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Sawan 2020: इस बार नहीं लगेगा कैलाश मेला, महादेव के ऑनलाइन दर्शन करेंगे भक्त
Mon, 20 Jul 2020 12:27 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Mon, 20 Jul 2020 12:27 AM IST
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कैलाश महादेव मंदिर में स्थापित हैं दो शिवलिंग
- फोटो : अमर उजाला
आगरा में कोरोना वायरस के कारण कैलाश महादेव मंदिर मेला इस बार नहीं लगेगा। यह सावन के तीसरे सोमवार को लगता है। भक्त फेसबुक और यू ट्यूब पर भोले के दर्शन कर पाएंगे। मंदिर के पुजारी भगवान भोलेनाथ का अभिषेक करेंगे। मंदिर को भव्य रूप से सजाया गया है। यह पहला मौका है जब मेला नहीं लग रहा है। मेले के लिए शहर में सरकारी छुट्टी रहती है। यह इस बार भी है। दफ्तर बंद रहेंगे, हालांकि बाजार खुलेंगे।
सिकंदरा स्थित कैलाश महादेव मंदिर
कैलाश महादेव मंदिर मेला के दिन सिकंदरा स्मारक में प्रवेश नि:शुल्क होता था। इस बार यह स्मारक भी बंद है। मेले के दिन सिकंदरा क्षेत्र में दिन-रात रौनक रहती थी। हजारों श्रद्धालु भोले का जलाभिषेक करने के लिए आते थे, लेकिन इस बार भक्तों की भीड़ नहीं होगी। मंदिर में भव्य फूल बंगला सजाया गया है।
आगरा का कैलाश महादेव मंदिर
दस हजार वर्ष पूर्व हुई शिवलिंग की स्थापना
कैलाश मंदिर में दो शिवलिंग हैं। मंदिर के महंत गौरव गिरी ने बताया कि ऐसी मान्यता है कि दस हजार वर्ष पूर्व भगवान परशुराम एवं उनके पिता जमदग्नि ऋषि अपने स्थान रेणुका धाम आगरा से कैलाश पर्वत जाया करते थे। उनकी तपस्या से भगवान शंकर प्रसन्न हुए और वरदान मांगने के लिए कहा। परशुराम और जमदग्नि ऋषि ने भगवान शंकर से रेणुका धाम चलने का आग्रह किया। परशुराम ने कहा कि वहां उनकी मां रेणुका भी पूजा अर्चना कर सकेंगी, क्योंकि वे कैलाश आने में असमर्थ हैं।
कैलाश मंदिर में दो शिवलिंग हैं। मंदिर के महंत गौरव गिरी ने बताया कि ऐसी मान्यता है कि दस हजार वर्ष पूर्व भगवान परशुराम एवं उनके पिता जमदग्नि ऋषि अपने स्थान रेणुका धाम आगरा से कैलाश पर्वत जाया करते थे। उनकी तपस्या से भगवान शंकर प्रसन्न हुए और वरदान मांगने के लिए कहा। परशुराम और जमदग्नि ऋषि ने भगवान शंकर से रेणुका धाम चलने का आग्रह किया। परशुराम ने कहा कि वहां उनकी मां रेणुका भी पूजा अर्चना कर सकेंगी, क्योंकि वे कैलाश आने में असमर्थ हैं।
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कैलाश महादेव मंदिर में स्थापित हैं दो शिवलिंग
- फोटो : अमर उजाला
भगवान शंकर ने कहा कि वे कैलाश से कोई भी कण ले लें, जिसमें वो स्वयं विराजमान हैं। पिता-पुत्र ए -एक शिवलिंग लेकर चल दिए। रास्ते में जिस स्थान पर कैलाश मंदिर है, वहां दोनों ने विश्राम किया। इसके बाद जब शिवलिंगों को उठाने की कोशिश की तो वे टस से मस न हुए। आकाशवाणी हुई कि एक बार जहां स्थापना हो गई, वहीं रहेंगे। गिरी ने बताया कि इसका धर्मपुराणों में वर्णन है।
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कैलाश महादेव मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
1500 वर्ष पूर्व बनाया गया मंदिर
जहां कैलाश मंदिर है, वहां एक टीला था। 1500 वर्ष पूर्व गाय उस पर जातीं तो उनका दूध निकलने लगता। ग्वाले ने यह देखा तो पूरे गांव को बताया। खोदाई हुई तो वहां दो शिवलिंग निकले। गांव वालों ने काफी गहराई तक खोदा लेकिन शिवलिंग बहुत लंबे थे। वहीं पर मंदिर की स्थापना करा दी गई। गिरी ने बताया कि मंदिर यमुना किनारे है। भोले का जलाभिषेक गंगाजल से किया जाता है। इसके लिए नगर निगम ने गंगाजल की लाइन की व्यवस्था की है।
जहां कैलाश मंदिर है, वहां एक टीला था। 1500 वर्ष पूर्व गाय उस पर जातीं तो उनका दूध निकलने लगता। ग्वाले ने यह देखा तो पूरे गांव को बताया। खोदाई हुई तो वहां दो शिवलिंग निकले। गांव वालों ने काफी गहराई तक खोदा लेकिन शिवलिंग बहुत लंबे थे। वहीं पर मंदिर की स्थापना करा दी गई। गिरी ने बताया कि मंदिर यमुना किनारे है। भोले का जलाभिषेक गंगाजल से किया जाता है। इसके लिए नगर निगम ने गंगाजल की लाइन की व्यवस्था की है।