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मां की 'जिद' से बना कामयाबी का कीर्तिमान, इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज है इस परिवार का नाम

Sat, 11 May 2019 02:59 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा Published by: मुकेश कुमार Updated Sat, 11 May 2019 02:59 PM IST
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mother's day 2019 success story of mother sohan devi in mathura
अपने परिवार के साथ सोनदेवी
मां की जिद और जज्बे से एक परिवार ने कामयाबी का कीर्तिमान रचा है। इस परिवार को ‘हाइली एजूकेटेड फैमिली’ का खिताब भी मिल चुका है। परिवार का नाम इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड 2018 में भी दर्ज हो चुका है। कामयाबी की यह कहानी मथुरा की पत्नी सोनदेवी की है। सोनदेवी ने ठान रखा था कि अपने छह बेटों और एक बेटी को हर हाल में डॉक्टर बनाना है। हालातों ने कई दफा रास्ता रोकने की कोशिश की, लेकिन उनकी इच्छाशक्ति और पक्के इरादों के चलते कामयाबी के रास्ते खुलते चले गए। मदर्स डे पर पढ़िए एक मां के संघर्ष की कहानी...
mother's day 2019 success story of mother sohan devi in mathura
सोनदेवी
सोनदेवी के पति सहित छह बेटे, एक बेटी, दामाद और चार बहुएं डॉक्टर हैं। वर्तमान में यह परिवार मथुरा महानगर में रह रहा है, लेकिन पहले पानीगांव में रहा करता था। उस वक्त परिवार की माली हालत भी ठीक नहीं थी। सोनदेवी की शादी भी कम उम्र में ही हो गई थी। गांव में उस समय अच्छे स्कूल भी नहीं थे। केवल प्राइमरी पाठशाला ही एक माध्यम हुआ करती थी। 
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सोनदेवी
सोनदेवी खुद भी डॉक्टर बनना चाहती थीं लेकिन कठिनाइयों के चलते नौवीं-दसवीं तक ही पढ़ सकीं। ऐसे में परिवार को शिक्षित बनाने का सपना देखने वाली सोनदेवी ने सबसे पहले अपने पति भगवान सिंह को डॉक्टर बनने के लिए प्रेरित किया। सोनदेवी ने घर की कमान अपने हाथ में ले ली और पति को डॉक्टरी पढ़ने के लिए भेज दिया। 
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पति भगवान सिंह के साथ सोनदेवी
पति ने राजस्थान आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय से डॉक्टरी की पढ़ाई पूरी की और डॉक्टर बने। भगवान सिंह के डॉक्टर बनने के बाद आर्थिक स्थिति में कुछ सुधार शुरू हुआ। इसके बाद बच्चों की पढ़ाई को लेकर सोनदेवी ने बीड़ा उठाया। एक-एक करके अपने छह बेटों और एक बेटी को भी डॉक्टर बना दिया। उनकी चार बहुएं और दामाद भी डॉक्टर हैं। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर
सोनदेवी के चौथे नंबर के पुत्र डॉ. महेश कुमार जो मौजूदा समय में हाथरस के मुरसान में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी हैं। उन्होंने बताया कि उनकी मां ने वाकई बहुत मेहनत की। आज उनके परिवार में 13 डॉक्टर हैं। इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड्स में भी इस परिवार का नाम दर्ज हो चुका है। परिवार के नाती-नातिन भी डॉक्टरी की तैयारी कर रहे हैं। 
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