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ताजमहल का ये इतिहास है बेहद रोचक, मुमताज को दफनाते वक्त शाहजहां नहीं थे मौजूद, पढ़िए पूरी खबर
Tue, 02 Mar 2021 10:59 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Tue, 02 Mar 2021 10:59 AM IST
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मुमताज की तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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ताजमहल को भले ही मुमताज के नाम से जाना जाता हो, लेकिन इसमें केवल मुमताज महल का ही मकबरा नहीं, बल्कि शाहजहां की दो अन्य बेगमें भी इसी परिसर में दफन हैं। मुमताज मुख्य गुंबद में दफन शाहजहां के पास हैं तो पूर्वी गेट पर सरहिंदी बेगम का मकबरा है, जिन्हें इज्जुनिशां बेगम के नाम से जानते हैं। पश्चिमी गेट पर फतेहपुरी बेगम का मकबरा है। इन तीनों के अलावा चौथी बेगम खंदारी बेगम का मकबरा ताजमहल के बाहर है। यह पूर्वी गेट के बाहर काली ( संदली) मस्जिद के पास है। ताज में नकली कब्रें सिर्फ शाहजहां और मुमताज की हैं, जो असली के साथ ही बनाई गई थीं। पढ़िए अगली स्लाइड...
ताजमहल
- फोटो : Amar Ujala
इतिहासकार राज किशोर राजे के अनुसार अर्जुमंद बानो बेगम यानी मुमताज महल अल जमानी की 17 जून 1631 को मृत्यु के बाद शोक में डूबे शाहजहां ने यादगार मकबरा तामीर करने के लिए काम शुरू कराया। 1631 में ही ताजमहल की नींव रख दी गई। 22 जून 1632 को जब मुमताज महल का पहला उर्स मनाया गया, तब ताजमहल का लाल पत्थर का बेस तैयार हो चुका था, जिस पर टेंट लगाकर उर्स मनाया गया।
सुनहरा ताजमहल
- फोटो : अमर उजाला
अहमद लाहौरी का डिजाइन, अमानत खान की कैलीग्राफी
ताजमहल का डिजाइन उस्ताद अहमद लाहौरी ने तैयार कर शाहजहां को दिखाया। शिराज से अमानत खान को गुंबद पर केलीग्राफी का काम सौंपा गया। गयासुद्दीन ने मकबरे के पत्थर पर इबारतें लिखीं। तुर्की के गुंबद बनाने के शिल्पी इस्माइल खान अफरीदी को गुंबद बनाने की जिम्मेदारी दी गई। 20 हजार मजदूरों पर निगरानी के लिए मुहम्मद हनीफ को अधीक्षक बनाया गया।
ताजमहल का डिजाइन उस्ताद अहमद लाहौरी ने तैयार कर शाहजहां को दिखाया। शिराज से अमानत खान को गुंबद पर केलीग्राफी का काम सौंपा गया। गयासुद्दीन ने मकबरे के पत्थर पर इबारतें लिखीं। तुर्की के गुंबद बनाने के शिल्पी इस्माइल खान अफरीदी को गुंबद बनाने की जिम्मेदारी दी गई। 20 हजार मजदूरों पर निगरानी के लिए मुहम्मद हनीफ को अधीक्षक बनाया गया।
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ताजमहल आगरा
- फोटो : Ani
10 साल में बना मुख्य मकबरा
26 मई 1633 को दूसरे उर्स में टेरेस और प्लेटफार्म बनाया जा चुका था। 10 साल में मुख्य गुंबद का काम पूरा कर लिया गया। शाहजहां की कहानी बादशाहनामा में इसका जिक्र है। 1643 में मुमताज महल की कब्र के चारों ओर सोने की जाली लगाई गई, जो मौजूदा संगमरमरी कब्र की तरह ही थी। मुख्य गुंबद का काम पूरा होने के बाद शाही मस्जिद और उसके सामने मेहमानखाना और अंत में रॉयल गेट, फोरकोर्ट का काम कराया गया।
26 मई 1633 को दूसरे उर्स में टेरेस और प्लेटफार्म बनाया जा चुका था। 10 साल में मुख्य गुंबद का काम पूरा कर लिया गया। शाहजहां की कहानी बादशाहनामा में इसका जिक्र है। 1643 में मुमताज महल की कब्र के चारों ओर सोने की जाली लगाई गई, जो मौजूदा संगमरमरी कब्र की तरह ही थी। मुख्य गुंबद का काम पूरा होने के बाद शाही मस्जिद और उसके सामने मेहमानखाना और अंत में रॉयल गेट, फोरकोर्ट का काम कराया गया।
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ताजमहल में शाहजहां-मुमताज के कब्रों की प्रतिकृति
- फोटो : Amar Ujala
मुमताज को दफनाते वक्त शाहजहां मौजूद नहीं थे
इतिहासकार राज किशोर राजे बताते हैं कि बुरहानपुर से मुमताज का शव ताजमहल में लाकर पहले अस्थाई तौर पर दफनाया गया। शव लेकर उनका बेटा शाहशुजा आया था। सुपुर्द ए खाक किए जाते समय शाहजहां वहां मौजूद नहीं थे।
इतिहासकार राज किशोर राजे बताते हैं कि बुरहानपुर से मुमताज का शव ताजमहल में लाकर पहले अस्थाई तौर पर दफनाया गया। शव लेकर उनका बेटा शाहशुजा आया था। सुपुर्द ए खाक किए जाते समय शाहजहां वहां मौजूद नहीं थे।