सुलहकुल की नगरी आगरा के नुनिहाई में हिंदू-मुस्लिम एकता की अद्भुत तस्वीर देखने को मिल रही है। यहां गणेश और ताजिये के पंडाल बराबर में स्थित हैं। एक पंडाल में गणेश वंदना के स्वर गूंजते हैं तो दूसरे में ताजिये की जियारत के लिए मुस्लिम जुटते हैं। दोनों एक-दूसरे के कार्यक्रमों में शरीक होते हैं।
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गणेश पूजा पंडाल
- फोटो : अमर उजाला
यमुनापार के नुनिहाई सब्जी मंडी रोड पर गणेश चतुर्थी पर आठ साल से पंडाल में गणेश प्रतिमा को विराजमान किया जाता है। यहां सुबह और शाम को आरती और भजन कीर्तन के कार्यक्रमों का सिलसिला अनंत चतुर्दशी तक चलता है। इसी पंडाल के बराबर में ही ताजिये का पंडाल बना हुआ है। गणेश पंडाल लगाने वाले मुकेश कुमार ने बताया कि पिछले आठ साल से गणेश पंडाल लगाया जा रहा है।
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ताजिये का पंडाल
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ताजियेदारी करने वाले खलील खान कहते हैं कि उनके पिता ने करीब 40 साल पहले यहां ताजिये रखने की शुरुआत की थी। अब बगल में गणेश पंडाल भी है। शाम को दोनों ही पंडालों में श्रद्धालु जुटते हैं। एक ओर जियारत तो दूसरी ओर आरती होती है। आसपास के लोग भी इसे सद्भाव की मिसाल मानते हैं।
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स्थानीय निवासी राजकुमार और खलील
- फोटो : अमर उजाला
स्थानीय निवासी अजय कुमार ने बताया कि गणेशोत्सव की शुरुआत को आठ साल हुए हैं। बस्ती में 15-16 मुस्लिम परिवार भी रहते हैं। कभी विवाद नहीं होता है। सुबह और शाम को आरती में सैकड़ों लोग जुटते हैं। वहीं खलील खान ने कहा कि नुनिहाई में 40 साल से रह रहे हैं। एक दूसरे के सुख-दुख में भागीदारी करते हैं। ऐसे में ताजिए के जुलूस में भी बहुत से हिंदू भाई हमारे साथ करबला तक जाते हैं।
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दरगाह मरकज साबरी
- फोटो : अमर उजाला
दरगाह मरकज साबरी से जुड़े हिंदू भी फूलों के ताजिये की जियारत करते हैं। मोहर्रम की दसवीं को शबील लगाकर शर्बत बांटते हैं। दरगाह के सचिव विजय कुमार जैन बताते हैं कि दरगाह के हिंदू जायरीन हर मोहर्रम में दसवीं की सुबह जियारत करने के लिए फूलों के ताजिए पर पहुंचते हैं।