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Mid Day Meal Scam: प्रिंसिपल ने नाम बदलकर किया 11.46 करोड़ रुपये का घोटाला, इस तरह खुला राज

Wed, 03 Aug 2022 11:50 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Wed, 03 Aug 2022 11:50 AM IST
सार

11.46 करोड़ रुपये के घोटाले में भी चंद्रकांत शर्मा सारस्वत आवासीय शिक्षा सेवा समिति में सुनील बनकर मिड डे मील की करोड़ों की रकम निकालता रहा। जिम्मेदार अधिकारी बेखबर बने रहे।

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mid-day meal scam of 11.46 crores Chandrakant took out the amount as Sunil remained oblivious responsible
मिड डे मील - फोटो : अमर उजाला

मिड डे मील घोटाले का आरोपी चंद्रकांत शर्मा 36 लाख रुपये के गबन में जेल जा चुका है। तत्कालीन जिलाधिकारी ने वर्ष 2014 में अपने स्तर से कराई विभागीय जांच में भवन निर्माण एवं अन्य अनियमितताओं में उसे दोषी पाया गया था। वहीं 11.46 करोड़ रुपये के घोटाले में भी चंद्रकांत शर्मा सारस्वत आवासीय शिक्षा सेवा समिति में सुनील बनकर मिड डे मील की करोड़ों की रकम निकालता रहा। जिम्मेदार अधिकारी बेखबर बने रहे। अब इतने बड़े घोटाले में शिक्षा विभाग के अधिकारियों पर भी कार्रवाई का फंदा कस सकता है। मिड डे मील की रकम को आगरा के हींग की मंडी स्थित एक्सिस बैंक की शाखा, सिंडीकेट बैंक बोदला, इलाहाबाद बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, कारपोरेशन बैंक आवास विकास कालोनी, डाकघर अछनेरा व सिकंदरा में सांठगांठ करके अपने, पत्नी और बच्चों के नाम से खाते खोलकर जमा करा दिए।

पत्नी के नाम से खरीदा व्यावसायिक भूखंड

जांच में पता चला कि चंद्रकांत शर्मा ने आवास विकास कॉलोनी के सेक्टर चार में वर्ष 2014 में व्यावसायिक भूखंड खरीदा। इसे हज्जूपुरा, ताजगंज निवासी राजकमल शर्मा से पत्नी के नाम पर लिया। इस पर निर्मित भवन का स्वीकृत नक्शा भी राजकमल के नाम पर है।

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रीट का प्रश्व पत्र वायरल करने वाला गिरफ्तार - फोटो : Social Media

पहले भी गया जेल 

मिड डे मील घोटाले का आरोपी चंद्रकांत शर्मा 36 लाख रुपये के गबन में जेल जा चुका है। तत्कालीन जिलाधिकारी ने वर्ष 2014 में अपने स्तर से कराई विभागीय जांच में भवन निर्माण एवं अन्य अनियमितताओं में उसे दोषी पाया गया था। मामले में मुकदमा दर्ज होने के बाद शिक्षक चंद्रकांत शर्मा के साथ में तत्कालीन बीएसए जेएस शाक्य सहित एक प्रधान को जेल भेजा गया था। हालांकि बाद में सन 2018 में न्यायालय ने इस मामले में चंद्रकांत शर्मा सहित सभी आरोपियों को बरी कर दिया। अब शिक्षक का घोटाला सामने आने पर शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है।
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विजिलेंस थाना - फोटो : अमर उजाला

आठ शिक्षाधिकारी भी आ सकते हैं जांच के दायरे में 

विजिलेंस ने वर्ष 2008 से 2014 तक एमडीएम में बड़ा घोटाला पकड़ा है। इसमें विजिलेंस ने प्रारंभिक रिपोर्ट में जिले के शिक्षाधिकारियों का नाम तो नहीं खोला है। इस स्थिति में अगर देखें तो इन छह वर्ष में जिले में तैनात रहे बेसिक शिक्षाधिकारियों के नाम भी विजिलेंस की विवेचना के दायरे में आएंगे। जिन लोगों पर मुकदमा दर्ज हुआ है, उसमें एमडीएम के समन्वयक अभी भी कार्यालय में तैनात हैं। इस स्थिति में विवेचना में इस दरम्यान फिरोजाबाद में तैनात रहे आठ शिक्षाधिकारी भी जांच के दायरे में आ सकते हैं।
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यूपी प्राइमरी स्कूल (प्रतीकात्मक तस्वीर)। - फोटो : अमर उजाला

प्राइमरी विद्यालय में प्रधानाध्यापक है शिक्षक

मध्याह्न भोजन में मुख्य आरोपित चंद्रकांत शर्मा जाजपुर स्कूल में प्रधानाध्यापक के रूप में कार्यरत है। इससे पहले शिकोहाबाद ब्लॉक के स्कूलों में शिक्षक के रूप में कार्यरत रहा है। आय से अधिक संपत्ति की शिकायत उक्त शिक्षक की हुई थी। विजिलेंस द्वारा इस मामले में ही उक्त शिक्षक की जांच की जा रही थी। शिक्षक की आज भी बीएसए कार्यालय में कई लिपिकों और ऑपरेटरों से सांठगांठ हैं।
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फिरोजाबाद बीएसए अंजली अग्रवाल - फोटो : अमर उजाला

नियमानुसार होगी कार्रवाई

मध्याह्न भोजन घोटाले के मामले में विजिलेंस के मुकदमे के संबंध में अधिकृत रूप से कोई जानकारी नहीं है। विजिलेंस ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में अभियोजन की स्वीकृति मांगी थी, जो विभाग ने पहले ही भेज दी थी। अगर मुकदमा दर्ज हुआ है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। - अंजली अग्रवाल, बीएसए फिरोजाबाद 
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