आगरा और दिल्ली जैसे शहरों में चील जैसे शिकारी पक्षी अक्सर तेज धूप में अधिक ऊंचाई पर उड़ने के कारण डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक के शिकार हो जाते हैं। हाल ही में आगरा के प्रगतिपुरम में एक घर से चील को बचाया गया, क्योंकि वह डिहाइड्रेशन के कारण उड़ान भरने में असमर्थ थी। रेस्क्यू टीम तुरंत मौके पर पहुंची, पक्षी को फिर से हाइड्रेट करने के लिए पानी दिया। चील को कुछ घंटों तक चिकित्सकीय देख-रेख में रखने के बाद वापस प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया।
मोर, किंगफिशर, उल्लू का रेस्क्यू: गर्मी में परिंदे भी हुए हलकान, वाइल्डलाइफ एसएसओ ने बचाई 80 पक्षियों की जान
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आगरा में ताजमहल के पश्चिमी गेट के पीछे एक किंगफिशर चिड़िया को बचाया गया, जो घर के अंदर उड़कर पंखे से टकरा गई थी। परिवारजनों ने पक्षी को बेहोश अवस्था में पाया, जिन्होंने तुरंत वाइल्डलाइफ एसओएस को फोन किया। पक्षी को कोई गंभीर चोट नहीं आई थी। उसे एक दिन निगरानी में रखा गया था।
आगरा के ही आजाद नगर में दीवार से टकरा कर घायल हुए बार्न आउल (उल्लू) को भी बचाया। उसके दाहिने पंख में आई चोट का इलाज किया गया। पंचकुइयां से एक इंडियन ईगल आउल का भी रेस्क्यू किया गया। सभी पक्षियों को सुरक्षित उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया है।
संस्था का कहना है कि तेजी से बढ़ रहे शहरीकरण का मतलब यह भी है कि अधिक इमारतें और घर जो कभी वन भूमि हुआ करते थे, आज पक्षियों की आबादी के लिए एक खतरा बन चुके हैं, जिसके कारण कई पक्षी दीवारों, खिड़कियों और इमारत के शीशे से टकराते हैं। पक्षी हवा में तेज गति से दीवारों से टकराते हैं, जिससे वे अक्सर बेहोश हो जाते हैं, उन्हें गंभीर चोटें भी आती हैं। यहां तक कि उनकी हड्डी फ्रैक्चर भी हो जाती है।
वाइल्डलाइफ एसओएस के डायरेक्टर कंजर्वेशन प्रोजेक्ट्स बैजूराज एमवी ने कहा कि पक्षी, विशेष रूप से किशोर, गर्मी से या थके होने पर आराम करने के लिए जमीन पर उतरते हैं। उस वक्त उड़ान भरने में असमर्थ यह पक्षी अक्सर जमीन पर कुत्तों या बंदरों के हमले से घायल हो जाते हैं, जो कभी-कभी घातक भी हो सकता है।
वाइल्डलाइफ एसओएस की सह-संस्थापक और सचिव गीता शेषमणि ने कहा कि आसमान में उड़ने वाले यह पक्षी स्वतंत्रता का प्रतीक हैं। तेजी से बढ़ रही गर्मी और शहरी अतिक्रमण के कारण पृथ्वी पर जीवन इनके लिए काफी चुनौतीपूर्ण बन गया है। हमारी टीम ऐसे ही पक्षियों की सहायता के लिए चौबीसों घंटे काम कर रही है।