भट्ठियों पर 1200 से 1400 डिग्री सेल्सियस तापमान पर पानी की तरह पिघलता कांच, आसपास काम कर रहे पसीने से तर-बतर मजदूर। हवा में तैरते कांच के सूक्ष्म कण। यह तस्वीर उस कारखाने की है, जहां कांच की खूबसूरत चूड़ियां तैयार हो रही हैं। लेकिन सुहाग की इस निशानी को बनाने वाले श्रमिक टीबी और फेफड़े से जुड़ी लाइलाज बीमारी सिलिकोसिस के शिकार हो रहे हैं।
फिरोजाबाद में करीब साढ़े तीन लाख संगठित व असगंठित कर्मचारी कांच और चूड़ी उद्योग से जुड़े हुए हैं। इनको गंभीर बीमारियों से श्रमिकों को बचाने के लिए भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने दो बार सर्वे कराया। पहला सर्वे वर्ष 2018 में हुआ, जिसमें 350 सैंपल लिए गए और दूसरा सर्वे 2022 में हुआ। इसमें 500 सैंपल लेकर जांचे गए लेकिन इसकी रिपोर्ट आज तक नहीं आई। नतीजतन, कांच और चूड़ी के कारखानों में काम करने वाले श्रमिक बड़ी संख्या में श्वास समेत अन्य रोगों की चपेट में हैं। इस साल केवल दो महीने में फिरोजाबाद में 900 टीबी रोगी मिल चुके हैं।
2 of 11
श्रमिक
- फोटो : अमर उजाला
जलेसर रोड स्थित कांच के एक कारखाने में काम करने वाले श्रमिक प्रदीप कहते हैं, उन्हें बमु श्किल 300 से 500 रुपये की दिहाड़ी मिलती है। महंगाई के इस दाैर में घर खर्च चलाना मुश्किल है। ऊपर से बीमारी का खतरा बना रहता है। कई बार बीमार होने पर उन्हें उधार लेकर इलाज कराना पड़ा है। प्रदीप के साथ ही काम कर रहे श्रमिक पप्पू कहते हैं, काम के दाैरान उन्हें मास्क और ग्लव्ज समेत अन्य सुरक्षा उपकरण नहीं मिलते। ऐसे में बीमार होने का डर सताता रहता है।
3 of 11
श्रमिक नेता रमाकांत यादव
- फोटो : अमर उजाला
भारतीय मजदूर संघ से जुड़े श्रमिक नेता रमाकांत यादव कहते हैं कि फिरोजाबाद के चूड़ी कारखानों में श्रमिकों की सुरक्षा के उपाय ही नहीं हैं। बिना सुरक्षा उपकरणों के काम कर रहे श्रमिक लगातार बीमार पड़ रहे हैं। उन्होंने कहा, हमने श्रमिकों के लिए अलग से अस्पताल बनाने की मांग प्रशासन के सामने रखी थी लेकिन उस पर अब तक कोई काम नहीं हुआ।
4 of 11
चूड़ी बनाते श्रमिक
- फोटो : अमर उजाला
नियमों की परवाह नहीं
एनजीटी और टीटीजेड के कड़े नियमों के बावजूद शहर के सैलई इलाके में कांच के भंगार (कांच के टुकड़े) को खुलेआम धोने का काम चल रहा है। सड़क किनारे पड़ा यह भंगार हवा के साथ मिलकर कांच के महीन कणों को उड़ाता है, जो सांसों के जरिए सीधे श्रमिकों और स्थानीय लोगों के फेफड़ों में पहुंच रहे हैं।
5 of 11
चूड़ी कारखाना
- फोटो : अमर उजाला
जिले में चल रहे 105 कारखाने
जिले में चूड़ी के 70, माउथ ब्लोइंग के 25 और कांच बोतल के 10 कारखाने चल रहे हैं। इसके अलावा 100 से अधिक डेकोरेशन इकाइयां और 30 से अधिक चूड़ी पकाई भट्टियां हैं। चूड़ी कारखानों और संबंधित कार्यों (जुड़ाई, चकलाई, मुड़ाई) में लगभग 3 लाख से अधिक श्रमिक लगे हैं। माउथ ब्लोइंग और अन्य सजावटी कार्यों में भी करीब 45 हजार कारीगर कार्यरत हैं।