लोकसभा चुनाव के लिए सपा और बसपा के बीच गठबंधन औपचारिक एलान हो गया है। वहीं रालोद मुखिया चौधरी अजित सिंह पहले ही कह चुके हैं कि रालोद गठबंधन में शामिल रहेगा। इसके बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि बसपा, सपा और रालोद में किसको कौन सी सीट मिलेगी। महागठबंधन के बाद ब्रज में सपा को ज्यादा सीटें मिलने की संभावना है।
महागठबंधन के बाद ऐसी हो सकती है ब्रज की सियासी तस्वीर, यहां समझिए
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सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव।
- फोटो : amar ujala
फिरोजाबाद और मैनपुरी पर सपा के अलावा किसी और ने दावा ही नहीं किया। कारण यह है कि दोनों सीटें सपा का गढ़ रही हैं। मौजूदा सांसद भी सपा के ही हैं। एटा में बसपा भी मजबूत है, लेकिन दोनों दलों के सूत्रों का कहना है कि यह सीट सपा के ही खाते में जा सकती है। इसी तरह हाथरस सीट सपा के खाते में जा सकती है जबकि यहां बसपा मजबूत है। पिछले चुनाव में बसपा के मनोज सोनी दूसरे स्थान पर रहे थे। हाथरस में सपा तीसरे स्थान पर रही थी लेकिन ऐसे कयास हैं कि यह सीट भी बसपा को नहीं, सपा को मिल सकती है।
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मंच पर रालोद मुखिया अजित सिंह व पार्टी के पदाधिकारी
- फोटो : अमर उजाला
मथुरा सीट पर रालोद का दावा है। कारण यह है कि यहां से 2009 में जयंत चौधरी सांसद रह चुके हैं। पिछले चुनाव में दूसरे नंबर पर रहे थे। हालांकि एक-एक सीट पर माथापच्ची ही नहीं, नेताओं के बीच खींचतान भी चल रही है। एलान होने तक कुछ भी फेरबदल संभव है।
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बसपा सुप्रीमो मायावती।
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आगरा की दोनों सीटें आगरा और फतेहपुर सीकरी बसपा के खाते में जा सकती हैं। दोनों सीटों पर बसपा पहले ही प्रभारी उतार चुकी है। जातिगत समीकरण के अनुसार आगरा की दोनों सीटों पर बसपा का अच्छा खासा वोटबैंक है। सूत्रों के मुताबिक इसके बदले पूर्वी उत्तर प्रदेश में सपा अपनी मजबूत सीट बसपा को दे सकती है। अलीगढ़ पर भी बसपा का दावा मजबूत बताया जा रहा है।
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सपा के राष्ट्रीय महासचिव रामजीलाल सुमन ने कहा कि गठबंधन का फार्मूला शीर्ष नेतृत्व ने तय किया है। लेकिन इतना जरूर है कि यह व्यवहारिक दृष्टि से गठबंधन होगा। प्रदेश में कम से कम 70 सीटें जीतेंगे। रही पश्चिमी यूपी की बात तो रालोद के शामिल होने से गठबंधन को मजबूती मिलेगी। इससे रालोद को भी लाभ होगा। किसके हिस्से में कौन सी सीट आएगी, यह भी जल्द ही तय हो जाएगा।