मथुरा में जन्मे भगवान श्रीकृष्ण गोकुल में पले-बढ़े, लेकिन ब्रज का कण-कण उनकी लीलाओं का साक्षी है। कलकल करती यमुना, हरे-भरे वन-उपवन और कुंड-सरोवर श्रीकृष्ण की लीलाओं का स्मरण कराते हैं। इन स्थलों पर प्रतिदिन हजारों लोग दर्शन के लिए आते हैं। इनमें से 21 कोसी गिरिराज पर्वत सबसे खास है। इस पर आज भी श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं के प्रमाण मौजूद हैं। मथुरा के गोवर्धन में गिरिराज पर्वत की शिलाओं पर मौजूद अंगुलियां, गाय के खुर आदि चिन्ह भगवान की बाल-लीलाओं के साक्षी बने हुए हैं। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर जानिए उन शिलाओं के बारे में, जिनसे लाखों श्रद्धालुओं की आस्था जुड़ी हुई है।
{"_id":"612b837d0947c1109166e77d","slug":"shri-krishna-janmashtami-2021-krishna-leela-signs-on-rocks-of-govardhan-mountain","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"श्रीकृष्ण जन्माष्टमी: ब्रज के कण-कण में कन्हैया... देखें गोवर्धन की शिलाओं पर बाल लीलाओं के निशान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी: ब्रज के कण-कण में कन्हैया... देखें गोवर्धन की शिलाओं पर बाल लीलाओं के निशान
Sun, 29 Aug 2021 06:32 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क अमर उजाला, मथुरा
न्यूज डेस्क अमर उजाला, मथुरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Sun, 29 Aug 2021 06:32 PM IST
विज्ञापन
गिरिराज पर्वत की शिलाओं पर निशान
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शिला पर गाय के खुर जैसी आकृति
- फोटो : अमर उजाला
धार्मिक मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण बाल अवस्था में गिरिराज पर्वत पर ग्वाल बालों के संग गाय चराते थे। प्रकृति के संरक्षण का संदेश भी श्रीकृष्ण ने गिरिराज पर्वत को उठाकर दिया था। उनकी इन्हीं लीलाओं के चिन्ह गिरिराज शिलाओं पर गाय के खुर और भगवान कृष्ण की रकनी, उनकी अंगुलियों के चिन्ह साफ नजर आते हैं। ये शिलाएं पर्वत के ऊपर जतीपुरा श्रीनाथजी मंदिर के पास विराजमान हैं। बड़ी संख्या में लोग इनके दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं।
दानघाटी मंदिर
- फोटो : Amar Ujala
दानघाटी पर गोपियों से मांगा था दान
दानघाटी मंदिर के सेवायत पवन कौशिक ने बताया कि ब्रज गोपी बरसाना से माखन मिश्री लेकर गोकुल जा रही थीं। भगवान कृष्ण पर्वत पर गाय चरा रहे थे। गोपियों को माखन मिश्री ले जाते देखा तो कृष्ण ने ब्रज गोपियों से दान मांग लिया। तभी से इसका नाम दानघाटी पड़ गया।
दानघाटी मंदिर के सेवायत पवन कौशिक ने बताया कि ब्रज गोपी बरसाना से माखन मिश्री लेकर गोकुल जा रही थीं। भगवान कृष्ण पर्वत पर गाय चरा रहे थे। गोपियों को माखन मिश्री ले जाते देखा तो कृष्ण ने ब्रज गोपियों से दान मांग लिया। तभी से इसका नाम दानघाटी पड़ गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
दानघाटी मंदिर के बाहर भक्तों की भीड़
- फोटो : अमर उजाला
भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव (जन्माष्टमी) पर गिरिराज दानघाटी मंदिर को दूधिया रोशनी से सजाया गया है। मंदिर में उत्सवों की तैयारी सेवायतों द्वारा की जा रही हैं। कृष्ण जन्मोत्सव पर मंदिर में महाभिषेक और जन्म से पूर्व भजन संध्या आदि धार्मिक आयोजन होंगे।
विज्ञापन
गोवर्धन स्थित दानघाटी मंदिर
- फोटो : Amar Ujala
गोवर्धन आते हैं करोड़ों श्रद्धालु
ब्रज दर्शन को आने वाले श्रद्धालुओं में गोवर्धन द्वितीय स्थान पर है। यहां वृंदावन के बाद सबसे अधिक श्रद्धालु आते हैं। इसमें मुड़िया पूर्णिमा पर ही एक करोड़ से अधिक श्रद्धालु परिक्रमा करते हैं। इसके अलावा गिरिराज जी की परिक्रमा अनवरत चलती रहती है।
ब्रज दर्शन को आने वाले श्रद्धालुओं में गोवर्धन द्वितीय स्थान पर है। यहां वृंदावन के बाद सबसे अधिक श्रद्धालु आते हैं। इसमें मुड़िया पूर्णिमा पर ही एक करोड़ से अधिक श्रद्धालु परिक्रमा करते हैं। इसके अलावा गिरिराज जी की परिक्रमा अनवरत चलती रहती है।