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Mudiya Purnima Mela: 464 वर्ष पुराना है मुड़िया पूर्णिमा मेला, करोड़ों भक्त लगाते हैं परिक्रमा, जानें क्या है इतिहास
Mon, 11 Jul 2022 12:07 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Mon, 11 Jul 2022 12:07 AM IST
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मुड़िया पूर्णिमा मेला
- फोटो : अमर उजाला
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मथुरा में होली, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, यमद्वितीया और राधाष्टमी पर ब्रज में लाखों भक्त आते हैं, लेकिन मुड़िया पूर्णिमा पर श्रद्धालुओं की यह संख्या एक करोड़ के आंकडे़ को भी पार कर जाती है। श्रद्धालुओं की यह भीड़ गिरिराजजी की परिक्रमा के लिए यहां आती है। तीन दिन तक 21 कोस में गिरिराज महाराज के प्रति आस्था और भक्ति की भावनाएं लिए श्रद्धालु अनवरत मानव श्रृंखला के रूप में दिखाई देते हैं। गोवर्धन में गुरु पूर्णिमा या मुड़िया पूर्णिमा पर इस परिक्रमा के इतिहास के बारे में पद्मश्री मोहन स्वरूप भाटिया बताते हैं कि इसकी स्मृतियां चैतन्य महाप्रभु और सनातन गोस्वामी से जुड़ी हुई हैं। सनातन गोस्वामी पश्चिमी बंगाल के शासक हुसैन शाह के दरबार में मंत्री थे। चैतन्य महाप्रभु से प्रभावित होकर उन्होंने मंत्री पद त्याग दिया और वृंदावन आ गए। यहां चैतन्य महाप्रभु से दीक्षा प्राप्त कर वह गोवर्धन में मानसी गंगा के तट स्थित चक्लेश्वर मंदिर के निकट कुटी बनाकर रहने लगे। वे वृद्धावस्था में भी प्रतिदिन गिरिराज गोवर्धन की परिक्रमा किया करते थे।
परिक्रमा मार्ग पर भक्तों की भीड़
- फोटो : अमर उजाला
सनातन गोस्वामी का अब से 464 वर्ष आषाढ़ पूर्णिमा संवत 1615 को निधन हो जाने पर उनके शिष्यों ने परंपरानुसार सिर मुड़वा कर सनातन गोस्वामी की अर्थी के साथ गाते-बजाते हुए कीर्तन कर परिक्रमा लगाई। सनातन गोस्वामी के निर्वाण की तिथि शिष्यों के लिए पुण्यतिथि बन गई। शिष्यों के अतिरिक्त भक्तजन भी उनकी पुण्यतिथि पर परिक्रमा लगाने लगे।
दानघाटी मंदिर के बाहर भक्तों की भीड़
- फोटो : अमर उजाला
परिक्रमा लगाने वाले भक्तों को चमत्कारी लाभ प्राप्त होने पर निरंतर संख्या बढ़ती गई। यह अब एक करोड़ के आंकडे़ को पार कर जाती है। हालांकि पद्मश्री ने कहा कि भले ही गिरिराजजी की परिक्रमा करने वालों की संख्या में इजाफा हुआ है लेकिन ये लोग इस दिन की परिक्रमा के महत्व से परिचित नहीं हैं।
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चैतन्य महाप्रभु
- फोटो : अमर उजाला
यह नहीं जानते कि चैतन्य महाप्रभु और सनातन गोस्वामी कौन थे। उन्होंने संस्कृति एवं पर्यटन विभाग से इसके लिए प्रयास करने की अपील की।
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परिक्रमा मार्ग
- फोटो : अमर उजाला
उन्होंने कहा कि पुस्तिका या फिर किसी अन्य माध्यम से प्रतिवर्ष इस इतिहास को वर्तमान पीढ़ी तक पहुंचाया जाए, जिससे आने वाली पीढ़ियां भी चैतन्य महाप्रभु और सनातन गोस्वामी के परिचित होकर मुड़िया पूर्णिमा मेला के महत्व को समझ सकें।