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ताजमहल के आसपास बेहद 'खतरनाक' हैं हालात, यूपीपीसीबी की रिपोर्ट में हुआ यह खुलासा
Tue, 11 Jun 2019 01:42 PM IST
मुकेश कुमार
अमित कुलश्रेष्ठ, अमर उजाला, आगरा
अमित कुलश्रेष्ठ, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Tue, 11 Jun 2019 01:42 PM IST
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ताजमहल
- फोटो : अमर उजाला
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नोएडा, गाजियाबाद, गजरौला जैसे औद्योगिक क्षेत्रों से कहीं ज्यादा प्रदूषण ताजमहल के आसपास है। ताज के नजदीक स्थित नुनिहाई की वायु गुणवत्ता प्रदेशभर के औद्योगिक क्षेत्रों के मुकाबले ज्यादा पाई गई। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) की ओर से अप्रैल की एयर क्वालिटी पर जारी रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है।
ताजमहल पर छाई धुंध
- फोटो : अमर उजाला
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने बोदला के आवासीय क्षेत्र और नुनिहाई औद्योगिक क्षेत्र में एयर क्वालिटी मॉनीटरिंग के लिए उपकरण लगाए हैं। अप्रैल की रिपोर्ट के मुताबिक आगरा का वायु प्रदूषण सूचकांक प्रदेश के औद्योगिक शहरों के मुकाबले बेहद ज्यादा है। इसके साथ ही पीएम 2.5 कणों की मात्रा सामान्य से पांच गुना ज्यादा पाई गई है। इन सभी शहरों में आगरा की तरह ही औद्योगिक क्षेत्रों की मानीटरिंग की गई है।
फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
कई जगह तो आगरा के आवासीय क्षेत्र के मुकाबले औद्योगिक क्षेत्रों में प्रदूषण कम है। शहर में कूड़ा जलाने, कोयले के प्रयोग, ट्रैफिक जाम और अनवरत निर्माण और सड़क के लिए खोदाई के कारण उड़ रही धूल को प्रदूषण स्तर बढ़ाने की मुख्य वजह माना गया है। हजारों कांच इकाइयों वाले फिरोजाबाद, केमिकल फैक्ट्री वाले गजरौला, भारी उद्योग वाले गाजियाबाद और नोएडा का प्रदूषण भी आगरा से कम निकला।
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ताजमहल के पीछे यमुना में गंदगी
- फोटो : अमर उजाला
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी भुवन यादव ने बताया कि हमने एनजीटी के निर्देश के मुताबिक एयर एक्शन प्लान बनाया है, जिस पर संबंधित विभागों को कार्रवाई करनी है। टीटीजेड अथॉरिटी ने हाईवे समेत कई विभागों को प्रदूषण फैलाने पर नोटिस भेजे हैं। यहां धूल कण ही सबसे ज्यादा मात्रा में हैं।
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मुंह पर मास्क लगाए पर्यटक (फाइल)
- फोटो : अमर उजाला
सेंटर फार साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई) ने पर्यावरण दिवस पर एसओई-2019 रिपोर्ट जारी की, जिसमें प्रदूषण के कारण बेहद भयावह हालात बताए गए हैं। प्रदेश के 22 शहरों को बेहद खतरनाक स्तर पर रखा गया है, जहां प्रदूषण बढ़ रहा है। इस रिपोर्ट के मुताबिक आगरा में धूल कणों की मात्रा सबसे ज्यादा है। पीएम 2.5 और पीएम 10 कणों के कारण फेंफड़े की बीमारियां हो रही हैं। जो सरकारी कदम उठाए जाने चाहिए, उनका पालन ही नहीं हुआ, जबकि 2020 तक का लक्ष्य लिया गया था।