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डॉ. कफील पर क्यों लगाई गई थी रासुका, अदालत ने इसे क्यों करार दिया अवैध, पढ़ें पूरा प्रकरण
Tue, 01 Sep 2020 04:06 PM IST
प्राची प्रियम
अमर उजाला ब्यूरो, अलीगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, अलीगढ़
Published by: प्राची प्रियम
Updated Tue, 01 Sep 2020 04:06 PM IST
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डॉ कफील खान
- फोटो : अमर उजाला
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डॉ. कफील पर रासुका के तहत की गई कार्रवाई को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को अवैध करार दिया है। कोर्ट ने कफील पर रासुका लगाने संबंधी डीएम अलीगढ़ के 13 फरवरी 2019 के आदेश को रद्द कर दिया है। दोबारा रासुका की अवधि बढ़ाने को भी कोर्ट ने अवैध करार देते हुए कफील खान को रिहा करने का आदेश दिया है। डॉ. कफील खान की मां नुजहत परवीन ने रासुका के तहत निरुद्धि के आदेश को बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल कर चुनौती दी थी। मुख्य न्यायमूर्ति गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति एसडी सिंह की पीठ ने इसे स्वीकार करते हुए बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका जारी की है।
डॉ. कफील खान
- फोटो : नीरज
डॉ. कफील पर रासुका लगाने के आदेश को अवैधानिक करार देते हुए पीठ ने कहा कि बंदी को उसका पक्ष रखने का उचित अवसर नहीं दिया गया, जिन आशंकाओं को लेकर उस पर रासुका तामील की गई उससे संबंधित लिखित दस्तावेज उसे मुहैया नहीं कराए गए। कफील को 12 दिसंबर 2019 को अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के गेट पर उनके द्वारा दिए गए भाषण की सीडी दी गई। मगर इसे चलाने के लिए कोई उपकरण मुहैया नहीं कराया गया, इससे एक प्रकार से यही माना जाएगा कि उनको उन पर लगे आरोपों से संबंधित कोई दस्तावेज नहीं दिए गए। ऐसा न करना बंदी के अनुच्छेद 22(5) में मिले मौलिक अधिकारों का हनन है।
डॉ. कफील खान
- फोटो : ANI
पीठ ने सरकार की इस दलील को भी अस्वीकार कर दिया जिसमें कहा गया था कि कफील खान जेल में रहते हुए भी लगातार एएमयू के छात्रों के संपर्क में थे जिससे शहर की लोक शांति भंग होने का खतरा था। कोर्ट ने कहा कि ऐसा कोई साक्ष्य नहीं दिया गया है कि कफील छात्रों से किस प्रकार से संपर्क में थे।
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डॉक्टर कफील खान
मुलाकतियों के जरिए संदेश बाहर भेजने का भी कोई साक्ष्य नहीं दिया गया है। रासुका के तहत की गई कार्रवाई में जिन तथ्यों के आधार पर बंदी द्वारा शांति व्यवस्था भंग करने की आशंका जताई गई है उनकी पुष्टि के लिए आदेश में कोई तथ्य नहीं है। कोर्ट ने कहा कि काफील खान पर की गई रासुका के तहत कार्रवाई और उसकी अवधि बढ़ाने का आदेश दोनों कानून की नजर में अवैधानिक है।
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डॉक्टर कफील खान
- फोटो : Twitter
मालूम हो कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के विरोध के दौरान भड़काऊ भाषण देने के आरोप में मथुरा जेल में बंद डॉ. कफील खान के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत कार्रवाई की गई थी। जब उनपर रासुका लगाई गई थी, तब डॉ. कफील मथुरा जेल में बंद थे।