आगरा रेल मंडल में रेलवे के रिकॉर्ड में भले ही मानव विहीन रेलवे क्रासिंग अब 12 बची हों, लेकिन कई रेलवे क्रासिंग ऐसी हैं, जहां लंबे समय से अंडरपास बनाए जाने की मांग की जाती रही है। कई दफा हादसे भी हो चुके हैं। कई स्टेशनों के पास बने चोर रास्ते भी हादसों का सबब बने हुए हैं।
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रेलवे क्रासिंग
- फोटो : अमर उजाला
इस ओर रेल विभाग का कोई ध्यान नहीं है। मानव रहित रेलवे क्रासिंग जागरूकता दिवस पर गुरुवार को रेल विभाग समपार फाटकों को लेकर लोगों को जागरूक करने के लिए नुक्कड़ नाटक, मोबाइल वैन से प्रचार और रेल संरक्षा कर्मियों को प्रशिक्षण देगा, लेकिन आगरा में ही रेलवे क्रासिंग को पार करते वक्त कई हादसे हो चुके हैं।
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रेलवे क्रासिंग
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सराय बेगा रेलवे क्रासिंग से रोजाना स्कूली बच्चों समेत सैकड़ों लोगों को दूसरी ओर जाने के लिए रेलवे लाइन पार करनी पड़ती है। यहां के लोग काफी समय से अंडरपास बनाए जाने की मांग कर चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई है।
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रेलवे क्रासिंग
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इसी तरह शाहगंज में बारह खंभा रेलवे फाटक के पास टूटी हुई चारदीवारी से रोजाना लोगों को आवागमन होता है। इस क्रासिंग पर भी इसी साल तीन लोगों की ट्रेन की चपेट में आकर मौत हो चुकी है। सिकंदरा में पत्थर घोड़ा के पास भी लोग क्रासिंग पार करते हैं, यहां तीन माह पहले मां-बेटी ट्रेन से कटी थीं।
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रेलवे क्रासिंग
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इसी तरह मुस्तफा क्वार्टर में भी रेलवे क्रासिंग पार करना लोगों की मजबूरी है। यहां भी लंबे समय से अंडरपास बनाए जाने की मांग की जाती रही है, लेकिन रेलवे ने रेल फाटकों के अलावा किसी अन्य जगह अंडरपास बनाए जाने के प्रस्ताव पर विचार नहीं किया है।