तपती दुपहरी, हाईवे पर सिर्फ प्रवासी मजदूर, रेला है कि रुकने का नाम ही नहीं ले रहा। कोई मजदूर कंधे पर बच्चे को बिठाए है तो कोई मां लाल को गोदी में लिए है। गृहस्थी का सामान भी सिर पर लिए हैं। एनए-2 पर सुबह से शाम तक हजारों लोग गुजर रहे हैं। ये सभी हरियाणा और राजस्थान से आ रहे हैं। किसी को बिहार जाना है तो किसी को पूर्वी उत्तर प्रदेश। मंजिल दूर है, वाहन है नहीं, मगर जज्बा है कि पैदल ही चले जा रहे हैं।
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घर पहुंचने के लिए निकले प्रवासी मजदूर
- फोटो : अमर उजाला
झज्जर में मजदूरी करते थे। फैक्टरी बंद हो गई। अब रोटी भी नहीं मिल रही थी। घर जा रहे हैं, वहां और कुछ न सही परिवार तो साथ होगा, रोटी तो मिल ही जाएगी - मनोज सिंह समस्तीपुर
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घर पहुंचने की उम्मीद में प्रवासी श्रमिक
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गुड़गांव में कारखाने बंद होने के बाद भी हम रुके रहे। प्रशासन ने भोजन का इंतजाम किया। अब यह नहीं मिल रहा। बच्चों को भूख से रोते देख नहीं पाए, सब लोग चले तो हम भी चल दिए .. प्रेमा देवी, बस्ती
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ट्रक पर जान जोखिम में डालकर जाने को मजबूर प्रवासी मजदूर
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गांव में घर है, उसी में सब मिलकर रहेंगे। यह संकट का समय है। इसके गुजर जाने केबाद ही वापस आएंगे - बंशीराम, बस्ती
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पैदल जा रहे श्रमिकों को ट्रक में सवार कराता पुलिसकर्मी
- फोटो : अमर उजाला
पत्नी बीमार हो गई, दवा तक नहीं मिली। अगर कुछ हो जाता तो परिवार वालों को क्या जवाब देते, इसलिए गांव जा रहे हैं, जो भी होगा देखा जाएगा, अपनो केबीच तो रहेंगे - संदीप कुमार, समस्तीपुर