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यमुना एक्सप्रेस वे बस हादसा: 'देवदूत' बनकर आए निहाल, नाले में आधी डूबी बस से बचाईं जिन्दगियां

Wed, 10 Jul 2019 02:15 PM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: Abhishek Saxena Updated Wed, 10 Jul 2019 02:15 PM IST
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yamuna expressway accident Nihal Singh Rescue Injured Passengers Told Live Story of 29 people died
हादसे के बाद सबसे पहले पहुंचे निहाल सिंह - फोटो : अमर उजाला
मैं खेत में शौच के लिए आया था। झरना नाले के पास ही था। तभी तेज आवाज आई। लगा कि नाले में कोई बस या ट्रक गिरा है। मैं दौड़ा आया, बस गिरी थी। चीख पुकार मची थी। बस आधी से ज्यादा डूब चुकी थी। लोग बाहर निकलना चाह रहे थे, लेकिन शीशे लगे थे। बस से खून बाहर आ रहा था। मैं समझ नहीं पा रहा था कि क्या करूं, मेरे पास मोबाइल भी नहीं था, जो किसी को फोन करके बुला लेता। मैं पानी में उतर गया। शीशा तोड़ा, बस से दो -तीन लोगों को बाहर निकाला। एक की जेब में मोबाइल था, उसे लेकर 100 नंबर पर पुलिस को फोन किया। बस हादसे के बाद सबसे पहले देवदूत बनकर पहुंचे निहाल सिंह ने हादसे के बाद बचाव कार्य शुरू किया। आगे की स्लाइड में पढ़िए हादसे की आंखों देखी पूरी घटना... 
yamuna expressway accident Nihal Singh Rescue Injured Passengers Told Live Story of 29 people died
बस हादसे के बाद राहत और बचाव कार्य में जुटे स्थानीय लोग व पुलिसकर्मी - फोटो : अमर उजाला
मैंने सोचा, पुलिस तो पता नहीं कब आएगी। मुझे ही कुछ करना होगा, वरना सब लोग मर जाएंगे। जिन्हें बाहर निकाला था, उनमें से एक युवक ने पैर पकड़ लिए। बोला, मेरी पत्नी और बच्चे अंदर हैं, उन्हें निकलवाओगे, देर हुई तो मर जाएंगे। मैं भागकर गांव गया, गांव पास में ही है एक डेढ़ किलोमीटर पर। मैंने गांव में जाकर शोर मचाया, लोग दौड़े चले आए। हम लोग मौके पर पहुंचे। पुलिस 10 मिनट बाद आ तो गई लेकिन दो ही सिपाही थे, वे क्या करते।
yamuna expressway accident Nihal Singh Rescue Injured Passengers Told Live Story of 29 people died
घटनास्थल पर पहुंचकर घायलों को बाहर निकालने वाले छलेसर चौकी इंचार्ज अनिरुद्ध - फोटो : अमर उजाला
पुलिस और एक्सप्रेसवे की जेसीबी भी नहीं आई थी। हमारे गांव में कुछ लोगों के पास जेसीबी है, वे ले आए। हम सभी नाले में कूद गए और बस से लोगों को बाहर निकालने लगे। 30 मिनट बाद छलेसर चौकी से और पुलिसवाले आ गए। वे भी हमारे साथ लग गए। हमने घायलों और मृतकों को बाहर निकाला लेकिन तब तक  एंबुलेंस नहीं आई थी। पुलिसवालों ने फोन किया, तब जाकर एंबुलेंस आई लेकिन तब तक एक घंटा बीत चुका था। घायलों को अस्पताल ले जाया जाने लगा। तब तक आसपास के गांवों से बहुत लोग आ चुके थे।
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निहाल सिंह, चौकी इंचार्ज अनिरुद्ध, - फोटो : अमर उजाला
एक महिला घायल थी, उसके सिर से खून बह रहा था, हाथ की हड्डी टूट चुकी थी लेकिन वह अपने जख्मों न देखकर अपने पति और बच्चे को ढूंढ रही थी। उसे बाहर निकाल दिया था। वह जिद कर रही थी कि उसे पति और बच्चे को दिखाओ, वरना अस्पताल नहीं जाऊंगी। उससे पुलिस ने कहा कि आपके पति और बच्चे पहले ही अस्पताल चले गए हैं।
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नाले में गिरी बस - फोटो : अमर उजाला
मृतकों के शव नाले के पास ही रखे गए। उन्हें देखकर कलेजा मुंह को आ रहा था। मैंने पहली बार इतनी लाशें देखी थीं। सुबह से भूखा था, लेकिन दोपहर तक कुछ खा नहीं पाया। लाशों का मंजर शायद लंबे समय तक भूल न पाऊं।
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