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ताजनगरी में 'खंजन' की पांच प्रजातियों ने दी दस्तक, रामचरितमानस में है इस पक्षी का जिक्र

Mon, 02 Nov 2020 02:48 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Mon, 02 Nov 2020 02:48 PM IST
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migratory birds wagtails arrived in Wetland of agra
सेवना क्षेत्र में खंजन पक्षी - फोटो : अमर उजाला
खंजन (वेगटेल) पक्षी ने आगरा में दस्तक दे दी है। ग्वालियर मार्ग स्थित सेवला क्षेत्र में इनकी अठखेलियां देखी जा सकती हैं। इस पक्षी की पांच प्रजातियां क्षेत्र में दिख रही हैं। वेगटेल पर अध्ययन कर रहे बायोडायवर्सिटी रिसर्च एंड डेवलपमेंट सोसायटी के अध्यक्ष डॉ. केपी सिंह ने बताया कि बारिश का मौसम समाप्त होते ही हिमालय के क्षेत्रों से इनका मैदानी क्षेत्रों में आना शुरू होता है। 
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खंजन पक्षी - फोटो : अमर उजाला
सर्दियों तक यह खंजन पक्षी मैदानी इलाकों में रहती हैं। मई में वापस ठंडे पर्वतीय क्षेत्रों में चली जाती हैं। देश में वेगटेल की छह मुख्य प्रजातियां हैं। इसमें व्हाइट वेगटेल, व्हाइट ब्राउडेड वेगटेल, वेस्टर्न यलो वेगटेल, सिट्रिन वेगटेल, ग्रे वेगटेल व फॉरेस्ट वेगटेल हैं। आगरा में फॉरेस्ट वेगटेल को छोड़कर बाकी प्रजातियों ने दस्तक दी है।
 
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खंजन पक्षी - फोटो : अमर उजाला
इन क्षेत्रों में भी है मौजूदगी
डॉ. केपी सिंह ने बताया कि सेवला क्षेत्र के वेटलैंड (आर्द्रभूमि) के साथ चंबल व यमुना के नजदीकी क्षेत्रों, कीठम झील, ताज नेचर वॉक, जोधपुर झाल के अलावा अन्य जगहों पर तालाबों, नहरों आदि के आसपास बड़ी संख्या में वेगटेल मौजूद हैं। वेगटेल को मोटासिलिडी परिवार के मोटासिला जीनस के अंतर्गत वर्गीकृत किया गया है। इसका आकार 8-9 इंच और शरीर लंबा होता है। 
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खंजन पक्षी - फोटो : अमर उजाला
तुलसीदास ने रामचरितमानस में खंजन का उल्लेख किया है
गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस में शरद ऋतु का वर्णन करते हुए खंजन की उपमा दी है कि ‘जानि सरद रितु खंजन आए। पाइ समय जिमि सुकृत सुहाए।’ मैथिलीशरण गुप्त ने भी अपने महाकाव्य साकेत में खंजन के बारे लिखा है कि ‘निरख सखी, ये खंजन आये, फेरे उन मेरे रंजन ने नयन इधर मन भाये! स्वागत स्वागत शरद भाग्य से मैंने दर्शन पाये।’
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जोधपुर झाल में साइबेरियाई पक्षी पिपिट - फोटो : अमर उजाला
आगरा और मथुरा सीमा पर जोधपुर झाल और सूर सरोवर पक्षी विहार (कीठम झील) पर भी प्रवासी परिंदे आने लगे हैं। इससे यह दोनों स्थल पक्षियों की चहचहाट से गुलजार हो गए हैं। साइबेरिया से हजारों किलोमीटर की यात्रा करके आई पिपिट की दो प्रजातियों ने जोधपुर झाल में सर्दी के प्रवास के लिए आशियाना बना लिया है। 
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