ताजनगरी में गुलाबी सर्दी शुरू हो गई है। इसी के साथ सज गया है आगरा किले के पास स्थित रामलीला मैदान में तिब्बती बाजार (शक्ति का बाजार)। शक्ति का बाजार नामकरण इसलिए क्योंकि ताजनगरी में यह एक ऐसा बाजार है, जिसमें महिलाएं संघर्षों का पहाड़ लांघकर कारोबार की कमान संभाल रही हैं। तिब्बती शरणार्थियों के इस बाजार में 36 में से 22 स्टॉल पर दुकानदार महिलाएं हैं। शेष स्टॉल पर भी वह जिम्मेदारी संभाल रही हैं। यह बाजार 12 नवंबर से शुरू हुआ है जो 10 फरवरी तक चलेगा।
आगरा में सजा तिब्बती बाजार: संघर्षों का पहाड़ लांघकर महिलाओं ने थामी कारोबार की कमान
13 साल से बेच रहीं गर्म कपड़े
लेह लद्दाख की रहने वाली लामो सिरिंग ने बताया कि उनके पति सेना में हैं। पिछले 13 साल से वह पूरे परिवार सहित गर्म कपड़ों का कारोबार कर रही हैं। उनके दो बच्चे हैं। वह उनको अच्छा जीवन दे पा रही है। इससे उनको गर्व महसूस होता है।
आत्मनिर्भर होने में किया सहयोग
लेह लद्दाख की यांगके ने कहा कि आज के जमाने की महिला हवाई जहाज उड़ा रही हैं। इसके साथ घर भी संभाल रही हैं। वह सब कुछ कर सकती है तो फिर यह तो कपड़ों का ही व्यापार है। इस कारोबार ने हमें आत्मनिर्भर होने में सहयोग किया है।
लेह लद्दाख की रिक्सिन डोल्मा ने बताया कि वह पहली बार आगरा आई हैं। पिछले कई वर्षों से घर की महिलाओं और सहेलियों को खुद के पैरों पर खड़े होते देखा है। इस बार मेरी भी कोशिश रहेगी कि दुकान अच्छी चले। इससे मुझे आत्मविश्वास मिल रहा है।
बचपन से मिले मजबूत बनने के संस्कार
बेंगलुरु की दासांग ने कहा कि हमारे पूर्वजों ने शरणार्थी के रूप में बहुत संघर्ष देखा। यही कारण है कि बचपन से हमारे माता-पिता ने बिना लिंग भेद के हर तरह से मजबूत होने पर जोर दिया। यहां आने से हम आर्थिक और मानसिक दोनों रूप से मजबूत महसूस करते हैं।
शरणार्थी बाजार के लिए छावनी परिषद रामलीला मैदान में जमीन उपलब्ध कराता है। छावनी से अनुमति के बाद जिला प्रशासन पुलिस सुरक्षा व कानून व्यवस्था की अनुमति देता है। इस बाजार में केवल तिब्बती शरणार्थी ही दुकान लगा सकते हैं।
कई तरह की शॉल, स्टोल, लॉन्ग जैकेट, शॉर्ट जैकेट, स्वेटर, कार्डिगन, स्वेट शर्ट, मफलर, गर्म पजामी, पोंचू आदि की वैरायटी उपलब्ध है। बच्चों के लिए मुलायम फैब्रिक में गर्म कपड़ों की खासी मांग है।