मथुरा में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी देखने के बाद अगर आपने नंदगांव का नंदोत्सव नहीं देखा तो क्या देखा? कन्हैया का जन्मोत्सव कान्हा की क्रीड़ा स्थली में धूमधाम से मनाया जाता है। मान्यता के अनुसार नंद बाबा ने खुद नंदगांव में आकर ही कन्हैया का नंदोत्सव धूमधाम से मनाया था। इस बार जन्माष्टमी के बाद 31 अगस्त को पौराणिक एवं ऐतिहासिक श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का उल्लास नंदभवन में रहेगा। नंदीश्वर पहाड़ी पर स्थित नंदबाबा मंदिर (नंदभवन) में पूर्णिमा से ही श्रीकृष्ण जन्म की बधाइयों का दौर चल रहा है। दूरदराज से नंदभवन आकर श्रद्धालु समाज गायन द्वारा कृष्णलीला का आनंद ले रहे हैं। नंदबाबा मंदिर में भव्य सजावट की गई है। रंग-बिरंगी रोशनी से नहाते मंदिर की आभा देखते ही बन रही है।
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नंदबाबा मंदिर, नंदगांव
- फोटो : अमर उजाला
नंदगांव में जन्माष्टमी की धूम है। मान्यता है कि अष्टमी के दिन मां यशोदा को एक प्रसूता की भांति आहार दिया जाता है। ठीक मध्य रात को श्रीकृष्ण जन्म होता है। जन्म के बाद शीत से बचाने के लिए सोंठ और धनियां की पंजीरी दी जाती है। मां यशोदा के मस्तक और पेट पर कपड़ा बांध दिया जाता है। जो कान्हा की छठी तक बंधा रहता है। अष्टमी की रात में भजन संध्या और कृष्ण वंशावली का बखान किया जाता है।
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नंदबाबा मंदिर, नंदगांव
- फोटो : अमर उजाला
नंदगांव के नंदभवन में ढांढ-ढांढिन लीला आकर्षण का केंद्र रहती है। वैदिक मंत्रों के साथ गुप्त अभिषेक किया जाता है। इस दौरान कान्हा केवल कटि काछनी में ही दर्शन देते हैं। देश-विदेश के हजारों श्रद्धालु इस अलौकिक आनंद का अनुभव करते हैं। अगले दिन नवमी को नंदभवन में प्रात: से ही नंदोत्सव का उल्लास छा जाता है।
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नंदबाबा मंदिर, नंदगांव
- फोटो : अमर उजाला
नंदभवन में नंदगांव-बरसाना के समाज के मध्य घंटों समाज गायन होता है। शंकर लीला, मटकी लीला, दधि कांधा, बांस बधाई आदि कार्यक्रम होते हैं। नंदगांव-बरसाना के लोगों के मध्य बहुचर्चित हास-परिहास और नंदभवन में मल्ल युद्ध स्थानीय लोगों के साथ-साथ देशी-विदेशी श्रद्धालुओं का मनोरंजन भी करता है।
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श्रीकृष्ण जन्मस्थान, मथुरा
- फोटो : अमर उजाला
मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर जन्माष्टमी का पर्व धूमधाम से मनाया गया। श्रीकृष्णोत्सव के लिए कान्हा की नगरी के सभी प्रवेश द्वारों को सजाया गया। श्रीकृष्ण जन्मभूमि तक जाने वाले सभी रास्तों पर भी भव्य सजावट की गई। तिराहे-चौराहे और यमुना के घाट विद्युत झालरों से चमक रहे हैं। चौराहों पर सांस्कृतिक उत्सव के लिए मंच सजा दिए गए।