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अफसरों ने भी माना इसलिए सफाई में पिछड़ गई कान्हा की नगरी
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Thu, 04 May 2017 08:52 PM IST
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होली गेट
- फोटो : अमर उजाला
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कान्हा यानी गोपियों के छलिया। इन्हीं छलिया कृष्ण कन्हैया की जन्मस्थली मथुरा है तो क्रीड़ा स्थली वृंदावन। केंद्र में भाजपा की सरकार बनते ही यहां के धार्मिक और पौराणिक महत्व के आधार पर मथुरा-वृंदावन को हेरिटेज सिटी का दर्जा दिया है। सांसद हेमा मालिनी के प्रयासों से यहां हेरिटेज सिटी के लिए कार्य भी हो रहे हैं लेकिन दूसरी ओर स्वच्छता के नाम पर छलिया की नगरी को छला जा रहा है। यही कारण है कि भारत सरकार के शहरी विकास मंत्रालय की ओर से जारी स्वच्छ सर्वेक्षण 2017 में मथुरा को देश के 434 शहरों में 352वीं रैंक मिली है। ये हैं कारण...
गंदगी
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गुरुवार को जारी सर्वे के नतीजों ने मथुरा पर ‘गंदे शहर’ का ठप्पा लगा दिया है। इस दाग के लिए कोई एक जिम्मेदार नहीं है। प्रशासन शहर को साफ रखने में पूरी तरह नाकाम रहा। लोग भी गंदगी करने में पीछे नहीं हैं। हाल यह है कि व्यापारी अपनी दुकान की सफाई करता है और कूड़ा सड़क पर सरका देता है। घरों का कूड़ा भी कूड़ादान में डालने कोई नहीं जा रहा। सब गली के नुक्कड़ पर या खाली प्लाट में डाल रहे हैं।
कूडे़ का डोर-टू-डोर कलेक्शन नहीं किया जा रहा
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वहीं मथुरा में कूडे़ का डोर-टू-डोर कलेक्शन नहीं किया जा रहा है। सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट ठप पड़ा है। अभी भी लोग खुले में शौच कर रहे हैं। शहर की सफाई व्यवस्था का प्लान यहां आने वाले लोगों को ध्यान में रखकर नहीं बनाया गया है। विभिन्न मंदिरों में दर्शन के लिए प्रतिदिन 25 हजार लोग आते हैं। शहर की आबादी भी 4.5 लाख है। खुद नगर पालिका अध्यक्ष मनीषा गुप्ता का कहना है कि कर्मचारियों की संख्या प्रतिदिन कम हो रही है। क्षेत्रफल और आबादी में बड़ा इजाफा हुआ है। मौजूदा संसाधनों के सहारे बेहतर परिणाम की उम्मीद कैसे की जा सकती है।
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जलभराव
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वहीं 28 किलोमीटर क्षेत्रफल वाले शहर की सफाई के लिए उपकरणों की बात करें तो नगण्य हैं। पांच जेसीबी, 16 ट्रैक्टर ट्रॉली, पांच छोटे ट्रैक्टर, 01 स्वीप मशीन, 01 लोडर, 525 सफाई कर्मचारी हैं। हेल्थ मैनुअल के मुताबिक सफाई कर्मचारी ही 1200 चाहिए। खुद पालिका के मथुरा नगर पालिका के ईओ डा. ब्रजेश कुमार स्वीकारते हैं कि शहर में पालिका डोर-टू-डोर कूड़ा उठाने का प्रबंध करने में पूरी तरह से असफल रही है।
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पालीथिन
वहीं सिटी मजिस्ट्रेट रामअरज यादव का मानना कि प्रत्येक काम डंडा के जोर पर नहीं हो सकता है। वह कहते हैं कि पॉलीथिन प्रतिबंधित है। फिर भी लोग इसका उपयोग नहीं छोड़ रहे हैं। जनजागरुकता को अभियान भी चलाए हैं। पॉलीथिन जब्तीकरण की कार्रवाई भी की गई। अनेक दुकानदार ऐसे भी हैं, जिन पर कई बार जुर्माना हुआ है। शहर को सुंदर बनाने का दायित्व सरकारी सिस्टम के साथ यहां के लोगों का भी तो है।