जानें-
इस तरह के मामलों में स्पर्म सेल्स कुछ घंटों बाद मृत हो जाते हैं। मगर उन्हें फॉरेंसिक या माइक्रोबायोलॉजी स्टडी में पकड़ा जा सकता है और बताया जा सकता है कि ये दुष्कर्म के दौरान आए साक्ष्य हैं। उन्हीं मृत सेल्स के आधार पर पहचाना जाता है और दुष्कर्म की राय व्यक्त की जाती है।

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