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लार्ड कर्जन ने दिया था तोहफा, मिस्त्र में है भी इसकी छाप, अब ताजमहल पर इसे लेकर असमंजस

Sat, 06 May 2017 10:55 AM IST
अमित कुलश्रेष्ठ/अमर उजाला आगरा
अमित कुलश्रेष्ठ/अमर उजाला आगरा Updated Sat, 06 May 2017 10:55 AM IST
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lord curzon gifted this precious thing to tajmahal also famous in egypt
ताजमहल - फोटो : अमर उजाला
ताजमहल की खूबसरती से प्रभावित होकर दिए गए तोहफे को लेकर असमंजस बरकरार है। 109 साल पुरानी यह विरासत भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधिकारियों की चिंता भी बढ़ा रही है और लेकिन पर्यटकों की पसंद के चलते वे इसे दिखाने से इनकार भी नहीं कर सकते। नतीजा अब शीर्ष अधिकारियों के आदेश का इंतजार है। आदेश मिलने पर ही अंग्रेजों के इस तोहफे को पर्यटक दोबारा ताजमहल में देख सकेंगे। नहीं तो सात समंदर पार से मोहब्बत की निशानी देखने आने वालों को निराशा ही हा‌थ लगने वाली है। 
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ताजमहल - फोटो : अमर उजाला
बता दें कि अगस्त 2015 में ताजमहल के रॉयल गेट से नीचे लगा एक ब्रास का लैंप गिर गया था। यही वो तोहफा है जिसे ताजमहल पर अंग्रेजों की निशानी कहा जाता है। इस लैंप को लेकर इतिहास में बड़ा ही रोचक तथ्य मौजूद है। आइए जानते इसके बारे में...
 
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ताजमहल - फोटो : अमर उजाला
आपको जानकर हैरानी होगी कि ताजमहल पर लगा यह लैंप कोई साधारण चीज नहीं बल्कि वो गिफ्ट है जिसे अंग्रेज वायसरॉय (तत्कालीन) लार्ड कर्जन ने ताजमहल को दिया था। यह मिस्‍त्र से भी ताल्लुक रखता है। बताया जाता है कि 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान ब्रिटिश सिपाहियों और अधिकारियों ने ताजमहल की सूरत खराब कर दी थी। लेकिन 19वीं शताब्दी के अंत में तत्कालीन वायसरॉय लार्ड कर्जन ने ताजमहल की खूबसूरती को पहचाना और इसे संवारने के लिए मरम्मत कार्य करने के आदेश दिए थे।
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कर्जन लैंप - फोटो : अमर उजाला
उनके आदेश पर चला यह अभियान 1908 में जाकर पूरा हुआ और इसके बाद ताज में जो निखार आया उसे देखकर लार्ड कर्जन भी इस मो‌हित हो गए। इसके बाद उन्होंने ताजमहल के गेट के आंतरिक हिस्से में, जिसे रॉयल गेट कहा जाता है और मुख्य गुंबद में करीब चार फुट ऊंचे दो खूबसूरत लैंप लगवाए। यह लैंप अपने आप में इसलिए अनूठा है क्योंकि इसे इससे पहले केवल मध्य पूर्वी देश मिस्‍त्र की राजधानी कायरो की मस्जिद में ही देखा गया था।   
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ताजमहल - फोटो : अमर उजाला
लेकिन अगस्त 2015 में ताजमहल के रॉयल गेट पर लगा यह 109 साल पुराना ब्रास का लैंप गिर गया। लैंप गिरने के बाद इसे ठीक कराने और ट्रीटमेंट के लिए एएसआई की केमिकल ब्रांच को सौंप दिया गया था। पहले ब्रिटिशकालीन लैंप की टूट-फूट और कांच दोबारा लगाने पर विचार किया गया लेकिन एएसआई के नियमों को देखते हुए लैंप का केवल केमिकल ट्रीटमेंट ही किया गया। 
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