आगरा के नगला किशन लाल के परचून व्यापारी रामवीर और उनके बेटे बबलू की हत्या मुख्य आरोपी सुभाष ने साथियों संग मिलकर अपने घर में की। इसके बाद रामवीर के घर जाकर उनकी पत्नी मीरा की जान ली और लूटपाट की। साजिश पहले से रच रखी थी, इसलिए सुभाष ने वकील और गजेंद्र को घर बुला रखा था। पुलिस ने आरोपियों से पूछताछ के बाद यही घटनाक्रम बताया है।
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तिहरे हत्याकांड के आरोपी
- फोटो : अमर उजाला
रामवीर ने रात 11 बजे तक दुकान खोली थी। रात 12 बजे सुभाष उनके घर पहुंच गया। उनसे कहा कि तीन लाख रुपये के बारे में बात करनी है। रामवीर ने टाला कि बाद में बात करेंगे, अभी खाना खा लूं। सुभाष ने कहा कि खाना तो हमारे घर भी तैयार है, आइए, आज साथ ही खाना खाएंगे। रामवीर चले गए। वहां पहुंचते ही सुभाष ने पूछा कि तीन लाख देने हैं या नहीं, तारीख बताओ, किस तारीख को दोगे? इस पर रामवीर जैसे ही जोर से बोले, तू किस तरह बात कर रहा है, इसी पर वकील ने उनका मुंह दबा दिया। गजेंद्र ने गले में रस्सी डाल दी। मुंह दबाए रखने से उनकी मौत हो गई। इसके बाद मुंह पर टेप लगाया, ताकि अगर जीवित हो तो बोल न पाए। फिर हाथ और पैर पर भी टेप लगा दिया ताकि अगर बेहोश हो और होश हो जाए तो एकदम से भाग न जाए।
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बबलू और रामवीर के फाइल फोटो
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रामवीर की हत्या के बाद सुभाष बबलू को बुलाने के लिए गया। उधर बबलू पिता के न आने से बेचैन था। वह घर से निकल चुका था। सुभाष ने उससे कहा कि चलो, तुम्हारे पापा ने बुलाया है, तीन लाख की बात चल रही है। वह कमरे में घुसा ही था कि पिता की लाश पर नजर पड़ गई, उसकी जैसे ही चीख निकली सुभाष ने मोबाइल चार्ज के तार से उसका गला घोंट दिया, बबलू को उल्टी आ गई लेकिन गला घोंटे ही रखा। बबलू की मौत हो गई। उधर चीख की आवाज सुनकर सुभाष की मां प्रेमवती जाग गई थी।
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रामवीर का फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
रामवीर और बबलू की हत्या के बाद सुभाष, वकील और गजेंद्र में बातचीत हुई। उन्हें पता था कि अगर मीरा जीवित रह गई तो वे पकड़े जाएंगे। इसलिए तीनों रामवीर के घर गए। पीछे का दरवाजा खोला। एमसीबी गिराकर बिजली बंद कर दी। मीरा के कमरे में गए और लोहे की रॉड सिर में जोर से मारी। वह बेहोश हो गई। उन्होंने समझा कि मर गई है। उसके बाद मीरा के ऊपर केरोसिन डालकर जला दिया।
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आगरा ट्रिपल मर्डर
- फोटो : अमर उजाला
रामवीर और बबलू के शवों को सुभाष और वकील पीठ पर लादकर ले गए थे। इससे पहले ही गजेंद्र ने मोहल्ले में जाकर देखा कि कोई है तो नहीं। शवों को उस कमरे में ले जाकर रखा जिसमें रसोई घर है। मीरा को मरी समझकर उनके पास ही लिटा दिया। इसके बाद घर में लूटपाट की। फिर शवों को आग लगाई। सिलिंडर को इसलिए खुला छोड़ा था, ताकि विस्फोट हो जाए और हत्याकांड को हादसे का रूप मिल जाए।