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हवा से खून तक पहुंचे प्रदूषण कण तो बढ़ सकता है दिल के दौरे का खतरा, बरतें ये सावधानी
Fri, 01 Nov 2019 02:15 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Fri, 01 Nov 2019 02:15 PM IST
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मास्क लगाकर आए विदेशी पर्यटक
- फोटो : अमर उजाला
दिवाली के बाद बदले मौसम और प्रदूषण के कारण आगरा की हवा की गुणवत्ता खराब हो रही है। ऐसे में थोड़ी सी लापरवाही सेहत पर भारी पड़ सकती है। गुरुवार को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से जारी की गई एक्यूआई सूची में आगरा का सूचकांक 171 दर्ज किया गया। लेकिन इनमें बेहद सूक्ष्म पर्टिकुलेट मैटर (पीएम) की मात्रा 322 तक पहुंच गई।
वातावरण में छाई धुंध
- फोटो : अमर उजाला
चिकित्सकों के मुताबिक लंबे समय तक स्मॉग में समय बिताने पर पीएम कण खून में पहुंच सकते हैं। ऐसे में दिल के दौरे का खतरा बढ़ जाएगा। पीएम 2.5 और इससे छोटे 1 माइक्रोग्राम के कणों का हमला होने पर हृदय रोग, ब्रेन स्ट्रोक के मामले बढ़ सकते हैं। बचाव के लिए मुंह पर कपड़ा या मॉस्क लगाकर ही घर से बाहर निकलें।
स्मॉग से ढका ताजमहल
- फोटो : अमर उजाला
सामान्य से 38 गुना ज्यादा कार्बन मोनोऑक्साइड
शहर में गुरुवार को सामान्य से 38 गुना ज्यादा कार्बन मोनोऑक्साइड की मात्रा रही। रात 9 बजे कार्बन मोनोऑक्साइड 152 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर के अधिकतम स्तर पर थी, वहीं नाइट्रोजन डाइक्साइड भी शाम 7 बजे 60 के अधिकतम स्तर पर पहुंच गया। ओजोन की मात्रा दोपहर तीन बजे 69 तक दर्ज की गई, वहीं पार्टिकुलेट मैटर 2.5 कणों की मात्रा रात 9 बजे 322 तक थी।
सल्फर डाइक्साइड सुबह 3 बजे 34 के अधिकतम स्तर तक रहा। आगरा का एयर क्वालिटी इंडेक्स 171 पर रहा, लेकिन पार्टिकुलेट मैटरऔर कार्बन मोनोऑक्साइड की मात्रा ज्यादा होने से सांस रोगियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
शहर में गुरुवार को सामान्य से 38 गुना ज्यादा कार्बन मोनोऑक्साइड की मात्रा रही। रात 9 बजे कार्बन मोनोऑक्साइड 152 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर के अधिकतम स्तर पर थी, वहीं नाइट्रोजन डाइक्साइड भी शाम 7 बजे 60 के अधिकतम स्तर पर पहुंच गया। ओजोन की मात्रा दोपहर तीन बजे 69 तक दर्ज की गई, वहीं पार्टिकुलेट मैटर 2.5 कणों की मात्रा रात 9 बजे 322 तक थी।
सल्फर डाइक्साइड सुबह 3 बजे 34 के अधिकतम स्तर तक रहा। आगरा का एयर क्वालिटी इंडेक्स 171 पर रहा, लेकिन पार्टिकुलेट मैटरऔर कार्बन मोनोऑक्साइड की मात्रा ज्यादा होने से सांस रोगियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
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मास्क लगाकर आए पर्यटक
- फोटो : अमर उजाला
पार्टिकुलेट मैटर खतरनाक
एसएन मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर जीबी सिंह ने बताया कि धुंध और प्रदूषण के मेल से बने स्मॉग में पार्टिकुलेट मैटर खतरनाक हैं, जिनकी वजह से स्ट्रोक और सीओपीडी की समस्याएं आ रही हैं। बेहद सूक्ष्म पीएम कणों के खून में पहुंचने के कारण दिल के दौरे का खतरा बढ़ रहा है।
एसएन मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर जीबी सिंह ने बताया कि धुंध और प्रदूषण के मेल से बने स्मॉग में पार्टिकुलेट मैटर खतरनाक हैं, जिनकी वजह से स्ट्रोक और सीओपीडी की समस्याएं आ रही हैं। बेहद सूक्ष्म पीएम कणों के खून में पहुंचने के कारण दिल के दौरे का खतरा बढ़ रहा है।
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मुंह पर रूमाल बांधकर बाहर निकल रहे लोग
- फोटो : अमर उजाला
स्मॉग ज्यादा होने से महसूस हो रही कमजोरी
दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट के डॉ. रंजीत कुमार के मुताबिक कार्बन मोनोऑक्साइड की मात्रा ज्यादा होने के कारण ऑक्सी हीमोग्लोबिन की जगह कार्बोक्सी हीमोग्लोबिन बढ़ने लगता है। यह रक्त का संचरण रोकता है। इसी कारण से स्मॉग बढ़ने के दौरान लोगों को कमजोरी महसूस होने लगती है। दिवाली के बाद मौसम के बदलाव के कारण यह स्मॉग नजर आ रहा है। वाहनों और अन्य कारणों से प्रदूषण वायु मंडल में स्थिर है।
दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट के डॉ. रंजीत कुमार के मुताबिक कार्बन मोनोऑक्साइड की मात्रा ज्यादा होने के कारण ऑक्सी हीमोग्लोबिन की जगह कार्बोक्सी हीमोग्लोबिन बढ़ने लगता है। यह रक्त का संचरण रोकता है। इसी कारण से स्मॉग बढ़ने के दौरान लोगों को कमजोरी महसूस होने लगती है। दिवाली के बाद मौसम के बदलाव के कारण यह स्मॉग नजर आ रहा है। वाहनों और अन्य कारणों से प्रदूषण वायु मंडल में स्थिर है।